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संतों का एक ही उद्देश्य समाज को खुशियां देना

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सरसा। पूज्य हजूर पिता संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि इन्सान इस जहान में किस लिए आया है और कर क्या रहा है? चारों तरफ इन्सान दौड़ रहा है, भागम-भाग करता है और इन्सान ने अपना उद्देश्य बना लिया है सबसे बड़ा बनना, सारे सुखों को अपनी पॉकेट में कर लेना, सारी खुशियों को हासिल करना, तमाम इच्छाओं की पूर्ति करना, लेकिन क्या यह पॉसिबल है कि इन्सान की तमाम इच्छाओं की पूर्ति हो जाए? ऐसा नामुमकिन नहीं है, लेकिन आसान भी नहीं है।

आप जी ने फरमाया कि इन्सान की इच्छाओं का मक्कड़जाल बहुत बड़ा है। जैसे इन्सान की 10 इच्छाएं पूरी हो जाएंगी, लेकिन इसके बाद 10 इच्छाएं और बढ़ जाएंगी। सौ इच्छाओं में से 99 पूरी हो गई, तो अगली एक इच्छा के साथ 0 लगने में टाईम नहीं लगेगा, यानी आगे 100 इच्छाएं और खड़ी हो जाएंगी।

इच्छाएं करने कोई बुरी बात नहीं है, लेकिन इच्छाओं के भंवरजाल फंसकर रह जाना, इससे बुरी बात कोई और हो नहीं सकती। इच्छा पूर्ति के लिए टेंशन में आ जाना गलत बात है। आप उम्मीद रखते हैं कि मुझे ये मिलना चाहिए, वो मिलना चाहिए, क्योंकि उम्मीद एक ऐम, लक्ष्य है। आप उम्मीद रखते हैं, एक लक्ष्य निर्धारित कर लेते हैं, तभी आप अपनी जिंदगी की गाड़ी को सरपट दौड़ाकर ले जाते हैं।

जैसे आपका लक्ष्य है कि औलाद अच्छी हो, अच्छे कामों में मेरा नाम हो, भगवान की भक्ति करूं और उसके दर्शन हों। आपका लक्ष्य है कि भक्ति करता हुआ दोनों जहान का हकदार बनूं। दसवां द्वार कैसा होता है, मैं खोलकर देखूं। भगवान के नूरी स्वरूप के दर्शन पाऊं। आप कालक्ष्य है कि बेइंतहा अमीर बन जाऊं और सारी सुख-सुविधा को हासिल करूं।

मेरी हवा में उडारी हो। सुंदर, सुहावना जिंदगी का सफर हो। इन सब लक्ष्यों को साधने के लिए जिंदगी तो एक, लेकिन लक्ष्य अनेक हैं। यह नहीं है कि लक्ष्यों को साधा नहीं जा सकता। इन्सान तो इन्सान है, भगवान का बनाया हुआ वो वजूद है, जिसे देवी-देवताओं ने भी सजदा किया है, यानी इन्सान इतने लक्ष्यों को भी साध सकता है, लेकिन लक्ष्य पूर्ति के लिए इन्सान के अंदर आत्मबल होना चाहिए, दृढ़-मजबूत इरादा होना चाहिए।

जरा-सी बात होती है कि आप उम्मीद छोड़ देते हो, उम्मीदों से बेउम्मीद हो जाते हो। यह लक्ष्य साधने का तरीका नहीं है, बल्कि आप आगे बढ़ते जाओ, परमपिता परमात्मा पर छोड़ते जाओ कि ठीक है, मेरा लक्ष्य तुझे पाने का है, लेकिन यह नहीं कि मैं टेशन में रहूं। मैं भक्ति, सेवा करूंगा, तेरे बताए मार्ग पर चलूंगा। प्रभु! आप रहमत करना! मेरी तड़प बढ़ती जाए और मैं तेरे दर्श-दीदार करके छोड़ूं। आप ऐसा करेंगे, तो लक्ष्य प्राप्ति जरूर होगी।

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