पंजाब

कॉलेज प्रबंधन खिलाफ भड़की नर्सिंग छात्राएं

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आक्रोषित मोड़ पर पहुंचा नर्सिंग छात्राओं व प्रिंसिपल का विवाद

परिवारों के साथ शहर में रोष मार्च निकाला

डीसी के समक्ष खोला था हॉस्टल में गोलमाल का पूरा चिट्ठा

गुरदासपुर (सच कहूँ न्यूज)। सरकारी नर्सिंग कॉलेज की छात्राओं व प्रिंसिपल के बीच विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। छात्राओं व उनके परिजनों ने वीरवार को भी कालेज प्रबंधन के खिलाफ जमकर रोष प्रदर्शन किया। उन्होंने शहरभर में रोष मार्च निकाला। ये प्रिंसिंपल को यहां से हटाने की मांग कर रहे हैं।

डीसी से भी मिले थे छात्र

बता दें, गत दिवस छात्राएं डीसी अमित कुमार से मिली थीं। छात्राओं ने हॉस्टल में किए जा रहे गोलमाल का पूरा चिट्ठा डीसी के समक्ष खोला। इस दौरान डीसी ने जांच टीम के साथ-साथ सिविल सर्जन को भी अपने कार्यालय में बुलाया। करीब 20 मिनट तक चली बैठक के बाद बाहर आई छात्राओं ने बताया कि उन्होंने अपनी मांगों संबंधी तैयार किया गया मांगपत्र डीसी को सौंप दिया है। जब तक प्रशासन प्रिंसिपल का तबादला नहीं करता तब तक संघर्ष जारी रहेगा।

प्रिंसिपल के तबादले की मांग

छात्राओं का कहना है कि घायल वीरपाल कौर के माता-पिता नहीं हैं। वीरपाल पर नाजायज आरोप देखकर उन्होंने स्कूल प्रशासन के खिलाफ आवाज उठाई है। आने वाले दिनों में छात्राओं के धरने में किरती किसान यूनियन, पेंडू मजदूर यूनियन, उसारी निर्माण मजदूर यूनियन शामिल होकर प्रिंसिपल के तबादले की मांग करेंगी।

पहले हाइवे किया था जाम

उल्लेखनीय है कि सोमवार को नर्सिंग स्कूल की छात्राओं की ओर से प्रिंसिपल मनजीत कौर के व्यवहार व घायल छात्र वीरपाल कौर के चरित्र पर प्रिंसिपल द्वारा उठाए सवाल को लेकर सोमवार को अमृतसर-गुरदासपुर नेशनल हाइवे पर धरना दिया गया था। इस दौरान सिविल सर्जन डाक्टर घई ने डॉ. सविंदर सिंह हंस, प्रभोजत कौर कलसी व भावना लखनपाल सहित तीन डॉक्टरों पर आधारित एक टीम का गठन किया।

दबाव बना रहा हॉस्टल प्रशासन

जिला प्रशासन लड़कियों के धरने को दबाने के लिए छात्राओं के घरों में फोन कर यह बोल रहा है कि आपकी लड़कियां पिछले 15 दिनों से हास्टल नहीं आई। जानकारी देते हुए पंजाब स्टूडेंट यूनियन के प्रधान अमर क्रांति ने कहा कि छात्रओं के धरने को पूरी हिमायत दी जाएगी, भले ही जिला प्रशासन जो मर्जी कर ले।

छात्राओं ने ये लगाए आरोप

1.छुट्टी लेने पर छात्राओं से लिया जाने वाले फाइन की कोई रसीद नहीं दी जाती ।
2. प्रिंसिपल अक्सर बच्चों के चरित्र पर उंगलियां उठाती आई हैं।
3. छात्राओं को धमकी दी जाती है, आपको रिलीव नहीं किया जाएगा, छह माह पीछे धकेल दिया जाएगा।
4. प्रिंसिपल द्वारा उन्हें मानसिक तौर पर परेशान किया जाता है।
5. सरकार की ओर से जारी स्कॉलरशिप किसी भी बच्चे को नहीं दी गई, जिसमें भी बड़े स्तर पर गोलमाल हुआ है।
6. प्रिंसिपल किसी भी मामले पर सुनवाई नहीं करती, उल्टा गलत बर्ताव कर छात्राओं को नीचा दिखाती हैं।
7. हॉस्टल में खाना भी सही नहीं दिया जाता।

सिविल सर्जन उठाएंगे घायल छात्रा का खर्च

हॉस्टल में गिरकर घायल हुई वीरपाल कौर का खर्च सरकारी तौर पर नहीं बल्कि सिविल सर्जन कार्यालय की ओर से निजी तौर पर उठाया जाएगा। यह जानकारी देते हुए सिविल सर्जन हरदीप सिंह घई ने कहा कि जांच टीम द्वारा रिपोर्ट देते ही रिपोर्ट को हेड आॅफिस भेज दिया जाएगा।

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