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अन्तर्राष्ट्रीय  न्यायालय में पाकिस्तान को झटका

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जाधव की फांसी की सजा पर रोक

हेग/नई दिल्ली। भारत को वीरवार को एक बड़ी राजनयिक जीत हासिल हुुुई, जब अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय ने पाकिस्तान की सभी दलीलों को खारिज करते हुए नौसेना के पूर्व अधिकारी कुलभूषण जाधव की फांसी की सजा पर अंतिम फैसला आने तक रोक लगा दी। हेग स्थित पीस पैलेस में अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय के अध्यक्ष रोनी अब्राहम ने इस मामले में फैसला सुनाते हुए पाकिस्तान सरकार को कड़ा निर्देश दिया कि वह यह सुनिश्चित करे कि न्यायालय का अंतिम आदेश आने तक जाधव को फांसी नहीं दी जाएगी। इसके लिये वह जरुरी कदम उठाये और उनकी जानकारी न्यायालय को दे।

ठुकराई पाक की दलील, भारत की अपील को ठहराया सही

न्यायालय का यह निर्देश इसलिये अहम है कि पाकिस्तान ने अपनी दलील के दौरान ऐसा कोई आश्वासन नहीं दिया कि मामले में अंतिम फैसला आने तक वह जाधव की सजा पर अमल नहीं करेगा। न्यायालय ने जाधव को विएना संधि के अनुच्छेद 36 के तहत राजनयिक संपर्क दिये जाने की भारत की अपील को सही ठहराया है और पाकिस्तान की इस दलील को खारिज कर दिया कि जाधव का मामला न्यायालय के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता।न्यायालय की 11 सदस्यीय ज्यूरी ने अपने सर्वसम्मत फैसले में भारत द्वारा विएना संधि के तहत उठाये गये सवालों को जायज माना। उसने यह भी स्वीकार किया कि पाकिस्तान दुर्भावना से प्रेरित है और जाधव की जान खतरे में है। न्यायालय ने कहा कि पाकिस्तान ने संकेत दिया है कि आगामी अगस्त तक जाधव को फांसी नहीं दी जाएगी।

 भारत ने खटखटाया था अन्तर्राष्ट्रीय  न्यायालय का दरवाजा

जाधव की फांसी की सजा के खिलाफ भारत ने आठ मई को अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था। न्यायालय ने नौ मई को पाकिस्तान के प्रधानमंत्री को पत्र लिख कर श्री जाधव की फांसी की सजा पर अंतरिम रोक लगाए जाने की जानकारी दी थी। न्यायालय ने गत सोमवार को इस मामले की खुली सुनवाई की। भारत और पाकिस्तान ने न्यायालय में अपना अपना पक्ष रखा था। पाकिस्तान ने सुनवाई के दौरान जाधव का कथित रूप से अपराध स्वीकार करने वाला वीडियो दिखाने की पेशकश की थी जिसकी न्यायालय ने अनुमति नहीं दी।

पाक ने किया वियना संधि का उल्लंघन

अधिवक्ता एवं पूर्व सॉलिसीटर जनरल हरीश साल्वे ने भारत का पक्ष रखते हुए कहा था कि इस मामले में पाकिस्तान ने वियना संधि में राजनयिक संपर्क के प्रावधान वाले अनुच्छेद 36 का उल्लंघन किया है। भारत ने आशंका जताई थी कि पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में सुनवाई पूरी होने से पहले ही जाधव को फांसी दे सकता है इसलिए सैन्य अदालत के फैसले पर तुरंत रोक लगाई जानी चाहिए।

पाक का तर्क

दूसरी ओर पाकिस्तान ने तर्क दिया कि यह उसकी राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा मुद्दा है और यह वियना संधि के अंतर्गत नहीं आता है। न्यायालय इस पर सुनवाई नहीं कर सकता।

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