राजस्थान

मिल मजदूरों का कलेक्टरेट पर धरना

  • मात्र खोखले आश्वासनों से नहीं जलता चूल्हा
  • आन्दोलन को तेज करने की चेतावनी
  • किसी प्रशासनिक अधिकारी के मौके पर पहुंचकर सुध नहीं लेने पर मजदूरों का धैर्य जवाब दे गया। इस कारण एकबारगी तनावपूर्ण स्थिति पैदा हो गई।

HanumanGarh, SachKahoon News:  बजट के अभाव में बंद हुई स्पिनिंग मिल को चलाने व श्रमिकों का समायोजन करने की मांग को लेकर एक बार फिर से सभी संगठनों ने एकजुट होकर आन्दोलन का बिगुल फूंक दिया है। इसी कड़ी में मिल बचाओ संयुक्त संघर्ष समिति के बैनर तले बुधवार को मिल मजदूरों ने जिला कलेक्ट्रेट के समक्ष धरना देकर प्रदर्शन किया। संघर्ष समिति के तत्वावधान में विभिन्न संगठनों के पदाधिकारी सुबह सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए कलेक्ट्रेट के सामने पहुंचे और धरना शुरू कर दिया। श्रमिक नेताओं का कहना था कि सरकार स्पिनिंग मिल के श्रमिकों को समायोजित करने के नाम पर गुमराह कर रही है। स्थिति यह है कि जब श्रमिक आंदोलन की चेतावनी देते हैं तब सरकार स्पिनिंग मिल के श्रमिकों को समायोजित करने की बात करने लगती है लेकिन अभी तक श्रमिकों के हित में कुछ नहीं हुआ। साथ ही कहा कि राज्य सरकार संवेदनहीन हो चुकी है। सरकार ने स्पिनिंग मिल बन्द कर 800 श्रमिकों व उनके परिवार से मुंह का निवाला ही नहीं छीना बल्कि हनुमानगढ़ शहर की आन व पहचान को खत्म किया जा रहा है जिसे हनुमानगढ़ की जनता कभी भी सहन नहीं करेगी। उन्होंने कहा कि सहकारिता मंत्री अजय सिंह किलक द्वारा श्रमिकों के समायोजन के संबंध में की गई घोषणा कें संबध में अभी तक मिल प्रबंधन, संघर्ष समिति, प्रशासन के पास कोई आधिकारिक पत्र नहीं आया है तो हम इस घोषणा पर विश्वास कैसे कर सकते हैं।

कलेक्टरेट गेट पर बनी टकराव की स्थिति
मिल मजदूरों का धरना अपराह्न तीन बजे तक चला। धरने पर किसी भी प्रशासनिक अधिकारी के न पहुंचने से समिति में आक्रोश फैल गया। मजदूर व श्रमिक नेताओं ने कलेक्टरेट की तरफ कूच किया लेकिन गेट पर मौजूद भारी पुलिस जाब्ते ने उन्हें अन्दर नहीं जाने से रोक लिया। इस पर श्रमिक गेट के बाहर सड़क पर बैठ गए। करीब आधा घण्टा तक भी किसी प्रशासनिक अधिकारी के मौके पर पहुंचकर सुध नहीं लेने पर मजदूरों का धैर्य जवाब दे गया।

सरकार पर लगाया वायदाखिलाफी का आरोप
मौके की नजाकता को समझते हुए गेट पर मौजूद पुलिस उप अधीक्षक अत्तर सिंह पूनियां ने कलक्टर से बात की। इस पर कलक्टर ने 11 सदस्यीय प्रतिनिधिमण्डल को वार्ता के लिए बुलाया लेकिन समिति सदस्यों ने इसे अस्वीकार कर दिया तथा 21 सदस्यीय प्रतिनिधिमण्डल से वार्ता करने की मांग की। लेकिन प्रशासन ने इसे अस्वीकार कर दिया।

कलक्टर से मिले ट्रेड यूनियनों के नेता
काफी देर चली कशमकश के बाद आखिरकार संघर्ष समिति द्वारा लिए गए निर्णय अनुसार इंटक के महावीर सिंह राठौड़, सीटू के भागीरथ डूडी, बीएमएस के शिवकुमार शर्मा व एटक के मूलचन्द चौधरी कलक्टर प्रकाश राजपुरोहित से मिले। चारों श्रमिक नेता कलक्टर से मिल चालू करने को प्रस्ताव लेकर धरनास्थल पर लौट आए।

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