हरियाणा

मनरेगा घोटाले में चार बड़े आईएएस अफसरों पर कानूनी शिकंजा

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आरटीआई एक्टिविस्ट का संघर्ष रंग लाया

  • लोकायुक्त ने एफआईआर दर्ज करने की सिफारिश की
  • पूर्ववर्ती हुड्डा सरकार के समय हुआ था 25 करोड़ का कथित घोटाला

चंडीगढ़ (अनिल कक्कड़)। भ्रष्टाचार पर ज़ीरो टालरेंस नीति के तहत काम कर रही प्रदेश की भारतीय जनता पार्टी की सरकार का असर नज़र आने लगा है। बहुचर्चित अंबाला मनरेगा घोटाला में सोमवार को लोकायुक्त द्वारा प्रदेश के चार बड़े आईएएस अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के लिए सरकार को सिफारिश कर दी गई है।

प्रदेश के स्वास्थ्य एवं खेल मंत्री अनिल विज ने विपक्ष में रहते हुए हुड्डा सरकार के समय इस मुद्दे को काफी जोर-शोर से उठाया था। बता दें कि अंबाला मनरेगा घोटाला लंबे समय से प्रदेश के राजनैतिक गलियारों में चर्चा का विषय रहा।

25 करोड़ रुपए के लगभग की हेराफेरी वाले इस मामले में लोकायुक्त द्वारा सुनवाई की जा रही थी। सुनवाई के बाद लोकायुक्त ने प्रदेश सरकार को चार बड़े आई.ए.एस. अधिकारियों समीरपाल सरों, रेणु फुलिया, मोहम्मद शाइन व सुमेधा कटारिया के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के लिए मुख्यसचिव को अपने आदेश की कापी भेज दी है।

आरटीआई एक्टिविस्ट पी.पी. कपूर ने किया था पर्दाफाश

वर्ष 2007-2010 में राईट टू इनफॉरमेशन (आर.टी.आई.) एक्टिविस्ट पी.पी. कपूर ने अंबाला में करोड़ों रुपए के इस मनरेगा परियोजना के तहत किए गए घोटाले का पर्दाफाश किया था।

कपूर के अनुसार उस समय के एडीसी अंबाला संजीव वर्मा व वजीर सिंह गोयत द्वारा इस मामले में की जांच में घोटाला व गबन की रिपोर्ट मिलने के बावजूद भी अंबाला के तत्कालीन जिला उपायुक्त समीरपाल सरों, मोहम्मद शाईन, आरपी भारद्वाज व तत्कालीन एचसीएस अधिकारी रेणु फूलिया, सुमेधा कटारिया ने वन विभाग के अधिकारियो को 25.12 करोड के चैक काट कर दे दिए।

शिकायत के बाद जांच विजीलेंस को सौंपी गई जिसमें पाया गया कि उस समय के जिला उपायुक्त अंबाला ने बिना किसी प्रशासनिक अनुमति व बिना किसी तकनीकी अनुमति व नियमों की धज्जियां उड़ा कर वन विभाग के अधिकारियों को चैक काट कर पैसा दिलवाया था। वहीं इस मामले की जांच विजिलेंस जांच तत्कालीन डी.जी.पी. शरद कुमार ने हरियाणा सरकार को 16 नवंबर 2012 को सौंपी थी।

सीएम विंडो पर शिकायत के बाद वन विभाग के अधिकारी नपे

आरटीआई एक्टिविस्ट कपूर ने मौजूदा भाजपा सरकार द्वारा शुरू कई गई सीएम विंडो सेवा का लाभ लेते हुए 12 जनवरी 2015 को इस घपले की शिकायत की गई। जिस पर कार्रवाई करते हुए सरकार ने वन विभाग के आरोपी अधिकारी जगमोहन शर्मा, डी.एफ.ओ. टी अंबाला मंडल, राजेश राणा, प्रशांत शर्मा, विनोद कुमार, लक्ष्मण दास, दीपक ऐलावादी, चंद्रमोहन व सुरेंद्र नागर के खिलाफ 27 जनवरी 2015 को एफआईआर दर्ज करने आदेश दिए। ये सभी हाईकोर्ट से जमानत पर चल रहे हंै।

साथ ही विजिलेंस जांच में दोषी पाए गए 3 आई.ए.एस. व एक एच.सी.एस. अधिकारी से सराकर ने स्पष्टीकरण मांगा था, इन आई.ए.एस. अधिकारियो में समीरपाल सरो, चंडीगढ़ के पूर्व डी.सी. मोहम्मद शाईन, आई.ए.एस. रेणु फूलिया, आई.ए.एस. सुमेधा कटारिया, अंबाला के पूर्व डीसी आरपी भारद्वाज शामिल थे।

देरी से आया फैसला लेकिन पूरी उम्मीद की अंजाम तक पहुंचेगा: विज

अंबाला कैंट से विधायक एवं मौजूदा खेल एवं स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज ने कहा कि इस घोटाले में दोषी अफसरों के खिलाफ कार्रवाई करने में देरी हुई है, लेकिन उन्हें पूरी उम्मीद है कि कार्रवाई अंजाम तक पहुंचेगी। वहीं उन्होंने इसे ऐतिहासिक फैसला बताते हुए कहा कि प्रदेश की सरकार भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस नीति के तहत काम कर रही है।

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