पंजाब

बीडीपीओ कार्यालय के बाहर डटे मजदूर, दिया धरना

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 केन्द्र व पंजाब सरकार के खिलाफ जमकर की नारेबाजी

संगत मंडी ( मनजीत नरूआणा)। स्थानीय मंडी स्थित बाल विकास व पंचायत कार्यालय के समक्ष अपनी मांगों को लेकर देहाती मजदूरों ने धरना लगा कर केन्द्र व पंजाब सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। देहाती मजदूर सभा के प्रांतीय नेता साथी मिट्ठू सिंह घुद्दा ने मगनरेगा मजदूरों को संबोधन करते हुए मांग की कि मगनरेगा मजदूरों को पूरा वर्ष काम दिया जाए और दिहाड़ी 500 रूपए की जाए।

काम नहीं देने की सूरत में गुजारे योग्य बेरोजगारी भत्ता दिया जाए और किए गए काम का मजदूरों को बकाया तुरंत जारी किया जाए। उन्होंने कहा मजदूरों के जॉब कार्ड व हाजिरी को यकीनी बनाया जाए। डिपूओं के माध्यम से मिलने वाला अनाज, मिट्टी का तेल व दालों में हो रहा भ्रष्टाचार बंद करके इसे पारदर्शी ढंग से लागू किया जाए।

बुढ़ापा, विधवा, विकलांग व बेसहारा बच्चों की पैंशन चुनावों के समय किए वायदे मुताबिक 2 हजार रूपये की जाए और हर माह पैंशन मिलना यकीनी बनाया जाए। नेताओं ने अपने मांग पत्र बीडीपीओ कार्यालय के अधिकारियों को सौंपा गया। धरने में भीषम गर्मी के बावजूद बड़ी संख्या में महिलाओं ने भाग लिया।
इस मौके गुरजंट घुद्दा, गुरसेवक सिंह, चंद सिंह, इकबाल राम, कृष्ण सिंह, जगजीत सिंह, दलीप कौर, नैणो, गुरमेल कौर, गुरदेव सिंह, सुखपाल, उमरदीन व वीर सिंह भी मौजूद थे।

पीएफ नहीं जमा करवाने पर रोष, धरने पर डटे कर्मचारी

पीडब्ल्यूडी फील्ड व वर्कशॉप वर्क्स यूनियन ब्रांच सीवरेज बोर्ड के मुलाजिमों की ओर से नगर कौंसिल कार्यालय के समक्ष चेयरमैन गुरदीप सिंह की अगवाई में रोष रैली करते हुए धरना दिया गया और जोरदार नारेबाजी की गई। रोष रैली को संबोधन करते हुए बब्बी राम, शिव बहादर, दर्शन शर्मा, बेअंत सिंह व नैब सिंह ने कहा कि कौंसिल के कार्य साधक अधिकारी को मुलाजिमों का पीएफ जमां करवाने के लिए अपील की गई थी,

किन्तु उक्त अधिकारी ने मुलाजिमों की इस जायज मांग की तरफ कोई ध्यान नहीं दिया, जिस कारण उन्हें धरना देने के लिए विवश होना पड़ा है। मुलाजिम नेता हरबंस सिंह व रणजीत राणा ने बताया कि मुलाजिमोंका पिछले कई वर्षों का पी.एफ. जमा नहीं होने के कारण बनते ब्याज में भी घाटा पड़ रहा है। इस संबंधी में कार्य साधक अधिकारी को जत्थेबंदी ने कई बार पत्र लिख कर और कई बार जुबानी अपील की, लेकिन उक्त अधिकारी ने जत्थेबंदी को कोई जवाब नहीं दिया और ना ही बातचीत के लिए कोई समय दिया। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि उक्त अधिकारी ने अपना रवैया ना बदला तो संघर्ष और तेज कर दिया जाएगा।

 

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