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रूहानी सत्संग: रूहानियत से महका देवभूमि हिमाचल

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रूहानी सत्संग। धौलाधार की पहाड़ियों में स्थित परमपिता शाह सतनाम जी सचखंड धाम, चचिया नगरी में गूंजा राम नाम

चचिया नगरी। देवभूमि हिमाचल स्थित धौलाधार की पहाड़ियां रविवार को राम नाम से गूंजायमान हो उठी। चहुं और राम नाम के दीवाने नजर आए। मौका था चचिया नगरी स्थित परमपिता शाह सतनाम जी सचखंड धाम में आयोजित विशाल रूहानी सत्संग का। इस अवसर पर हिमाचल प्रदेश व आस-पास से लाखों की तादाद में पहुंचे श्रद्धालुओं ने शिरकत की। रूहानी सत्संग के दौरान हजारों लोगों ने पूज्य गुरू संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां से गुरुमंत्र की अनमोल दात प्राप्त कर नशों व सामाजिक कुरीतियों से तौबा की, साथ ही हजारों लोगों ने रूहानी जाम ग्रहण कर सामाजिक बुराइयां त्यागने का प्रण लिया।

हजारों ने ग्रहण किया रूहानी जाम

रूहानी सत्संग के दौरान पूज्य गुरूजी ने जिज्ञासु लोगों को परमात्मा से मिलने का सीधा व आसान रास्ता बताकर उनकी जिज्ञासा शांत की। रूहानी सत्संग के दौरान हजारों सेवादार लंगर,पानी व ट्रÑैफिक समेत तमाम समीतियों के सेवादार सेवाकार्यों में जुटे हुए थे। सत्संग की समाप्ति पर लाखों की तादाद में पहुंची साध-संगत को चंद मिनटों में ही लंगर-भोजन खिला दिया गया।

सत्संग किसे कहते हैं

रूहानी सत्संग के दौरान पूज्य गुरु जी ने अपने वचनों से लाभान्वित करते हुए फरमाया कि सत्संग अर्थात सच का संग, सच का साथ। इस दुनिया में जिस वस्तु में कोई परिवर्तन नहीं होता, जिसमें कोई बदलाव नहीं होता, उसे सत्य यानि सच कहा जाता है। सच आदिकाल से एक ही है और वो है भगवान का नाम।

दुनिया की हर वस्तु परिवर्तनशील है सिवाय भगवान के

उसे ईश्वर कहो, ओउम कहो, गॉड, खुदा, रब कहो पर वही शक्ति ऐसी है जो सच है, सच ही रहेगी। दुनिया की हर वस्तु परिवर्तनशील है सिवाय भगवान के। ईश्वर को कैसे देखा जा सकता है, कैसे उसकी कृपा दृष्टि को पाया जा सकता है, कैसा है वो जो कण-कण, जर्रे-जर्रे में है और हर जगह होने के बाद भी हमारे अंदर मौजूद है। मनुष्य में उसे देखने की इच्छा होती है, ऐसे में जहां उसके बारे में चर्चा होती हो, उसे देखने का ढ़ंग बताया जाता हो उसे संग कहा जाता है। बिना धर्म छुड़ाए, बिना पहरावा बदले ईश्वर परमपिता परमात्मा से मिलने का राह बताया जाए वही सत्संग है।

सत्संग में क्यों आना चाहिए

पूज्य गुरूजी ने फरमाया कि मनुष्य के पास सब सुख सुविधा है तो उसका प्रश्न होता है कि मैं सत्संग में क्यों आऊं? मेरे पास सब कुछ है। क्या वे लोग जानते हैं कि आने वाले समय में आपके साथ क्या होने वाला है? भयानक बीमारी, व्यापार में घाटा, बच्चों पर विपदा आने वाली हो, क्या उससे अपने पैसे अक्ल चतुराई से बचा जा सकता है, तो उत्तर होता है नहीं।

पहाड़ जैसे कर्म को कंकर बनाने का तरीका केवल सत्संग में ही संभव है

पूज्य गुरूजी ने फरमाया कि पहाड़ जैसे कर्म को कंकर बनाने का तरीका केवल सत्संग में ही संभव है जो आने वाली मुसीबतों से ही नहीं बचाता बल्कि इतना आत्मबल देता है जिससे आप व आपका परिवार हमेशा सुख शांति से रह सकते हैं। पैसा ही सुख शांति नहीं देता, क्योंकि दुनिया के धनाढ़य लोगों को भी नींद नहीं आती और हमसे मिलने के दौरान उनका एक ही प्रश्न होता है, दिन में चैन और रात को नींद नहीं आती। वहीं हक -हलाल की कमाई करने वाले, कड़ी मेहनत करने वाले व ईश्वर को मानने वाले इतनी गहरी नींद में सोते हैं कि उन्हें सूर्य निकलने का पता ही नहीं चलता।

