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हरियाणा विस में जीएसटी सहित नौ विधेयक पारित

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कांग्रेस ने महंगाई बढ़ने की जताई आशंका

ChandiGarh, Anil Kakkar: हरियाणा विधानसभा में वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) विधेयक वीरवार को सर्वसम्मति से पारित किया गया और इसके साथ ही राज्य सरकार की घोषणा के अनुसार एक जुलाई से इसके लागू होने का मार्ग प्रशस्त हो गया है। इसके अलावा हरियाणा मंत्रियों के वेतन और भत्ते (संशोधन)विधेयक 2017, हरियाणा विधानसभा अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के वेतन एवं भत्ते (संशोधन) विधेयक 2017, हरियाणा विधानसभा (सदस्य वेतन,भत्ते तथा पेंशन) संशोधन विधेयक 2017 और भारतीय स्टॉम्प (हरियाणा संशोधन) विधेयक 2017, गुरुग्राम विश्वविद्यालय विधेयक 2017, चौधरी रणबीर सिंह विश्वविद्यालय जीन्द (संशोधन और वैद्यता) विधेयक 2017, वाईएमसीए विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय फरीदाबाद (संशोधन) विधेयक 2017, हरियाणा राज्य उद्यान विश्वविद्यालय करनाल (संशोधन)विधेयक 2017 भी पारित किए गए।

जीएसटी विधेयक पारित करने को लेकर विशेष तौर पर बुलाए गए राज्य विधानसभा के एक दिन के सत्र में वित्त मंत्री कैप्टन अभिमन्यु ने सदन में जीएसटी विधेयक प्रस्तुत किया, जिसे संक्षिप्त चर्चा के बाद सर्वसम्मति से पारित कर दिया गया।
वित्त मंत्री ने जीएसटी विधेयक सर्वसम्मति से पारित करने के लिए सदन का आभार व्यक्त किया तथा यह भी कहा कि संसद में भी इसे सर्वसम्मति से पारित किया गया है।

राज्य को मिलने वाले राजस्व में हर साल होगा 14% इजाफा

उन्होंने देश में जीएसटी प्रणाली लागू करने को केन्द्र सरकार बड़ी उपलब्धि बताया लेकिन साथ ही केन्द्र की पिछली संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन(संप्रग) सरकार की भी जीएसटी लागू करने के लिए किए गए प्रयासों की सराहना की। कैप्टन अभिमन्यु ने कहा कि जीएसटी प्रणाली को देश की अर्थव्यवस्था के लिए क्रांतिकारी और ऐतिहासिक कदम बताया और उन्होंने कहा इसके अस्तित्व में आने से समूचे देश में एक समान कर प्रणाली होगी, जिससे कारोबार में पारदर्शिता भी सुनिश्चित होगी। उन्होंने कहा यह कर व्यवस्था अनेक देशों में सफलतापूर्वक लागू हो चुकी है तथा अब भारत में इसका सूत्रपात होने जा रहा है।

विधेयक पर चर्चा के दौरान कांग्रेस के कर्ण सिंह दलाल ने आशंका व्यक्त की कि राज्य में जीएसटी लागू होने पर रोजमर्रा की वस्तुओं कीमतों सहित मंहगाई, व्यापारियों की परेशानी, अधिकारियों की मनमानी और अनेक वस्तुओं पर करों की दरें बढ़ने से अनेक परेशानियां खड़ी होंगी। उन्होंने हालांकि कहा कि केन्द्र में जीएसटी को सर्वसम्मति से पारित किया गया है लेकिन इसके तहत राज्य के हितों की रक्षा पर उन्होंने आशंका व्यक्त की। दलाल ने वित्त मंत्री से पूछा कि जीएसटी लागू होने से राज्य को नुकसान की स्थिति में केन्द्र पाँच साल तक इसकी भरपाई करेगा लेकिन इसके बाद ही व्यवस्था क्या होगी।

इस पर वित्त मंत्री ने कहा कि केंद्रीय भरपाई के अलावा जीएसटी पर राज्य को मिलने वाले राजस्व में प्रति वर्ष 14 प्रतिशत की वृद्धि होगी तथा जिन सेवाओं पर अभी सेवा कर लगता है और राज्य को इसमें से हिस्सा नहीं मिलता अब नई व्यवस्था के तहत इन सेवाओं के तहत एकत्रित होने वाले करों में भी राज्य का 50 प्रतिशत हिस्सा होगा, जो वर्तमान में लगभग 7300 करोड़ रुपये बैठता है। उन्होंने सदन को आश्वासन किया कि जीएसटी प्रणाली के तहत राज्य के हितों की पूर्ण सुरक्षा सुनिश्चित की जाएगी।

मंत्रियों का वेतन और कार्यालय भत्ता बढ़ा

हरियाणा मंत्रियों के वेतन और भत्ते अधिनियम 1970 में आगे संशोधन करने के लिए हरियाणा मंत्रियों के वेतन और भत्ते (संशोधन)विधेयक 2017, पारित किया गया। यह अधिनियम पहली अप्रैल, 2016 से लागू माना जाएगा। संशोधन के अनुसार मंत्रियों के वेतन 50 हजार रुपये से बढ़ाकर 60 हजार रुपये प्रतिमाह तथा कार्यालय भत्ता 2,000 रुपये से बढ़ाकर 20 हजार रुपये प्रतिमाह किया गया है। हरियाणा विधानसभा (सदस्य वेतन, भत्ते तथा पेंशन)संशोधन विधेयक, 2017 को सर्वसम्मति से पारित किया गया। इस विधेयक के तहत विपक्ष के नेता का वेतन 50 हजार रुपये से बढ़ाकर 60 हजार रुपये प्रतिमास किया गया है।

हरियाणा विधानसभा स्पीकर और उपाध्यक्ष के वेतन एवं भत्ते अधिनियम 1975 में और आगे संशोधन करने के लिए हरियाणा विधानसभा अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के वेतन एवं भत्ते संशोधन) विधेयक 2017 पारित किया गया। इस अधिनियम को पहली अप्रैल, 2016 से लागू माना जाएगा। संशोधन के अनुसार अध्यक्ष और उपाध्यक्ष का वेतन 50 हजार रुपये से बढ़ाकर 60 हजार रुपये से प्रतिमास तथा कार्यालय भत्ता 2000 रुपये से बढ़ाकर 20 हजार रुपये प्रतिमास किया गया है।

भारतीय स्टॉम्प(हरियाणा संशोधन) विधेयक 2017 प्रतिभूति तथा पदार्थों के लेन-देन से सम्बन्धित दस्तावेजों पर स्टाम्प शुल्क की दरों को तर्कसंगत बनाने के लिए हरियाणा राज्य सरकार ने अनुसूची-1 ए के प्रावधानों के अधीन मद क्रमांक 5,28, 36 और 43 में संशोधन करने का निर्णय लिया गया है, इसलिए भारतीय स्टॉम्प (हरियाणा संशोधन) विधेयक 2017 को पारित किया गया है।

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