सम्पादकीय

हिंसा नहीं गौरक्षा का तरीका

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गौरक्षा के नाम पर गुंडागर्दी के मामलों में दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के आदेश दिए हैं। मोदी के आदेश इस इस बात का संकेत है कि जमीनी स्तर पर पहले किसी ने सिरदर्दी नहीं ली।

कई ऐसीं घटनाएं भी घटी, जहां गाय के मांस की अफवाह फैलाकर स्वार्थी लोगों ने अपनी निजी रंजिशें भी निकाली। उत्तर प्रदेश में दादरी मुद्दा भी विवादों में रहा। नि:संदेह इन घटनाओं से देश की छवि को ठेस पहुंची है।

भारत वह देश है, जहां सद्भावना व अहिंसा को धर्म का दर्जा दिया गया है। विचार-विमर्श व प्रचार भारतीय संस्कृति की मुख्य पहचान है। कोई भी व्यक्ति कानून को हाथ में नहीं ले सकता। सरकार इस रुझान को सख्ती से रोके।

कानून के तहत दोषी को एक प्रक्रिया के अंतर्गत सजा देने का अधिकार केवल अदालतों के पास है। गाय भारत का अनमोल पशु है, जिसे माता का दर्जा दिया गया है। गाय की संभाल राष्ट्र के विकास में अहम् भूमिका निभा सकती है।

प्राचीन समय में गाय को समाज में बड़ा सम्मान दिया जाता था, लेकिन स्वार्थी व अज्ञानी लोगों ने गाय को बेसहारा छोड़ दिया। स्वयं गौ रक्षकों ने भी गाय की संभाल व सम्मान करने की बजाए, इसे एक धर्म विशेष तक सीमित करने के साथ-साथ दो धर्मों में टकराव के हालात पैदा कर दिए।

गाय का दूध प्रत्येक धर्म के मानव के लिए गुणकारी है, जो किसी भी मानव का धर्म नहीं पहचानता। गौरक्षा के नाम पर हो रही गुंडागर्दी के मामलों को पूरी गहराई से देखने की आवश्यकता है कि कहीं इसके पीछे देश विरोधी ताकतों का हाथ तो नहीं।

1980 के दशक में गौहत्या के कारण दो साम्प्रदायों में टकराव की स्थिति पैदा की गई थी। देश में विरोधी ताकतें भारतीयों की इस कमजोरी से भलीभांति परिचित हैं कि गाय का धार्मिक महत्व होने के चलते लोगों में मतभेद पैदा करना आसान है।

सरकार को इस मामले में पूरी तरह चौकसी बरतनी होगी। साथ ही शरारती तत्वों के खिलाफ कार्रवाही में देरी नहीं करनी चाहिए। दूसरी तरफ विपक्षी पार्टियों को इस नाजुक मामले पर राजनीति नहीं करनी चाहिए। इतिहास इस बात का गवाह है कि औरंगजेब तलवार के दम पर इस्लाम को आगे नहीं बढ़ा पाया लेकिन सूफी फकीरों ने अपने मानवतावादी संदेश के माध्यम से अपने विचार को हिंदूस्तान में लोकप्रिय बना दिया।

यही बात उन गौरक्षकों पर भी स्टीक बैठती है। जो गौरक्षा के नाम पर हिंसा फैला रहे हैं। गौरक्षा के लिए जो अभियान डेरा सच्चा सौदा के पूज्य गुरु संत गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां ने चलाया है, वह ऐतिहासिक व प्रेरणा दायक है।

आप जी ने सरकार को प्रस्ताव रखा है कि अगर गौचर भूमि डेरा सच्चा सौदा को दे दी जाए तो वहां बेसहारा गौवंश के लिए डेरा सच्चा सौदा सभी प्रबंध करेगा। आप जी ने गाय के दूध की पार्टी की परंपरा शुरू करके लोगों को गाय के दूध के लाभ बताए हैं। यह अभियान ही वास्तव में सच्ची गौरक्षा है।

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