सम्पादकीय

ईवीएम पर समस्याओं का हो पूर्ण निराकरण

Problems complete on the EVM

ईवीएम में शिकायतों को लेकर विपक्षी दलों का हो हल्ला है कि शांत ही नहीं हो रहा, जबकि चुनाव आयोग ने इन मशीनों में मतदाता द्वारा मतदान के बाद पर्ची प्राप्त करने की भी सुविधा जोड़ दी है कि मतदाता तसल्ली कर सके कि जो निशान उसने दबाया है क्या वोट उसे ही गया है। लेकिन कई बार के चुनाव आयोग के दावों व चुनौतियों से स्थिति उलझन भरी बन चुकी है, जहां किसी चुनाव से पूर्ण मीडिया के सामने चलाकर दिखाई गई मशीनों ने एक ही निशान पर पड़ रही वोट दिखाई। यह मामला गुजरात विधानसभा चुनावों में एक डिप्टी कमिश्नर के सामने घटित हुआ। फिर कर्नाटक विधानसभा चुनावों में कई विधानसभा क्षेत्रों के पोलिंग बूथों में सूचीबद्ध मतदाताओं से ज्यादा वोट पोल हो गए जोकि मशीन की गड़बड़ी नहीं कही जा सकती लेकिन इस प्रकार की गड़बड़ियों से विपक्षियों का विश्वास जरूर डगमगा गया है। दिल्ली में आम आदमी पार्टी ने यह मुद्दा उठाया था कि वह मशीन को गलत साबित करेंगे लेकिन आम आदमी पार्टी अपने दावों को साबित नहीं कर पाई। फिर मीडिया ने जब आम आदमी पार्टी से यह पूछा कि ईवीएम से आम आदमी पार्टी के 67 विधायक कैसे जीते? तब उनके पास कोई जवाब नहीं था। जो लोग बैल्ट पेपर से वोट करवाने की मांग कर रहे हैं वह बैल्ट पेपर में होने वाली बेहिसाब गड़बड़ियों का कैसे निराकरण करेंगे इसका कोई हल नहीं सुझा पा रहे? बैल्ट पेपर्स से चुनाव में लूट, आगजनी, फर्जी वोटिंग आम बात है। आज दुनिया में भारतीय आईटी का लोहा माना जाता है। ऐसे में ईवीएम मशीनों पर किसी भी आईटी विशेषज्ञ ने कोई आरोप नहीं लगाया जो भी आरोप हैं वह सिर्फ राजनीतिक लोगों या कार्यकर्ताओं के द्वारा ही हैं। जोकि साफ करता है कि मशीनों में नहीं राजनीति करने वालों की नीयत में गड़बड़ी है। अगर ईवीएम मशीनों में गड़बड़ी होती तब कांग्रेस या इसके सहयोगी कभी सत्ता से बेदखल नहीं हो पाते। यहां मुद्दा राजनीति का है अन्यथा चुनाव आयोग एक मजबूत संस्था है उसे भी देश के लोकतंत्र की फिक्र है। यहां फिर भी चुनाव आयोग को चाहिए कि वह हर संभव ईवीएम के प्रति आम मतदाता को स्पष्ट करे कि ईवीएम में कहीं कोई गड़बड़ी नहीं हो सकती। ईवीएम से देश को तत्काल परिणाम मिलते हैं यहां गुणाभाग का ज्यादा हेरफेर संभव नहीं। फिर इससे देश का अरबों रुपया बचता है, बूथ कैपचरिंग व फर्जी बेल्ट पेपर जैसे अपराधों से भी चुनाव सुरक्षित हैं। भारतीय लोकतंत्र में मतदाताओं की संख्या को अगर देखा जाए तब यहां ईवीएम या इससे भी उन्नत तकनीक का इस्तेमाल किया जाना सुनिश्चित हो न कि किसी एकमात्र व्यक्ति की स्वार्थपूर्ण राजनीति के चलते देश को पुरानी समस्याओं से बांधें रखा जाए।

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