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डीएनए पर रिसर्च हो तो खत्म होंगी सभी बीमारियां

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Ruhani Satsang in Sirsa। इन्सानियत के भले के लिए हो दिमाग का इस्तेमाल : पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां

सरसा(सुनील वर्मा)। यह घोर कलियुग का समय है, जिसमें मन-इन्द्रियां बड़े फैलाव पर हंै। आज का इन्सान इतना चतुर-चालाक है जो भगवान को भी कुछ नहीं समझता। इन्सान सोचता है कि जितनी समझ उसे है उतनी किसी को नहीं,यह इन्सान की गलतफहमी है। (Ruhani Satsang In Sirsa)

उक्त अनमोल वचन पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां ने रविवार को शाह सतनाम जी धाम में आयोजित मासिक रुहानी सत्संग के दौरान फरमाए। रूहानी सत्संग के दौरान पूज्य गुरु जी ने 14,345 नए नाम अभिलाषी जीवों को गुरुमंत्र की अनमोल दात प्रदान की।

इंसानियत के लिए कार्य करें इंसान | Ruhani Satsang In Sirsa

वहीं इस अवसर पर हजारों लोगों ने रूहानी जाम ग्रहण कर नशों व सामाजिक कुरीतियों से तौबा की। रूहानी सत्संग के दौरान 23 नवयुगल वैवाहिक बंधन में बंधे। सत्संग के दौरान पूज्य गुरु जी ने 3 जरुरतमंद परिवारों को आशियाना मुहिम के तहत साध-संगत द्वारा बनाकर दिए गए मकानों की चाबियां पात्र परिवारों को भेंट की वहीं 2 जरुरतमंद परिवारों को उनके इलाज हेतू एक लाख 70 हजार रुपए के चैक प्रदान किए गए। इसके अलावा साथी मुहिम के 4 जरुरतमंद निशक्तजनों को ट्राईसाईकिल भी प्रदान की गई।

  • 14345 ने लिया गुरुमंत्र
  • हजारों ने ग्रहण किया रूहानी जाम
  • 23 नवयुगल बंधे वैवाहिक बंधन में

पूज्य गुरु जी ने फरमाया कि अगर इन्सान के डीएनए पर रिसर्च किया जाए तो बहुत से रोग ही खत्म हो जाएंगे, लेकिन ऐसा लोग करने नहीं देंगे, क्योंकि ऐसा करने से दवाईयां बनाने वाली बहुत सी फैक्ट्रियां ही बंद हो जाएंगी। रामायण, महाभारत काल में जो सैनिक शाम तक तलवार से लड़ते हुए घायल हो जाते थे वो सुबह स्नेहलेप का लेप लगाने से दोबारा से युद्ध में लड़ने के लिए पहुंच जाते थे।

इन्सान को अपने दिमाग का प्रयोग इन्सानियत के भले में प्रयोग करना चाहिए

ऐसा अब भी संभव है। पूज्य गुरु जी ने फरमाया कि डेरा सच्चा सौदा के चिकित्सकों ने स्टैमसैल में सफलता हासिल की है जोकि डीएनए की ओर पहला कदम है। इन्सान को अपने दिमाग का प्रयोग इन्सानियत के भले में प्रयोग करना चाहिए।

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पूज्य गुरु जी ने फरमाया कि इन्सान अपने दिमाग का ज्यादा प्रयोग दुनिया की तबाही के लिए करता है और इन्सान को करना यह चाहिए वह अपने दिमाग का प्रयोग ऐसी खोजों या शोध कार्यों के लिए करें, ताकि सारी दुनिया को सुख-शान्ति अधिक से अधिक मिले, आन्नदमय जीवन जी सकें। इन्सान को अपना दिमाग दुनिया से भुखमरी को समाप्त करने वाली रिसर्च पर करना चाहिए लेकिन अफसोस की बात तो यह है कि पूरी दुनिया में इस बात की होड़ मची हुई है कि एक-दूसरे इंसान को नीचा कैसे दिखाया जाए, एक-दूसरे देश में टैक्नोलॉजी में कैसे पछाड़ा जाए की होड़ मची हुई है।

पूज्य गुरु जी ने फरमाया कि अगर पूरी दुनिया के वैज्ञानिक भलाई कार्यों पर शोध करने लग जाएं तो गाड़ियां इत्यादि चलाने के लिए पेट्रोल, चूल्हा जलाने के लिए गैस सिलेंडर की भी आवश्यकता ही नहीं पड़ेगी। सूरज में इतनी शक्ति है कि बैटरी से साईकिल, मोटरसाईकिल चलेंगे। गैस सिलेंडर से चूल्हे द्वारा बहुत सस्ता खाना बनाया जा सकता है। पूज्य गुरु जी ने फरमाया कि कलियुग के समय में बहुत जरुरी है कि इन्सान इन्सानियत के लिए कार्य करें।

पीर-फकीर कभी किसी का बुरा नहीं करते

इन्सान को अपने दिमाग का प्रयोग परहित के कार्यों के लिए करना चाहिए। आप जी ने फरमाया कि संत पीर-फकीर कभी किसी का बुरा नहीं करते बल्कि जब इन्सान में खुद में कमी होती है तो वह दूसरों में कमियां निकालता है। इन्सान को कभी भी अपने अन्दर नैगेटिव विचार नहीं लेकर आने चाहिए। इस कलियुग के समय में राम-नाम का जाप करना अति जरुरी है। अगर इन्सान भगवान के नाम का जाप नहीं करता तो उसे सदबुद्धि नहीं आती, अपना भला नहीं कर पाओगे।

राम-नाम का जाप करने से ही परमपिता परमात्मा की खुशियां मिलती हंै। जब इन्सान भगवान के नाम को लेकर उसका जाप करता है और वचनों पर फूल चढ़ाता है तो इन्सान की जिन्दगी में बहारें छा जाती हैं। पूज्य गुरु जी ने फरमाया कि भगवान ने सभी को एक जैसा दिमाग दिया है, मगर फर्क बस इतना है कि इसका इस्तेमाल कोई कम करता है तो कोई ज्यादा।

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