सम्पादकीय

सरकार व न्यायालय की सख्ती

Government Strict

Government Strict भ्रष्टाचार व धोखाधड़ी के खिलाफ सरकार व सर्वोच्च न्यायालय का रवैया बेहद सख्त है। पिछले दिनों सुप्रीम कोर्ट ने आम जनता का पैसा न लौटाने पर सहारा ग्रुप की हर दलील को नकारते हुए एंबी वैली को नीलाम करने का आदेश जारी किया।

उधर केंद्र सरकार की सख्ती का रंग इंग्लैंड में भी नजर आया, जहां भारतीय बैंक का 9000 करोड़ रुपये हड़पने वाले विजय माल्या को गिरफ्तार किया गया।

Government Strict चाहे माल्या को जमानत मिल गई और अभी फिलहाल उसकी भारत को सुपुर्दगी सवालों के घेरे में है, फिर भी यह पहली बार हुआ है कि किसी सरकार ने किसी देश में जा बैठे धोखाधड़ी के किसी आरोपी को गिरफ्तार करवाने में सफलता प्राप्त की हो। इससे पहले अधिकतर यही होता रहा है कि आरोपी किसी न किसी तरह देश लौटते हैं और हवाई अड्डे पर उनकी गिरफ्तारी की जाती है।

पर्ल्ज ग्रुप का प्रमुख निर्मल सिंह भंगू को देश लौटने पर गिरफ्तार किया गया था। सहारा के साथ माल्या की जायदाद भी नीलाम की जा रही है। इसी तरह सरकार कालेधन पर भी सख्ती बरत रही है। नोटबंदी के दौरान 60 हजार खातों की जानकारी मिली है जिनमें बहुत ज्यादा पैसा जमा हुआ।

यदि सरकार इस मामले में दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करती है तो सरकार का नोटबंदी करने का फैसला सफल हो जाएगा। Government Strict

जहां तक माल्या के मामले का संबंध है, उन बैंक अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई की जरूरत है, जिन्होंने उसे बहुत कम गारंटी पर लोन मुहैया करवाया। दरअसल भ्रष्टाचार में सख्त कार्रवाई व जल्द कार्रवाई समय की बहुत बड़ी जरूरत बन गई है।

Government Strict राजनैतिक इच्छा का बढ़ना, पुलिस लापरवाही व भ्रष्ट ढांचा, लंबी न्यायिक प्रक्रिया, दोषियों को बचने का रास्ता निकाल देती थी, लेकिन न्यायलय ने भ्रष्टाचार के खिलाफ अपना शिकंजा सख्त किया है कि अब आरोपी बच निकलने में सफल नहीं हो सकते।

घोटालेबाजों के वकीलों की दलीलें भी नाकाम हो रही है और न्यायालय दोषियों की जायदाद नीलाम करवाने का सख्त आदेश दे रही है। भ्रष्टाचार पर उठाए जा रहे कदम देश की आर्थिक स्थिति को मजबूत करेंगे व भ्रष्टाचार का कलंक भी खत्म होगा।

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