हरियाणा

जांच कमेटी ने निगम के चीफ को सौंपी रिपोर्ट

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फर्जी ट्यूबवेल कनेक्शन घोटाला

  • दोषी अधिकारियों पर होगी सख्त कार्रवाई

सरसा (सुनील वर्मा)। पिछले 12 दिनों से फर्जी टयूबवेल कनेक्शन घोटाले को लेकर भीषण गर्मी में धरने पर बैठे किसानों का संघर्ष आखिरकार रंग ले ही आया। फर्जी बताकर काटे गए सभी कनेक्शन अब निगम नियमानुसार रेगूलर करेगा। इसके लिए किसान को मात्र 100 रुपये प्रतिकिलोवाट मोटर के हिसाब से नार्मल सिक्योरिटी ही जमा करवानी होगी, यानि करीब 1500 रुपये देने होंगे।

उसके बाद निगम किसानों के कनेक्शन रेगूलर कर देगा। इतना ही नहीं सिक्योरिटी राशि भी केवल उन्हीं किसानों को जमा करवानी है, जिसकी सिक्योरिटी निगम के पास जमा नहीं है। बाकी को कोई राशि जमा नहीं करवानी है। फर्जी कनेक्शन के तहत 20 में से ऐसे केवल 6 किसान ही ऐसे हैं, जिनकी सिक्योरिटी राशि ठेकेदार ने निगम को जमा नहीं करवाई थी।

बाकी को केवल कागजी कार्रवाई पूरी करनी होगी। किसानों को यह आश्वासन सोमवार को हिसार में आयोजित हुई बैठक में बिजली निगम के चीफ इंजीनियर आरके सोढ़ा ने दिया है। इससे पूर्व किसान बिजली निगम के सीपीएस डॉ. कमल गुप्ता से मुलाकात करके आए थे। उन्होंने निगम के अधिकारियों को किसानों के साथ न्याय करने का आदेश दिया था।

किसान, सरकार और बिजली निगम के बीच यह महत्वपूर्ण वार्ता करवाने में भाजपा नेता व जिला परिषद के सदस्य आदित्य देवीलाल की सबसे बड़ी भूमिका रही। किसानों ने आदित्य देवीलाल का आभार जताया। सोमवार को सरसा से आदित्य देवीलाल के नेतृत्व में किसान नेता प्रकाश ममेरा, विकल पचार, जगदीश रुपावास, सुनील, भीम सिंह हिसार गए थे। इस महत्वपूर्ण बातचीत में यह भी यह भी आश्वासन दिया गया कि उन पर दर्ज की गई एफआईआर और जुर्माना भी निगम माफ करेगा।

भीषण गर्मी में धरने पर बैठे किसानों को आने लगे चक्कर

लघु सचिवालय के गेट आगे धरने पर बैठकर नारेबाजी कर रहे किसानों की भीषण गर्मी में तबीयत खराब होने लगी। रूपावास के किसान हरिसिंग को धरने पर ही चक्कर आ गया। उसे पुलिस की गाड़ी अस्पताल लेकर गई। इसके अलावा कुछ महिलाओं को छांव में बैठाया गया। मगर किसानों का कहना था कि जब डीसी खुद आकर उनकी सुनवाई नहीं करते। तब तक वे यहीं धरने पर बैठे रहेंगे।

45 मिनट रोके रखा लघुसचिवालय का मुख्य गेट, मांग पूरी होते ही धरना समाप्त

इधर सरसा में किसानों ने ट्यूबवेल कनेक्शन रेगूलर करने की मांग को लेकर अपना विरोध प्रदर्शन जारी रखा। सोमवार को दोपहर 12 बजकर 45 मिनट पर किसान लघुसचिवालय के गेट पर पहुंचे। वहां जाकर उन्होंने मुख्य गेट को रोक लिया। उसके आगे धरने पर बैठ गए। सरकार और निगम के खिलाफ नारेबाजी करने लगे।

