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नेशनल हेराल्ड मामले में सोनिया-राहुल को झटका

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आयकर विभाग को जांच की मंजूरी

नई दिल्ली। नैशनल हेराल्ड मामले में आरोपी कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और उपाध्यक्ष राहुल गांधी को हाईकोर्ट ने बड़ा झटका दिया है। कोर्ट ने इस मामले में आयकर विभाग की जांच का रास्ता साफ कर दिया है। इस मामले में गांधी परिवार की तरफ से केस की पैरवी कर रहे वरिष्ठ वकील और कांग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि कोर्ट के इस आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील की जाएगी। बता दें कि यंग इंडियन प्राइवेट लिमिटेड कंपनी में सोनिया और राहुल गांधी की हिस्सेदारी है।

आयकर विभाग अब यंग इंडिया के खातों में कथित हेराफेरी की जांच करेगा। विभाग सोनिया और राहुल से पूछताछ भी कर सकता है। आरोप है कि यंग इंडियन प्राइवेट लिमिटेड नाम से एक कंपनी बनाई गई थी, जिसने नैशनल हेरल्ड की पब्लिशर एसोसिएटिड जरनल लिमिटेड को टेकओवर किया। भाजपा नेता सुब्रमण्यन स्वामी ने इस मामले में कोर्ट का रुख किया था।

आरोप

कांग्रेस पार्टी ने इस कंपनी को 90 करोड़ रुपये बतौर ऋण भी दे दिया। इस कंपनी ने ‘एजेएल’ का अधिग्रहण कर लिया। भाजपा के नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने वर्ष 2012 में एक याचिका दायर कर कांग्रेस के नेताओं पर ‘धोखाधड़ी’ का आरोप लगाया। उन्होंने अपनी याचिका में कहा कि ‘यंग इंडियन प्राइवेट लिमिटेड’ ने सिर्फ 50 लाख रुपयों में 90.25 करोड़ रुपये वसूलने का उपाय निकाला जो ‘नियमों के खिलाफ’ है। याचिका में आरोप है कि 50 लाख रुपये में नई कंपनी बना कर ‘एजेएल’ की 2000 करोड़ रुपये की संपत्ति को ‘अपना बनाने की चाल’ चली गई।

क्या है मामला

ये मामला नेशनल हेराल्ड अखबार से जुड़ा है, जिसकी स्थापना 1938 में जवाहरलाल नेहरू ने की थी। उस समय से यह अखबार कांग्रेस का मुखपत्र माना जाता रहा। अखबार का मालिकाना हक एसोसिएटेड जर्नल लिमिटेड यानी ‘एजेएल’ के पास था जो दो और अखबार भी छापा करती थी। हिंदी में ‘नवजीवन’ और उर्दू में ‘कौमी आवाज’। आजादी के बाद 1956 में एसोसिएटेड जर्नल को अव्यवसायिक कंपनी के रूप में स्थापित किया गया और कंपनी एक्ट धारा 25 के अंतर्गत इसे कर मुक्त भी कर दिया गया। वर्ष 2008 में ‘एजेएल’ के सभी प्रकाशनों को निलंबित कर दिया गया और कंपनी पर 90 करोड़ रुपये का कर्ज भी चढ़ गया।

फिर कांग्रेस नेतृत्व ने ‘यंग इंडियन प्राइवेट लिमिटेड’ नाम की एक नई कंपनी बनाई, जिसमें सोनिया गांधी और राहुल गांधी सहित मोतीलाल वोरा, सुमन दुबे, आॅस्कर फर्नांडिस और सैम पित्रोदा को निदेशक बनाया गया। इस नई कंपनी में सोनिया गांधी और राहुल गांधी के पास 76 प्रतिशत शेयर थे जबकि बाकी के 24 प्रतिशत शेयर अन्य निदेशकों के पास थे।

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