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9 साल, 46 गवाह, फिर भी नहीं मिले सबूत

  • आतंकी की रिहाई। देशभर में कई बम धमाकों में रहा खूंखार आतंकी अब्दुल करीम टुंडा का हाथ
  • 1997 के पानीपत बमधमाके का था मास्टरमाइंड
  • 2013 में नेपाल से हुई थी गिरफ्तार
  • दिल्ली में हुए 2 धमाकों में पहले ही हो चुका बरी

ChandiGarh, Anil Kakkar: नौ साल की लंबी जिरह, 46 गवाहों की गवाहियां भी पानीपत ब्लास्ट मामले के मुख्यआरोपी अब्दुल करीम टुंडा को सज़ा नहीं दिलवा सकी। वीरवार को पानीपत की अदालत ने टुंडा को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया। 1997 में पानीपत में एक खड़ी ट्रेन में बम धमाका हुआ था जिसमें 1 बच्चे की मौत हो गई थी तथा 20 लोग जख्मी हो गए थे। वीरवार को अब्दुल करीम टुंडा को पानीपत के जिला अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश वेद प्रकाश सिरोही की अदालत द्वारा बरी करने के बाद 12:20 पर गाजियाबाद भेज दिया गया।
बता दें कि 1997 में बम विस्फोट करने के बाद पुलिस जोरों पर अब्दुल करीम टुंडा की तलाश कर रही थी। इस ब्लास्ट में 10 वर्षीय माडु नामक बच्चे की मौत सहित करीब 20 लोग घायल हुए थे। टुंडा 2013 को नेपाल से गिरफ्तार हुआ था। उसके बाद उसे पानीपत की कोर्ट में पेश किया गया था। पानीपत बम ब्लास्ट के साथ-साथ टुंडा पर गाजियाबाद में 4, हैदराबाद में 1और सोनीपत में 1 मामला अदालतों में विचाराधीन है। पानीपत की कोर्ट में टुंडा के खिलाफ 46 गवाह पेश हुए टुंडा की पैरवी भारतीय आर्मी से रिटायर आर. एस. एस. से जुड़े हुए सीनियर अधिवक्ता सुल्तान सिंह खर्ब कर रहे थे। उल्लेखनीय है कि टुंडा उन 20 आतंकवादियों में शामिल था जिन्हें भारत ने पाकिस्तान से 26-11 के मुंबई हमलों के बाद सौंपने को कहा था।

दिल्ली की अदालत 2 मामलों में कर चुकी है बरी
करीम टुंडा इससे पहले भी सबूतों के अभाव में 2 मामलों में बरी हो चुका है। अब्दुल करीम टुंडा को दिल्ली की एक अदालत ने 1997 में दिल्ली के करोलबाग तथा सदर बाजार में हुए विस्फोट के दो अलग-अलग मामलों में बरी कर दिया था। कोर्ट ने कहा कि उसके खिलाफ मामले को आगे बढ़ाने के लिए कोई प्रथमदृष्टयता सबूत नहीं हैं।

अभी भी न्यायिक हिरासत में रहेगा टुंडा
एक तरफ जहां टुंडा को पानीपत की अदालत ने बरी कर दिया है लेकिन अभी उसकी मुश्किलें कम नहीं हुई हैं। अभी भी टुंडा के खिलाफ उत्तरप्रदेश, हैदराबाद व सोनीपत की अदालतों में 6 बम विस्फोट के मामले विचाराधीन हैं। जब तक इन मामलों का फैसला नहीं आता टुंडा को न्यायिक हिरासत में ही रहना पड़ेगा।

कल करनाल की जेल में हुआ था जानलेवा हमला
पानीपत और सोेनीपत में बम ब्लास्ट के आरोपी आतंकी अब्दुल करीम उर्फ टुंडा की बुधवार सुबह चाय पीने के दौरान करनाल जेल में कुछ कैदियोंं से हुई बहस के बाद टुंडा पर जानलेवा हमला हो गया था। इस हमले में टुंडा की गला दबाकर मारने की कोशिश की गई। सुरक्षाकर्मियों ने उसे कैदियों की चंगुल से बचाया और उसे इलाज के लिए ट्रामा सेंटर ले गए। वहां इलाज के बाद उसे फिर जेल में भेज दिया गया है। टुंडा को पानीपत की अदालत मेंं पेशी के लिए लाया गया था और करनाल जेल में रखा गया था। बता दें कि पहले टुंडा दिल्ली की तिहाड़ जेल में बंद था और मंगलवार को ही पानीपत की कोर्ट में सुनवाई के बाद उसे करनाल जेल में भेजा गया था। टुंडा के खिलााफ 37 मामले दर्ज हैंं। 1 फरवरी 1997 को पानीपत बस अड्डे पर एक बस में बम ब्लास्ट हुआ था। इसमं एक बच्चे की मौत हो गई थी और करीब 20 लोग जख्मी हो गए थे। इस बम ब्लास्ट में अब्दुल करीम उर्फ टुंडा का हाथ बताया गया था। टुंडा का देश भर में कई आतंकी हमले में हाथ था।

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