इस दौरान किसानों ने किसी भी अधिकारी को मुख्य गेट से गाड़ी लेकर बाहर नहीं निकलने दिया। वे पिछले गेट निकले। किसानों के साथ महिलाएं भी धरने में शामिल थी। सुरक्षा के लिए पुलिसकर्मी तैनात थे। 45 मिनट बाद सिटीएम डॉ. वेदप्रकाश बैनीवाल किसानों के पास पहुंचे। उन्होंने किसानों को आश्वासन दिया कि हिसार में मीटिंग चल रही है।

उसका फैसला आपके पक्ष में होगा। इसलिए यहां से धरना खत्म कर दीजिए। किसानों ने सिटीएम की बात मानते हुए लघुसचिवालय के गेट के आगे से धरना खत्म कर दिया। वे वापस अपने धरना स्थल पर आकर बैठ गए। इससे पहले कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष अशोक तंवर किसानों के पास पहुंचे। उन्होंने किसानों का समर्थन करते हुए कहा कि कांग्रेस पार्टी उनके साथ है। धरना खत्म करवाने के लिए भाजपा जिलाध्यक्ष यतिंद्र सिंह एडवोकेट पहुंचे। उन्होंने लड्डू बांटकर धरना खत्म करवाया।

किसान निर्दोष, दोषियों को मिलेगी सख्त सजा: चीफ इंजीनियर

बिजली निगम के चीफ इंजीनियर आर.के. सोढ़ा ने कहा कि किसान इस मामले में बिल्कुल निर्दोष है। उनके साथ धोखाधड़ी हुई है। मेरे पास अभी रिपोर्ट आई है। उसकी स्टडी की जा रही है। वहीं किसानों के कनेक्शन कुछ औपचारिकताएं पूरी करने के बाद रेगूलर कर दिए जाएंगे। इसके अलावा जुर्माना और एफआईआर कैंसिल करने के लिए भी निगम कार्रवाई कर रहा है। वहीं रिपोर्ट में जो दोषी हैं। उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

किसान बोले थैक्स, सच कहूँ

किसानों के साथ बिजली निगम और ठेकेदार द्वारा की गई इस धोखाधड़ी को सबसे पहले सच कहूँ ने ही प्रमुखता से उठाया था। वरना निगम के अधिकारी इस मामले में किसानों को ही चोर ठहरा रहे थे। सच कहूँ की टीम ने इस घोटाले का पर्दाफाश किया। उसके बाद इस मामले की जांच शुरू हुई। फिर किसान यूनियन के नेतृत्व में धरना चला। तब जाकर सरकार और अधिकारियों ने इस पर कार्रवाई शुरू की। आखिर इस मामले में किसानों की जीत हुई है। इस घोटाले को उजागर करने पर किसानों ने सच की आवाज दैनिक सच कहूँ को धन्यवाद किया।

क्या है मामला

नाथूसरीकलां सब डिविजन के एरिया में किसानों ने कथित ठेकेदार सुरजीत नामक व्यक्ति को पैसे देकर अपने खेत में डेढ़ वर्ष पहले ट्यूबवेल कनेक्शन करवाए थे। सुरजीत ने बिजली निगम के अधिकारियों से मिलीभगत करके किसानों से पूरी रकम ऐंठ ली। बदले में उनके फर्जी कनेक्शन कर दिए। कनेक्शन करने के लिए सारा सामान निगम से दिलाया गया।

बिजली निगम के लाइनमैन और जेई कनेक्शन खेत में जाकर करके आए। अब बीती 6 अप्रैल को बिजली निगम की विजीलेंस ने किसानों के खेत में छापेमारी की और उन कनेक्शनों को फर्जी बता दिया। उसके बाद निगम की टीम ने 20 कनेक्शन फर्जी बताकर उतार लिए। इस बात से किसानों में रोष पैदा हो गया। इस मामले में तत्काली समय के एसडीओ और ठेकेदार सुरजीत पर पुलिस ने केस भी दर्ज कर रखा है।

 

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