राम नाम से जुड़े लोगों को कभी कोई टैंशन नहीं होती

राम नाम से जुड़े लोगों को कभी कोई टैंशन नहीं होती। लोगों को सत्संग में आकर पता चलता है कि असली धन कौनसा है। लोग चाहे कितना भी धन बना लें, जायदाद बना लें, लेकिन किसी का खून चूसकर मत बनाओ, कभी किसी का छीनकर मत खाओ, क्योंकि पाप जुल्म की कमाई चैन से जीने नहीं देती, घर परिवार में लड़ाई-झगड़ा होने लगता है, अशांति होगी, घर में बीमारियां पैदा हो जाएंगी, शरीर रोगों से भर जाता है।

पूज्य गुरू जी ने फरमाया कि बीमार का ईलाज करवा दो, प्यासे को पानी पिला दो, बेटी की शादी करवा दो, ये सच्चा दान है। अंधे को सड़क पार करवा दो, बीमार का इलाज, बीमार को खाना खिला दिया। यही इंसानियत है और यही मानवता है। इंसान इंसानियत न छोड़े और राम नाम का जाप करता रहे तो उसे वह लज्जत खुशियां प्राप्त होंगी जिन्हें ब्यान नहीं कर सकते।

पूज्य गुरू जी ने फरमाया कि एक समय आता है जब सब कुछ छोड़ के इस दुनिया से चले जाते हैं तो जैसे ही इस दुनिया से गए तो सब का सब यहीं छूट गया उनके साथ एक नया पैसा नहीं गया। उनके साथ उनके बेटे बेटियां नहीं गए तो इस दुनिया से कुछ भी साथ नहीं जाता पर एक धन ऐसा है जिसे चोर उचक्का चुरा नहीं सकता, बाल-बच्चे बांट नहीं सकते और जो मरने के बाद भी साथ जाता है, वह धन है राम नाम का।

साईंस से धर्म कहीं आगे

पूज्य गुरु जी ने फरमाया कि धर्म जो बताते हैं उसे सार्इंस कई वर्षों के बाद मानती है। धर्मों में लिखा है सैकड़ों धरतियां, सैकड़ों जिंदगिया हैं पर आज नासा व साईंटिस्ट मान चुके हंै कि ऐसी और भी धरतियां हंै, जबकि पवित्र वेदों में हजारों साल पहले लिखा था। पूरी दुनिया ने हमारी संस्कृति से ज्ञान लिया है। अमेरिकी वैज्ञानिक रॉबर्ट ओपनहेमर ने माना कि मैने जो एटम बनाया है वो महाभारत के अमोद्यशास्त्र से बनाया है। हमारे वाले मानते नहीं कि महाभारत हुआ है जबकि बाहर वाले लोग हमारी संस्कृति से सीखाकर खोज करने में आगे बढ़ रहे हैं।

हमारी संस्कृति इतनी विराट थी कि हमें एटम चलाना आता था और रोकना भी आता था जबकि आज केवल चलाना ही आता है। हमारे देश जैसी संस्कृति पूरी दुनिया में कहीं नहीं मिलेगी, चाहे कहीं भी घूम लो। मां गीली जगह बच्चे को सुलाती है जब मां बाप-बूढेÞ हो जाते हंै, बच्चे उनका सहारा बनते हैं क्या कहीं और ऐसा है। संस्कृति पर गर्व किया करो, आप पिछड़े नहीं हो, एक टाईम था जब हमारे रूपए के मुकाबले डॉलर काफी पीछे था।

भक्ति से बढ़ता है आत्मबल

पूज्य गुरु जी ने फरमाया कि आप बुराईयां छोड़कर राम नाम का जाप करो तो आप रास्ता दिखाने वाले बन सकते हो। हमारा देश गुरू देश कहलाता था और आज भी बन सकता है। पूज्य गुरू जी ने फरमाया कि दुनिया का गुरू देश कहलवाने वाले लोग आज टेंशन, परेशानी में हैं क्योंकि वो अपनी संस्कृति को भूल चुके हैं।

राम नाम से हौसले बुलंद होते हैं और जिनके हौसले बुलंद होते हैं वो हारी हुई बाजी जीत जाया करते हैं। धर्मों में हौंसलों को ही आत्मबल बताया गया है जो भक्ति से मिलता है। भक्ति करने से आत्मबल बढ़ता है जिससे आदमी बड़ी से बड़ी बीमारियों पर काबू पा लेता है। सृष्टि को बनाने वाले को हम क्या दे सकते हैं। ईश्वर से मांगना जायज है। ईश्वर आपके बुरे कर्म लेता है और बदले में खुशियों से लबरेज कर देगा। हम उसे क्या दे सकते हैं, सब कुछ उसी का दिया हुआ है। ईश्वर का कमाल है कि वह बुराईयां लेकर खुशियों का भंडार दे देता है।

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