पंजाब

नवजोत सिद्धू ने ‘जज’ बनकर इंजीनियरों को लगाई लताड़

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 सार्वजनिक तौर पर की एसई की सुनवाई, ठहराया दोषी

  • मंत्री ने सार्वजनिक तौर पर की सुनवाई, मीडिया को मिली एंट्री

चंडीगढ़ (अश्वनी चावला)। पंजाब के कैबिनेट मंत्री नवजोत सिद्धू कपिल शर्मा शो के बाद अब अपने ही विभाग में जज बन चुके हैं। उन्होंने दोषी साबित होने से पहले ही अपने विभाग के सुपरडेंट इंजीनियरों को मीडिया और पत्रकारों के समक्ष सार्वजनिक तौर पर दोषी ठहराते हुए सख्त कार्रवाई के लिए तैयार रहने के लिए कह दिया। सिद्धू के इस रवैये को देखकर सुपरडेंट इंजीनियरों ने आपत्ति जताई और मुख्यमंत्री अमरिन्दर सिंह को दखल देने की मांग की।

जानकारी के अनुसार पिछली अकाली-भाजपा सरकार में अमृतसर व लुधियाना सहित जालंधर नगर निगम चुनावों से एक साल पहले 800 करोड़ रुपए के काम हुए थे। जिसमें 500 करोड़ से ज्यादा काम सिंगल टैंडर के द्वारा होने के कारण पिछले दिनों नवजोत सिद्धू ने इन तीनों ही निगमों के 4 सुपरडेंट इंजीनियरों को निलंबित करते हुए जवाब देने के लिए कहा था। मंगलवार को यह चारों सुपरडेंट इंजीनियर चंडीगढ़ में स्थानीय निकाय विभाग के आधिकारियों के पास अपनी सफाई देने के लिए पहुंचे थे।

चारों सुपरडेंट इंजीनियर ने जताई सिद्धू की कार्रवाई पर आपत्ति

मंत्री नवजोत सिद्धू ने सुनवाई को सार्वजनिक करने की मंशा से मीडिया को सुनवाई वाली जगह पर बुला दिया। वहीं चारों इंजीनियर भी मौजूद थे। सुनवाई शुरू होते ही अमृतसर के पीके गोयल, जालंधर के कुलविन्दर सिंह व लुधियाना के पवन शर्मा और धर्म सिंह यह देखकर हैरान रह गए कि सुनवाई वाली जगह पर पहले से ही काफी ज्यादा जमावड़ा लगा हुआ था। फिलहाल मौके पर इन इंजीनियरों ने आपत्ति जताते हुए सफाई पेश की। उन्होंने कहा कि शहरों का विकास करने के लिए सरकार ने उपायुक्त के नेतृत्व में समिति बनाई हुई थी। पैसा सीआईडीबी द्वारा मुहैया करवाया जा रहा था जिस कारण उन्होंने नियमों व सरकार के आदेश की पालना करते हुए काम किया।

सुपरडेंट इंजीनियरों की सुनवाई दौरान नवजोत सिद्धू ने चारों आधिकारियों को दोषी करार देते हुए कह दिया कि आपने नियमों की पालना नहीं की है, इसीलिए कार्यवाही तो जरूर होगी। अब आप लिखित जवाब दाखिल करें।

बेइज्जत करना गलत, मुख्यमंत्री दखल दें: इंजीनियर

सुनवाई के बाद एक सुपरडेंट इंजीनियर ने आपत्ति जताई और कहा कि इस तरह बेइज्जत करना गलत है, वह छोटे मोटे कर्मचारी नहीं बल्कि सुपरडेंट इंजीनियर हैं। इसीलिए नवजोत सिद्धू को इस तरह सार्वजनिक तौर पर सुनवाई करते हुए बेइज्जत नहीं करना चाहिए था। उन्होंने कहा कि अधिकारियों को सरकार के नियमों व इशारे पर काम करना पड़ता है, जोकि उन्होंने किया लेकिन सिद्धू उनके साथ गलत कर रहे हैं। मुख्यमंत्री अमरिन्दर सिंह को इस तरह की कार्रवाई के लिए दखल देना चाहिए।

बेइज्जत करने का सिद्धू को हक नहीं: चीमा

पूर्व मंत्री व अकाली दल के जरनल सचिव दलजीत सिंह चीमा ने नवजोत सिद्धू की कार्रवाई को गैर-वाजिब करार दिया। उन्होंने कहा कि इस तरह जज बनने का नवजोत सिद्धू को कोई अधिकार नहीं है। यदि सिद्धू को आधिकारियों की कारगुजारी पर शक है तो नियमों के तहत कार्रवाई करने का अधिकार बनता है। सार्वजनिक सुनवाई कर बेइज्जत करने का उन्हें कोई हक नहीं।

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