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राजनीतिक कचरे की टोकरी है रणजीत सिंह रिपोर्ट

Political Waste Basket Is Ranjit Singh Report

जस्टिस रणजीत सिंह आयोग ने बरगाड़ी व अन्य स्थान पर हुई श्री गुरु गं्रथ साहिब की बेअदबी के बारे में अपनी रिपोर्ट गत दिवस विधानसभा में पेश कर दी है। आयोग ने बरगाड़ी में बेअदबी का बर्तन डेरा सच्चा सौदा के 10 श्रद्धालुओं के सिर फोड़ दिया। देश के इतिहास में किसी ही जांच आयोग की रिपोर्ट का इतना बुरा हाल नहीं हुआ होगा।

इस रिपोर्ट का विधानसभा में पेश करने से पहले बुरी तरह जुलूस निकल व बाद में तो जो हुआ वह सभी ने विधानसभा में लाइव देखा। हिम्मत सिंह सहित अन्य अहम गवाहों ने आयोग के पास दर्ज अपने बयानों पर आपत्ति जताई कि उन्हें गुमराह किया गया है। आयोग के अध्यक्ष जस्टिस रणजीत सिंह का नजदीकी रिश्तेदार सुखपाल खैहरा आम आदमी पार्टी का नेता है। रणजीत सिंह की कई नेताओं के साथ नजदीकी व रिपोर्ट का लीक होना, रिपोर्ट तैयार करने के पीछे की भावना को स्पष्ट करता है।

यह रिपोर्ट अपने आप में एक राजनीतिक निशाने को मुख्य रखकर तैयार की गई है क्योंकि यह रिपोर्ट विधान सभा में पेश करने से पहले ही नेताओं के हाथ चढ़ गई थी। जस्टिस रणजीत सिंह आयोग को पंजाब में हिंदू, सिख व मुस्लमान धर्मों के पावन ग्रंथों की बेअदबी के मामलों की जांच सौंपी गई थी। यह कुल 122 मामले थे लेकिन रणजीत सिंह आयोग ने केवल बरगाड़ी कांड पर ही जोर दिया। रिपोर्ट में डेरा प्रेमियों को उलझाने के लिए बेबुनियाद व अनमेल तथ्यों को मनचाहे तरीके से जोड़ा गया, जो एक फिल्म की कहानी से भी आसान काम था।

आयोग ने डेरा सच्चा सौदा की विचारधारा, इतिहास व भलाई कार्यों को नजरअंदाज कर डेरा प्रेमियों को दोषी बनाने के लिए ऐसे व्यक्तियों की गवाहियां दर्ज की, जो कई दशकों से डेरा सच्चा सौदा के खिलाफ बेवजह मुहिम चला रहे थे। आयोग को उस बलजीत सिंह दादूवाल की गवाही बहुत भारी लगती है जिस पर देश विरोधी ताकतों ने विदेशों से करोड़ों रुपए मिलने के आरोप हैं।

कुरान, भगवत गीता जैसे पावन ग्रंथों की बेअदबी के पीछे कुछ विदेशी ताकतों का हाथ होने जैसा प्रतीत हो रहा है, जो कई धर्मों के लोगों में नफरत फैलाकर दंगे-फसाद करवाना चाहती हो लेकिन आयोग ने केवल धार्मिक ग्रंथों की बेअदबी को अनदेखा करते हुए विदेशी ताकतों की साजिश से रूख बदल लिया। आयोग ने अपनी पूरी ताकत केवल डेरा श्रद्धालुओं के सिर मढनी थी। आयोग की रिपोर्ट में मारे गए डेरा श्रद्धालु गुरदेव सिंह निवासी बुर्ज जवाहर सिंह वाला के बारे में कहा है कि जब बरगाड़ी में पावन ग्रंथ चोरी हुआ तब वह अपनी दुकान पर उपस्थित था, तो इससे स्पष्ट है कि वह कहीं गया ही नहीं था, अपनी दुकान पर था। दुकान वाला तो दुकान पर ही रहेगा। आयोग ने मनघढ़त कहानी यह लिखी है कि गुरदेव सिंह कहता होता था कि गुरू ग्रंथ साहब तो एक किताब है जो 400 रुपए में खरीदी जा सकती है।

