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और अब चीन की अर्थव्यवस्था पर चोट का समय

पाकिस्तानी आतंकवादी गतिविधियों और अजहर मसूद को आतंकवादी घोषित कराने के हमारे प्रयासों को विफल करने में चीनी नीति से आज सारा देश आहत है। चीन के वीटों के कारण अजहर मसूद को आतंकवादी घोषित नहीं किया जा सका है। वहीं चीन कि बूते पर ही आज पाकिस्तान इतनी हिम्मत जुटा पा रहा है। हांलाकि इससे समूचे देश में चीन विरोधी लहर चल गई है। चीन ने हद तो यहां तक कर दी कि ब्रह्मपुत्र की सहायक नदी के भारत की और आने वाले पानी को रोक दिया, इस सबके बावजूद हम हाथ पर हाथ धरे बैठे है।
चीन की अर्थव्यवस्था में भारतीय बाजार की महत्वपूर्ण भूमिका है। चीन के लिए भारत सबसे बड़ा बाजार है। सस्ते माल के चलते चीन भारतीय उपभोक्ताओं को मूर्ख बनाता आ रहा है। देश में चले तो चले-नहीं तो बट्टे खातें हिसाब के बावजूद देश में चीनी सामानोें का अंबार लगता जा रहा है। चीनी सामानों के आयात से भारतीय उद्योग धन्धें और रोजगार के अवसर सीधे-सीधे प्रभावित हो रहे हैं। सस्ते चीनी सामान के आयात से देश में दोहरा खतरा उपन्न होता जा रहा है। एक और जहां परंपरागत रोजगार नष्ट हो रहे हैं, वहीं चीनी उत्पादों की गुणवत्ता संदेह के घेरे में रही है। गुणवत्तायुत सामान नहीं होने के बावजूद देश में चीनी सामानों की धडल्ले से खरीदारी हो रही है और यदि विश्लेषण किया जाए तो अब तो देश चीनी सामानों के कबाड़ का डंपिंग स्टेशन बनता जा रहा है। इससे सबके बावजूद चीन की हिमायत यह कि वह पाकिस्तान के पक्ष में खड़ा होकर भारत को सीधे चुनौती दे रहा है। ऐसे में आर्थिक मोर्चे पर प्रभावी तरीके से चीन को चुनौती दी जा सकती है।
केवल और केवल दीपावली पर ही चीन के रोशनी आइटम का कारोबार 3 हजार करोड़ के पार चला जाता है। ऐसे में देश हित में देश के प्रत्येक नागरिक को सोचना होगा। केवल आम नागरिकोें से चीनी उत्पाद नहीं खरीदने की अपील से ही काम नहीं चलेगा जो कारोबारी चीन के उत्पाद मंगाकर थैलियां भर रहे हैं उन कारोबारियों को भी चीन से उत्पादों के आयात पर विचार करना होगा। आखिर देश हित में सभी का दायित्व भी हो जाता है और देशहित में कड़े निर्णय लेने में हिचकिचाना भी नहीं चाहिए।
हमें अच्छी तरह मालूम है कि चीनी उत्पादों के आयात से सबसे ज्यादा लघु, मध्य श्रेणी के उद्यमी प्रभावित हो रहे हैं। खिलौना उद्योग लगभग चीन के हाथ जा चुका है। इलेक्ट्रेनिक सामान, मशीनरी यहां तक की कताई मिलों के स्पिण्डल्स आदि, आर्गेनिक केमिकल्स, परिवहन उपकरण, ΄लास्टिक और ΄ोपर उद्योग सबसे अधिक प्रभावित हो रही है। सबसे ज्यादा मांग वाले यहां तक की त्यौहारी सामान चीन भारत में उतारने में आगे रहता है और सीधे सीधे देश की अर्थव्यवथा को प्रभावित कर रहा है। दीपावली के पटाखें, दीपावली की सजावटी बल्ब की लड़िया परपंरागत भारतीय उत्पादों को पीटे धकेल रही है।
