पंजाब

विडंबना: बच्चों के भविष्य से खेल रही प्रदेश सरकार

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स्टॉफ की कमी, शिक्षा सेवाओं का जनाजा निकला

साढे 400 विद्यार्थियों के लिए केवल तीन अध्यापक

तरनतारन/सराय अमानत खां (राहुल)। पंजाब सरकार के बेहतर शिक्षा उपलब्ध करवाने के दावों की पोल खुल गई है। गांव गंडीविंड के सरकारी सीनियर सैकेंडरी स्कूल में अध्यापकों की कमी ने साबित कर दिया है कि ग्रामीण क्षेत्र में शिक्षा का स्तर कहां तक गिरता जा रहा है। छठी से दसवीं तक शिक्षा प्राप्त करने वाले 450 विद्यार्थियों के लिए केवल तीन अध्यापक ही हैं। जिनमें दो पंजाबी व एक हिंदी का अध्यापक है, जबकि एसएस की पांच की पांच पद रिक्त हैं।

मैथ, विज्ञान, अंग्रेजी का कोई भी अध्यापक नहीं

स्कूल में अंग्रेजी, हिसाब, विज्ञान का कोई भी अध्यापक नहीं है, जिसकी पुष्टि करते हुए स्कूल की प्रिंसिपल अनीता पठानिया ने बताया कि स्कूल में फिजिकल एजुकेशन का भी कोई अध्यापक नहीं है। जिस कारण यह स्कूल अध्यापकों की कमी से जूझ रहा है। अब प्रमुख अध्यापकों व पीटीआई कोटे अधीन अध्यापकों की सेवाएं लेने के साथ-साथ सीनियर सैकेंडरी स्कूल में तैनात लैक्चरारों की सेवाएं लेनी पड़ रही हैं। जबकि अध्यापकों की कमी के बारे में गांव की पंचायत व उच्च अधिकारियों को समय समय पर अवगत करवाया गया है।

सरकार को लिखा गया है पत्र: डीईओ

जिला शिक्षा अधिकारी तरनतारन गुरभजन सिंह से संपर्क करने पर उन्होंने स्कूल में अध्यापकों की कमी को स्वीकार किया। उन्होंने कहा कि इस संबंधी सरकार को हर महीने लिखा जाता है और नई भरती होने पर यहां अध्यापक तैनात हो सकते हैं। सीनियर सैकेंडरी क्लासों के लिए हाल ही में दो लैक्चरार भेजे गए हैं। जिस कारण यदि लैक्चररों के पास पीरियड कम हों तो नौवीं व दसवीं कक्षा के पीरियड भी बांट दिए जाते हैं ताकि बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो। स्कूल प्रिंसिपल की भी 9 पीरियड लगाने की ड्यूटी होती है।

पंचायत ने किया प्रस्ताव पास: सरपंच

गांव की सरपंच बीबी हरजीत कौर व वरिष्ठ कांग्रेसी नेता गुणराज सिंह बंटी ने कहा कि पंचायत ने पहले भी प्रस्ताव पास कर सरकार को भेजे हैं। पिछले दिनों विधायक डॉ. धर्मवीर अग्निहोत्री के पास भी यह मुद्दा उठाया गया था, जिन्होंने जल्द स्कूल में अध्यापकों की कमी पूरी करने का विश्वास दिलवाया है।

बॉर्डर एरिया को किया अनदेखा: सोहल

सीपीआई के प्रांतीय नेता कामरेड दविन्दर कुमार सोहल ने कहा कि समय की सरकारों ने हमेशा सीमावर्ती क्षेत्र को शिक्षा पक्ष से अनदेखा किया है। पंजाब की सत्ता पर काबिज कांग्रेस सरकार भी कोई ध्यान नहीं दे रही। यह हालत केवल गंडीविंड स्कूल के नहीं बल्कि कई छोटे बड़े सरकारी स्कूल इस समस्या से जूझ रहे हैं। गांवों के सरकारी स्कूलों में गरीब व मध्यवर्गीय परिवारों के बच्चे चाहते हुए की अपेक्षित शिक्षा प्राप्त नहीं कर सकते। क्योंकि वह प्राईवेट स्कूलों की फीसों भरने से असमर्थ होते हैं। सरकार को इस तरफ ध्यान देना चाहिए।

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