सम्पादकीय

भ्रष्टाचार विरूद्ध इस अभियान का नागरिक खुलकर दें साथ

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कालेधन के विरूद्ध कारगर व एक तरह से आखिरी प्रहार करने का निर्णय लेते हुए 500 व 1000 रुपए के नोट बंद कर दिए हैं। अर्थशास्त्री व बुद्धिजीवी पिछले काफी समय से कालेधन पर रोक लगाने की प्रभावी कार्रवाइयों की मांग कर रहे थे। वर्तमान सरकार ने कालेधन पर रोक लगाने के लिए जहां जीएसटी पारित करवाकर कर ढांचे में सुधार किया है, वहीं आयकर अधिकारियों को सक्रिय करते हुए हवाला व बेनामी सम्पत्ति का कारोबार करने वालों के यहां छापामार कार्रवाइयां भी तेज की हैं। अनुपालन खिड़की योजना के द्वारा भी कालाधन रखने वालों को चार माह तक का वक्त दिया गया है कि वह इस स्कीम के अंतर्गत अपनी अघोषित आय का खुलासा करें। नतीजा, सरकार के पास 62000 करोड़ रुपए की अघोषित आय की घोषणा हुई, जिससे सरकार को करीब 30000 करोड़ रुपए की कर आमदन हुई। परंतु इन प्रयत्नों के बावजूद भी बड़ी मात्रा में काली कमाई वालों ने धन को छुपाए रखा, जिस पर अब प्रधानमंत्री मोदी ने 500 व 1000 रुपए का चलन तत्काल प्रभाव से बंद कर जोरदार प्रहार कर दिया है। देश में यह दूसरी दफा हुआ है। इससे पूर्व 1978 में जनता पार्टी की सरकार ने भी 100 रुपए के अलावा 500, 1000 व 10000 हजार के नोटों को बंद कर दिया था। मोदी सरकार के इस देश हितकारी निर्णय की आमजन, राजनीतिक हल्कों में भरपूर प्रशंसा हो रही है। आम आदमी पार्टी ही ऐसा दल है, जिसने अपनी आदतनुसार सरकार के इस निर्णय की आलोचना कर दी है। आम आदमी पार्टी की यह बात ठीक है कि अब 1000 का नोट आठ सौ रुपए में बिक रहा है, लेकिन बड़े करंसी नोटों को एकदम से बंद के निर्णय को तुगलकी फरमान कह देना कतई उचित नहीं है। इस बात में कोई शक नहीं कि केन्द्र सरकार को नोट बंद कर देने का यह फैसला देश में चल रहे हवाला कारोबार, नकली करंसी व्यापार व आतंकी गतिविधियों की कमर तोड़ देने वाला है। इससे पहले आतंकी नकली करंसी देश में बांटकर गरीब युवाओं से अपने लक्ष्यों को पूरा करने के रोजमर्रा के काम करवा रहे थे। सरकार के यकायक आए इस निर्णय से सामान्यजन को थोड़े दिन परेशानी का सामना करना पड़ सकता है, लेकिन आखिर में इस फैसले ने आमजन को काफी राहत पहुंचानी है। अत: आमजन जिस तरह से इस निर्णय की प्रशंसा कर रहा है, ठीक उसी तरह तकलीफ के एक-आध सप्ताह को भी गुजारे। यहां बड़े कारोबारियों या अवैध लेन-देन करने वालों का कर्त्तव्य बनता है कि वह देशहित में अपनी काली कमाई का समर्पण कर दें। आम नागरिकों में भी इस वक्त काफी उत्सुकता बनी हुई है कि काली कमाई वाले अब बैंकों में करंसी बदलवाने के लिए उनकी सहायता मांगेंगे, जिसे वह अच्छी-खासी रकम वसूल कर मदद करेंगे, यह नहीं किया जाना चाहिए, ऐसा करना जहां नैतिक तौर पर सरकार के उद्देश्यों को विफल करना होगा, वहीं नागरिक जिन कालेधन वालों पर कार्रवाई के लिए सरकार पर दबाव बनाते आए हैं, उन्हीं कालेधन वालों का साथ देना होगा। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अपने प्रभावी निर्णयों से तेजी से भ्रष्टाचार को देश में से साफ कर रहे हैं। अत: नागरिकों को एकजुट होकर इस अभियान में सरकार का साथ देना चाहिए।

लोकप्रिय न्यूज़

To Top