हरियाणा

उज्ज्वला योजना के तहत देशभर में 20 करोड़ पहुंची गैस कनैक्शन की संख्या

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 लकड़ी-उपले नहीं , गैस चूल्हे पर पकने लगा खाना

धुएं को बाय-बाय 

भिवानी(इंद्रवेश)। प्रधानमंत्री उज्जवला योजना ऐसे परिवारों के लिए वरदान साबित होती जा रही है, जो कभी लकड़ी व उपलों के धुएं के बीच अपना भोजन तैयार करने को मजबूर थे। बीपीएलपरिवारों के लिए शुरू की गई उज्जवला योजना के बाद आज वे परिवार घरेलू उपयोग के लिए प्रधानमंत्री को इस योजना के लिए धन्यवाद करते नहीं थकते। भिवानी जिले के ऐसे कई ऐसे परिवार आज शानदार तरीके से बगैर धुएं के मिनटों में उज्ज्वला योजना के तहत मिलने वाले गैस कनेक्शन से अपना भोजन तैयार करते हैं।

उत्तर प्रदेश कवर करने के बाद प्रधानमंत्री उज्जवला योजना को हरयिाणा प्रदेश में जोर-शोर से शुरु किया गया है। गरीबी रेखा से नीचे जीवनयापन करने वाली कुछ महिलाओं को तो उज्ज्वला योजना के तहत गैस सिलैंडर जारी किए गए है। बाकी महिलाओं को भी गैस सिलैंडर जारी करने की प्रक्रिया जारी है। देशभर के गांवों को प्रदूषण रहित बनाने के पी.एम. के सपने के रुप में यह योजना बी.पी.एल. परिवारों की महिलाओं को उनके नाम पर एल.पी.जी. कनैक्शन दिलाने और एक धुआं रहित कम प्रदूषण वाली प्रधानमंत्री की यह महत्वपूर्ण योजना है।

योजना के तहत हर कनैक्शन 1600 रूपए में

योजना के तहत बी.पी.एल. परिवार की वयस्क महिला को प्रति कनैक्शन 1600 रुपए की वित्तीय सहायता के साथ बिना डिपॉजिट राशि के एल.पी.जी. कनैक्शन दिया जाता है। इस योजना के माध्यम से पैट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय आर्थिक रुप से कमजोर करोड़ों परिवारों को स्वच्छ और हरित एल.पी.जी. र्इंधन उपलब्ध कराया जा रहा है।

वर्ष 2016-17 के निर्धारित लक्ष्य से अधिक 2.20 करोड़ कनेक्शन देकर बनाया रिकॉर्ड

योजना के वास्तविक क्रियान्वयन में मंत्रालय के अधीन सार्वजनिक क्षेत्र की 3 तेल विपणन कंपनियां ओ.एम.सी., एच.पी.सी.एल. व बी.पी.सी.एल. प्रमुख भूमिका निभा रही हैं। आंकड़ों पर नजर डालें तो उज्जवला योजना के प्रथम वर्ष में 2.20 करोड़ एल.पी.जी. कनैक्शन सम्पूर्ण भारत देश में दिए गए जो कि वित्तीय वर्ष 2016-17 के 1.5 करोड़ के लक्ष्य से अधिक हैं। वर्ष 2014 में एल.पी.जी. उपभोक्ता 14 करोड़ थे, जो कि बढ़कर 20 करोड़ हो गए हैं। जो इस योजना की सफलता को दर्शाते हैं।

योजना के ओर अधिक विस्तर की जरूरत

भिवानी के उज्ज्वला योजना से लाभ उठाने वाले उपभोक्ताओं ने बताया कि पहले वह दूर-दराज के क्षेत्रों से लकड़ी इकट्ठी करके लाते थे तथा धुएं के बीच खाना पकाने व अन्य घरेलू कार्य करने को मजबूर थे। परन्तु इस योजना के तहत न केवल उन्हे धुएं से छूट मिली है, बल्कि उनका कार्य भी कम समय में पूरा हो जाता है। जिसके चलते वे चूल्हे-चौके की जगह अन्य कार्यों को भी समय दे पा रहे हैं। बता दें कि प्रदेशभर में इस योजना को ओर भी तेजी से शुरू किए जाने की जरूरत है, ताकि घरेलू महिलाओं को धुएं व बीमारियों से निजात मिल सकें।

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