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जल्द रफ्तार पकड़ेगी ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना

देहरादून (सच कहूँ न्यूज)। बहुचर्चित और बहुप्रतीक्षित ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेलवे लाइन अपनी निर्माण प्रक्रिया की ओर बढ?े जा रही है। इसका कारण ऋषिकेश से कर्णप्रयाग तक रेलवे परियोजना में 300 हेक्टेयर से अधिक वन भूमि का मिलना है। इस पर वन मंत्रालय  ने पर्यावरणीय स्वीकृति दे दी है।
सूत्रों की मानें तो दिसंबर में इस परियोजना पर काम प्रारंभ हो जाएगा। रेल लाइन बनने से ऋषिकेश से कर्णप्रयाग की यात्रा अधिक सुरक्षित हो जाएगी। साथ ही यात्रा में ढाई से तीन घंटे समय कम हो जाएगा। अभी करीब आठ घंटे का समय लगता है। ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना 125 किलोमीटर लंबी है। यह पांच जिलों से होते हुए जाएगी। यूं कह ले कि यह लाइन पांच जिलों का प्रतिनिधित्व करेगी। इन जिलों में देहरादून,पौड़ी,टिहरी,चमोली और रुद्रप्रयाग शामिल हैं। इस रेलवे लाइन का 85 प्रतिशत ट्रैक सुरंग से गुजरेगा। राजमार्ग,वन क्षेत्र,नदियों और गांव से गुजरने वाली रेलवे लाइन पर 12 रेलवे स्टेशन प्रस्तावित हैं।
ऋषिकेश कर्णप्रयाग रेल लाइन के प्रथम चरण में देहरादून वन प्रभाग के लिए वन एवं पर्यावरण मंत्रालय भारत सरकार ने वन भूमि के प्रस्ताव को हरी झंडी दे दी है। वन मंत्रालय की पहल पर कर्णप्रयाग रेलवे लाइन के लिए ऋषिकेश में नए रेलवे स्टेशन का काम शुरू हो जाएगा। ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना 2014 में स्वीकृत हुई थी।
वन चौकी बनेगी पहला स्टेशन
ऋषिकेश वन प्रभाग में बिछने वाली इस रेल लाइन में बाईपास मार्ग पर अंडर ब्रिज बनना है। ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन का पहला रेलवे स्टेशन देहरादून मार्ग स्थित वन चौकी को बनाया जाना प्रस्तावित है। इससे कुछ ही दूरी पर ऋषिकेश वन प्रभाग में ही एक स्टील गार्डर पुल का निर्माण होना है। इसी प्रकार नए रेलवे स्टेशन के निर्माण के लिए अंडर ब्रिज और ओवर ब्रिज दोनों के निर्माण के कार्यवाई प्रारंभ हो जाएगी।
अफसरों ने दिया प्रजेंटेशन
रेलवे विकास निगम के अफसरों ने प्रोजेक्ट का विस्तृत प्रस्तुतिकरण दिया है। दूसरी ओर गौचर निवासी चन्द्र सिंह नेगी का कहना है कि रेलवे लाइन का काम भले ही कागजों में चल रहा है पर अब तक उन लोगों के जमीन का मुआवजा नहीं दिया गया है। मुआवजा देने के बाद ही शायद काम में तेजी आएगी। 100 से 127 किलोमीटर की दूरी सुरंगों के माध्यम से तय होगी और 11 रेलवे स्टेशनों लोगों की सुविधा के लिए बनाए जाएंगे।
4595 करोड़ होंगे व्यय
यह रेलवे स्टेशन हैं। ऋषिकेश, शिवपुरी,ब्यासी,देवप्रयाग, मलेथा, श्रीनगर,धारी, रुद्रप्रयाग,गोलतीर,गौचर और कर्णप्रयाग हैं। रेल निगम मानता है कि जमीन अधिग्रहण में 4595 करोड़ से अधिक की राशि व्यय होगी। इस रेलवे लाइन से बद्रीनाथ, केदारनाथ, फूलों की घाटी, हेमकुंड साहिब, गोपेश्वर,तुंगनाथ, औली जैसे धार्मिक और पर्यटन स्थलों को भरपूर बढ़ावा मिलेगा।
पर्वतीय फसलों को मिलेगा बढ़ावा
साथ ही साथ पहाड़ के माल्टा, सेब, भट्ट,मंडुवा,आलू,मटर,टमाटर, बेमौसमी सब्जी, गहत,चैलाई,झिंगोरा,मूले, ककड़ी, मक्की,अदरक,नीबू, कॉफल जैसे पर्वतीय फसलों की भरपूर बढ़ावा मिलेगा।परिवहन के रूप में रेलवे लाइन अच्छा काम करेगी और हर मौसम में सड़कें चलती रहेंगी। रेलवे लाइन मार्ग बंद होने का खतरा वर्षा ऋतु नहीं रहेगा और आवागमन बराबर बना रहेगा, इससे लोगों को अपने ही घर में रोजगार मिलेगा।

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