चीन के पटाखें हो या पंतग के सीजन में आने वाला चीनी मांझा हानिकारक व दुर्घटना ही नहीं बल्कि जानलेवा होने के बावजूद धडल्ले से बाजार में बिक रहा है। हांलाकि देश के कई हिस्सों में इनसे होने वाली जन-धन हानि के कारण इनके बेचने पर पाबंदी लगाई हैं। पर जब चीन खुले रुप से भारत के विरोध में और पाकिस्तान वहां भी अजहर मसूद जैसे आतंकी के पक्ष में एक अकेले अपने वीटों के आधार पर आतंकवाद के पक्ष में आ रहा है तो हमें चीनी उत्पादों के कारोबार व इनको नहीं खरीदने का संकल्प लेने में देरी नहीं करनी चाहिए। अकेले दशहरा और दीपावली का सीजन ही चीन की अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर सकता है।
एक मोटे अनुमान के अनुसार चीनी उत्पादोें के कारण देश में 4 करोड़ से अधिक रोजगार कम हुए हैं। ये ही कोई 5 लाख से ज्यादा छोटे और बीच की श्रेणी के उद्योग प्रभावित हुए हैं। देश के 40 फीसदी खिलौना उद्योग बंद हो गए हैं। दरअसल भारतीय उत्पादों की तुलना में चीनी उत्पाद काफी सस्ते पड़ते हैं। यही कारण है कि मशीनरी के क्षेत्र में चीन का दखल बढ़ता जा रहा है। फिक्की से प्रा΄त आंकड़े आंखें खोलने के लिए पर्या΄त है।
एक समय था जब देश की कताई मिलें मशीनरी के लिए पूरी तरह से दक्षिण भारत की कंपनियों खासतौर से लक्ष्मी कंपनी पर निर्भर थी। आदेश के बाद दो-दो, 3-3 साल तक आपूर्ति होने और लागत भी अधिक होने से स्पिनिंग मिलों ने चीन की और मुंह किया। यह जानते हुए भी कि इन मशीनों की गुणवत्ता ज्यादा अच्छी नहीं है उसके बावजूद स्पिनिंग मिलों में चीनी मशीनें धड़ाधड़ लग रही है। दरअसल तत्काल आपूर्ति और चीन की मशीनरी की लागत में देशी मशीनों की तुलना में लागत में 45 से 50 प्रतिशत तक कमी होने के कारण चीनी मशीनें लगती जा रही है। इसी तरह से इलेर्क्ट्कि व इलेक्ट्रेनिक उत्पादों, मोबाइलों सस्ते होने के कारण बाजार अटे पड़े हैं। वेक्यूम पंप 70 प्रतिशत तक सस्ते होने से बाजार में दखल बनाए हुए हैं। सेरेमिक टाइल्स तक में चीन का दखल बढ़ता जा रहा है।
चीनी सामान की गुणवत्ता प्रश्नों के घेरे में होने के बावजूद भारतीय बाजार में घुस΄ोट का प्रमुख कारण जो कि स्थानीय धंधों को चोपट करने का भी प्रमुख कारण है वह यह कि व्यापारियोें को चीनी सामान बेचने पर 25-30 प्रतिशत तक का लाभ होता है जबकि देशी उत्पादोें को बेचने पर कम लाभ मिलता है। इसी तरह से चीन से आयात भी सस्ता है। और तो और लाख शिकायतों के बावजूद चीनी ई कॉमर्स कंपनी अली बाबा को कारोबार दिन दूनी रात चौगुणी रफ्तार से बढ़ता जा रहा है।
यह तो तब है जब एक सर्वें के अनुसार 40 प्रतिशत से अधिक आॅनलाइन चीनी उत्पादों की गुणवत्ता मानकों पर खरी नहीं उतर रही है। अब तो परिस्थितियांं पूरी तरह से बदल चुकी है। चीन हमारे पानी को रोक रहा है। आतंकवादियों का पक्ष ले रहा है। अतंरराष्टÑीय विरादरी के विरोध के बावजूद आतंकवादी अजहर मसूद जैसों का पक्ष ले रहा है तो हमें चीन के साथ कारोबार और चीन के उत्पादों को नहीं खरीदने का संकल्प लेना ही होगा।

डॉ. राजेन्द्र प्रसाद शर्मा

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