सम्पादकीय

माओवाद की नई चुनौती

छत्तीसगढ़, झारखंड, ओडिशा, बिहार राज्यों में हिंसा का तांडव मचाने वाले हथियारबंद माओवादी अब देश की राजधानी दिल्ली तक पहुंच चुके हैं। हालांकि नोएडा में नौ नक्सली आतंकियों को गिरफ्तार कर लिया है। उनसे भारी मात्रा में हथियारों की खेप बरामद कर दिल्ली व आसपास के क्षेत्र में बड़ी हिंसक घटना को टाल दिया गया है। लेकिन यह खुफिया तंत्र की लचर कार्यशैली की ओर इशारा है कि किस तरह सुदूर क्षेत्रों में छिप-छिपकर आतंक मचाने वाले नक्सली दिल्ली व आसपास के एकदम उच्च सुरक्षित क्षेत्रों तक पहुंच गए हैं। खुफिया एजेंसियों को इन नक्सलियों की भनक तक न लग पाना एक बड़ा सवाल बन गया है? वह भी तब, जब देश पाकिस्तान के साथ चल रहे तनाव के चलते हाई एलर्ट पर है। उड़ी में हुए आतंकी हमले के बाद भारत द्वारा जवाबी कार्रवाई में किए गए सर्जीकल स्ट्राइक से देश में बस अड्डों, रेलवे स्टेशनों सहित सार्वजनिक स्थलों पर सुरक्षा व्यवस्था को चाक-चौबंद किया हुआ है एवं सुरक्षा बल इन स्थानों पर ही संदिग्धों की पूरी छानबीन कर रहे हैं। गिरफ्तार किए गए नक्सलियों में से एक नक्सली विगत चार साल से नोयडा में रह रहा बताया गया है। यहां उसने एक फ्लैट किराए पर ले रखा था। नोयडा में किराये पर रह रहे नक्सली पर पांच लाख रुपए का ईनाम था। स्पष्ट है कि उक्त ईनामी नक्सली राष्टÑीय राजधानी क्षेत्र में अपना ठिकाना बनाकर नक्सली जाल फैला रहा था और बाहरी प्रदेशों से नक्सली बुलाकर उन्हें यहां तैनात कर रहा था। इतना ही नहीं, ये नक्सली नोयडा में विस्फोटक सामग्री भी इकट्ठा कर रहे थे। राजधानी क्षेत्र में खुफिया एजेंसियों व सुरक्षा बलों की च΄΄ो-च΄΄ो पर नजर होनी चाहिए थी। देश की सरहदों पर फौज के जवान दुश्मनों से लोहा ले रहे हैं। अत: देश के अंदरूनी भागों में पुलिस व खुफिया एजेंसियों को देश के दुश्मनों की पहचान कर उन्हें खत्म करना चाहिए। उड़ी में घटित आतंकी घटना से सरकार व प्रशासन स्वीकार कर चुके हैं कि सुरक्षा प्रबंधों में भयंकर चूक हुई है। अत: ये भूल रोज-रोज नहीं होनी चाहिए। केन्द्रीय सुरक्षा एजेंसियों व स्थानीय पुलिस बलों को अपना तालमेल बढ़ाना होगा, ताकि आमजन अमन-शांति से रह सके व देश में लॉ एंड आॅर्डर खराब न हो। उक्त मामले में बिहार व उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों की सुस्ती भी सामने आई है। जिन राज्य सरकारों ने नक्सली लोगों पर ईनाम घोषित किए वह प्रदेश छोड़कर कहां चले गए, इसका कोई अता-पता मालूम करने की कोशिशें पूरी नहीं रहीं। अपराधी, आतंकी दो राज्यों की पुलिस के मध्य आपसी संवाद की कमी का भरपूर फायदा उठाते हैं। केन्द्रीय खुफिया एजेंसियां राज्यों को समय-समय पर चेतावनी भी जारी करती हैं, परंतु इन्हें गंभीरता से नहीं लिया जाता। इस कारण कई बड़ी आतंकी घटनाएं घटित हो जाती हैं। विदेशी आतंक का सामना करने के लिए राज्य सरकारों का सहयोग बेहद महत्वपूर्ण है। पड़ोसी देश व आतंक के विरूद्ध सुरक्षा के लिए केवल राष्टÑीय राजधानी क्षेत्र ही नहीं, पूरे देश की सुरक्षा में चौकसी रखनी होगी।

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