सम्पादकीय

एक साथ चुनाव का अभी माहौल नहीं

Atmosphere, Election, Editorial

शिरोमणि अकाली दल सहित चार पार्टियों ने ही चुनाव एक साथ करवाने का समर्थन किया

विधि आयोग द्वारा लोकसभा तथा विधान सभा के चुनाव एक साथ करवाने संबंधी कार्यक्रम की सहमति नहीं बन सकी। कांग्रेस ने इस विचार में हिस्सा ही नहीं लिया। भाजपा के अलावा सिर्फ शिरोमणि अकाली दल सहित चार राजनीतिक पार्टियों ने ही चुनाव एक साथ करवाने का समर्थन किया है बाकी पार्टियां इससे सहमत नहीं हैं। दरअसल भारत जैसे विशाल देश में जनसंख्या व प्रशासनिक जटिलताएं बहुत ज्यादा हैं, जिसमें एकसाथ चुनाव करवाना एकदम संभव नहीं। पहली बात के न्द्र से लेकर राज्य तक गठबंधन सरकारें आज की कड़वी सच्चाई बन गई हैं। जम्मू-कश्मीर व कर्नाटक इसके ताजा उदाहरण हैं।

जम्मू-कश्मीर में पिछले महीने राष्टपति राज लागू हुआ

गठबंधन में से एक पार्टी बाहर होती है तब राष्टÑपति शासन लागू हो जाता है। स्पष्ट बहुमत ना होने पर हालात ऐसे बन जाते हैं कि पार्टियां अपने विधायकों को खरीद फरोख्त से बचाने के लिए दूसरे राज्यों के होटलों में नजरबंद रखती हैं। राज्य की तो बात छोड़ो भाजपा का नेतृत्व करने वाली केन्द्र की एनडीए सरकार ही कभी 13 दिन व कभी 13 महीने चली। जम्मू-कश्मीर में पिछले महीने राष्टÑपति राज लागू हुआ है। वर्तमान एनडीए सरकार में तेलगू देशम पार्टी गठबंधन से बाहर हो गई है।

एनडीए की सभी पार्टियां सहमत नहीं

भाजपा एक ही समय चुनावों का विचार सामने लाई है लेकिन एनडीए की सभी पार्टियां उससे सहमत नहीं। इन हालातों में बिहार के मुख्यमंत्री नीतिश कुमार की स्वतंत्र व निष्पक्ष राय बड़ी वजनदार है। राज्य में भाजपा के साथ सरकार चलाने के बावजूद उनका कहना है कि 2019 की तो बात छोड़ो 2024 में भी एक समय चुनाव करवाना संभव नहीं। लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि देश में माहौल बनाईए ताकि कभी यह संभव हो सके। चुनावों के लिए किसी पर नए विचार को थोपा नहीं जा सकता बल्कि उसके लिए समान्त राजनीतिक व्यवस्था को समझने की जरूरत है। हमारे राजनीतिक ढ़ांचे में लगातार पतन आया है।भ्रष्ट्राचार, मौकाप्रस्ती ने राजनीतिक अस्थिरता पैदा की है। अगर हम स्थिर सरकारों की गारंटी दे सकें तो यह बहुत बड़ी प्राप्ति होगी। एक ही समय में चुनाव करवाना अभी असंभव है लेकिन इस विचार को हकीकत में बदलने के लिए काफी समय लगेगा चूंकि यह राजनीतिक संस्कृति व राजनीतिक प्रणाली में आमूल चूल बदलाव की मांग करता है।

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