सम्पादकीय

जज्बे से भरेगा नापाक हरकतों का जख्म

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कश्मीर में पत्रकार शुजात बुखारी की हत्या घाटी के अमनपंसद लोगों के लिए बहुत बड़ा धक्का है। हत्या किसने की यह एसआईटी जांच से सामने आएगा लेकिन इतना तय है कि यह घाटी की भलाई के लिए सोचने वालों का कृत्य नहीं हो सकता। बल्कि यह घटना उन लोगों का दिल ठंडा करने के लिए अंजाम दी गई है जो पाकिस्तान में बैठकर भारत के सीने को चीरने की नापाक तमन्ना रखते हैं। ऐसे लोगों को घाटी में आतंकियों के खिलाफ अभियान पर रोक से बहुत ज्यादा बेचैनी थी।

शायद उन्हें इस बात का डर था कि अगर सीजफायर बढ़ा तो घाटी के लोगों का दिल जीतने की मुहिम परवान चढ़ सकती है। वे भारतीय तंत्र और सुरक्षा एजेंसियों को विवश करना चाहते हैँ कि घाटी में सीजफायर की बात सोचना छोड़ दें। खैर, कश्मीर में ऐसी कुर्बानियों का इतिहास है। लेकिन यह स्पष्ट है कि हर बार पाकिस्तान की नापाक मंशा कश्मीर के लोगों ने ही खारिज की है। इसी वजह से वहां चुनी हुई सरकार है। यह तथ्य है कि पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद के चलते पिछले कुछ दशकों में घाटी में हजारों लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी है।

सुरक्षा बल के जवान बड़ी संख्या में शहीद हुए हैं। वर्ष 2017 के दौरान करीब 1900 से ज्यादा जवान हिंसा के चलते घायल हो गए। सुरक्षा बलों ने संयम नहीं छोड़ा। आतंकियों पर कहर जरूर बरसाया गया लेकिन आमजनों के प्रति सुरक्षा बलों का रुख संजीदा रहा है। यह तथ्य है है कि लश्कर, जैश ए मोहम्मद, हिज्बुल मुजाहिदीन जैसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर घोषित आतंकी संगठनों ने पाकिस्तान की शह पर घाटी में खूनी खेल जारी रखा लेकन हर बार अमन पसंद लोगों ने अपने जज्बे से खून खराबे वाली मानसिकता को मात दी।

यही वजह है कि आज कश्मीर का नौजवान खेल के मैदान में अपने करतब दिखा रहा है। सिविल सर्विसेज में घाटी के नौनिहाल अपना सिक्का जमा रहे हैं। पढ़ने का जज्बा उनमें दिखता है। वे खून खराबा का समर्थन करने वाले अलगाववादियों से सवाल करते हैँ कि आप अपने बच्चों को विदेशों में, अंग्रेजी स्कूलों में पढ़ाते हो और हमसे जिहादी बनने को कहते हो क्यों? यह सही है कि घाटी के बहुत से युवा बंदूक थामकर गुमराह हुए हैं। कट्टरपंथी वहाबी विचारधारा का भी प्रसार चिंता का विषय है।

लेकिन इससे बड़ा सत्य यह भी है कि घाटी से ही इनके विरोध में लोग खड़े हो रहे हैं। बड़ा समुदाय ऐसा है जो अपने बच्चों की तालीम चाहता है। उसके मन में सपने हैं जिन्हें पूरा करने के लिए वह देश के किसी कोने में जाना चाहता है। सुरक्षा बलों को इसी मुहिम में सहयोग करने की जरूरत है। इनको ही सही मायने में हीलिंग टच की जरूरत है। हर तरह से इनकी मदद होना चाहिए। पाकिस्तान आतंकियों को मोर्टार, राकेट लांचर, ग्रेनेड, विस्फोटक मुहैया कराता रहे हमारी कोशिश होना चाहिए कि हम घाटी के नौजवानों को कलम पकड़ाएं।

उनके सपनों को पंख लगाने का अवसर दें। घाटी में विकास की धारा का प्रवाह हो। आतंकी गुट बाधा बनते रहेंगे। उनकी ओर से रक्तपात थमेगा हमें यह सोचना भी नहीं चाहिए। लेकिन हमारी कोशिश हो कि निर्दोष लोगों को कैसे बचाया जाए। कैसे घाटी में यह माहौल बने जिसमें अमनपसंद लोग पत्थरबाजों पर भारी पड़ें।

शुजात बुखारी या सेना व सुरक्षा बल के जवानों और आम नागरिकों की शहादत का सबक यही है कि हमें आगे बढ़ना है। हिंसा व आतंक की भाषा समझने वालों का सही ईलाज करते हुए कश्मीर में स्कूल, अस्पताल, सड़कों का जाल बिछाना है। ईद के मुबारक मौके पर हम यह उम्मीद करते हैं कि यह जरूर होगा। पाक की नापाक हरकतों से मिलने वाला जख्म इसी जज्बे से भरेगा।

 

 

 

 

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