सम्पादकीय

शरीफ भले ही दोषी हों लेकिन वह हीरो बन गए

Shrif Become Hero for Pakis?

नवाज शरीफ व उनकी बेटी मरियम की गिरफ्तारी से वहां की राजनीति में आया भूचाल Shrif Become Hero for Pakis?

पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ व उनकी बेटी मरियम की गिरफ्तारी से वहां की राजनीति में भूचाल सा मच गया है। उन्हें भ्रष्टाचार के मामले में दूसरी बार गिरफ्तार किया गया है। पाक में आम चुनाव सिर पर होने के कारण यह घटना चक्र बहुत अहमियत रखता है। चाहे पाक की न्यायपालिका और सेना पर कट्टरपंथियों का प्रभाव है फिर भी इस बात को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता कि अदालत ने भ्रष्टाचार के ठोस मामले को उठाया है। पनामा पेपर मामला पाक का अंदरूनी मामला नहीं जिसको शरीफ परिवार के खिलाफ सिर्फ बदले की कार्रवाई कहा जाए। दूसरी तरफ दूसरे राजनीतिज्ञों के मुकाबले नवाज शरीफ ने इतनी हिम्मत जरूर दिखाई है कि वह कानून से भागते नहीं। शरीफ ने 70 से ज्यादा अदालती पेशियां निजी तौर पर भुगती हैं।

यदि वह चाहते तो सजा होने पर अपने वतन लौटने से वह टालमटोल भी कर सकते थे। जेल जाना तय होने के बावजूद उनका वतन लौटना इस बात की तरफ संकेत करता है कि उनको अपनी पार्टी के लिए चुनाव में जनता से हमदर्दी की वोट मिलने की बड़ी उम्मीद है।

नवाज शरीफ को भ्रष्टाचार के मामले में दूसरी बार गिरफ्तार किया गया है Shrif Become Hero for Pakis?

शरीफ मुजरिम होने के बावजूद ‘नायक’ होने का प्रभाव देने में कामयाब रहे हैं। दूसरी तरफ पूर्व तानाशाह परवेजÞ मुशर्रफ जैसे नेता अदालतों के बुलाने के बावजूद उस देश में बैठे हुए हैं जिसकी कभी वो आलोचना करते रहे हैं। इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि न्याय का चक्र जिस तरह चुनावों को देखकर घुमाया गया उसके पीछे शरीफ के विरोधियों व सेना का हाथ है। चाहे शरीफ देश में स्वतंत्र होकर विकास तथा अमन के लिए कार्य नहीं कर सके फिर भी ऐसे नेताओं पर शिकंजे कसे जाना पाक के लिए काफी चुनौती भरा है। जिस तरह शरीफ की गिरफ्तारी के लिए पुलिस ने उतावलापन दिखाया है उससे जाहिर हो जाता है कि यहां अदालती फैसले के बगैर भी बहुत कुछ है। पुलिस अधिकारी शरीफ को गिरफ्तार करने के लिए जहाज में जा पहुंचे।

जो नेता गिरफ्तार होने के लिए ही लंदन से आया वह भागने की ताक में क्यों होगा भला। दरअसल पुलिस शरीफ की छवि बिगाड़ने के लिए निम्न स्तर की कार्रवाई कर रही थी। यह हालत पाक के बुरे हालातों की तस्वीर पेश करते हैं। किसी भी बदलाव की आशा के लिए चुनावों तक के परिणाम का इंतजार करना होगा।

 

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