गुरदेव सिंह ने यह बात किसे और कब कही, आयोग के पास कोई जवाब नहीं जबकि वास्तविकता यह है डेरा प्रेमी गुरदेव सिंह गुरुद्वारा साहिब में श्रद्धा रखता था। गुरदेव सिंह की हत्या के बाद एकत्रित हुई डेरा सच्चा सौदा की साध-संगत के लंगर पानी के लिए गांव के गुरुद्वारा साहिब द्वारा सहयोग मिलता रहा था। गांव का कोई व्यक्ति भी यह नहीं कहता कि वह गुरुद्वारा साहिब का विरोधी था। यदि कोई ऐसी बात होती तो गुरुद्वारा साहिब की समिति ने कभी पुलिस के पास शिकायत तो दी होती। गुरदेव सिंह की मौत के बाद डेरा विरोधियों ने अपनी कहानी बनाने के लिए आयोग के पास झूठी गवाही दर्ज करवाई।

आयोग की जांच में सबसे बड़ी कमी यह है कि गुरदेव सिंह के हत्याकांड के पीछे जो साजिश थी, उसे हल करने का प्रयास तक नहीं किया गया। गुरदेव सिंह की हत्या के मामले में कुछ व्यक्ति गिरफ्तार भी किये थे। यदि आयोग तह तक जाता तो बेअदबी कांड के असल दोषियों तक पहुंचा जा सकता था।
बेअदबी की घटनाओं के बाद एक साल तक गुरदेव सिंह अपनी दुकान गुरुद्वारा के सामने आम की तरह ही चला रहा था। यदि उसने कोई गलत काम किया होता तो वह गांव क्यों न छोड़ जाता। गुरदेव सिंह इस मामले में जांच कर रही सीबीआई को भी सहयोग दे रहा था। गुरदेव सिंह के हत्यारे कौन थे और उनका क्या उद्देश्य था यह एक बड़ा सवाल है, जिसे आयोग ने बुरी तरह दरकिनार किया।

रणजीत सिंह आयोग ने एसआईटी की जिस रिपोर्ट का जिक्र किया है वह रिपोर्ट एक फिल्म की कहानी की तरह है, जिसमें मनचाहे तरीके से पात्रों व घटनाओं को फिट किया है। हैरानी इस बात की है कि पंजाब में सभी धर्मों के ग्रंथों का अपमान हुआ है, जो किसी बड़ी साजिश की तरफ इशारा करती है लेकिन न तो रणजीत सिंह आयोग व न ही एसआईटी ने इस गहरी साजिश को ढूंढने का प्रयास किया, बल्कि साजिशकर्ता की कहानी को पुलिस के शब्दों का अमली जामा पहना दिया।

डेरा सच्चा सौदा सर्वधर्म संगम है। पंजाब में आधे से ज्यादा श्रद्धालु सिख हैं। आयोग डेरा सच्चा सौदा को अपराध का अड्डा करार देता है लेकिन आयोग के लिए इस बात की कोई महत्वता नहीं रही कि विश्व भर में डेरा सच्चा सौदा खूनदान, शरीरदान व नेत्रदान की मुहिम चलाने में सबसे बड़ी संस्था है। देश की केंद्र सरकार सहित पंजाब सरकार भी मानवता भलाई कार्यों के लिए डेरा श्रद्धालुओं को सम्मानित कर चुकी है। देश के माननीय राष्ट्रपति से डेरा सच्चा सौदा को सम्मान पत्र मिल चुके हैं।

यह बात देश की हकीकत बन गई है कि जो पार्टी की सरकार आयोग बनाएगी, रिपोर्ट उसके ही हक में बनेगी। डेरा श्रद्धालुओं ने 2017 की विधान सभा चुनाव में अकाली-भाजपा को समर्थन दिया था। बरगाड़ी कांड की आड़ में सरकार ने एक तीर से दो निशाने मारे। अकाली दल व डेरा श्रद्धालुओं को सबक सिखाने के लिए जस्टिस रणजीत सिंह की रिपोर्ट का झूठा नाटक रचा। जस्टिस रणजीत सिंह आयोग की अपनी कोई प्राप्ति ही नहीं बल्कि एसआईटी ने डेरा विरोधी सोच से बनाई गई रिपोर्ट व डेरा विरोधी तत्वों की गवाहियों पर अधारित रिपोर्ट है। तिलकराज शर्मा

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