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करनाल: सलाखों में कैदी बनाएंगे पेठा मिठाई

  • निरीक्षण। करनाल जेल की सुरक्षा का जायजा लेने आए महानिदेशक कारागार ने किया ऐलान
  • जेलों में स्थापित होंगी गौशालाएं
  • धुंध के चलते जेलों की सुरक्षा दुरूस्त करने के निर्देश

Karnal, Hardeep Walia: जेल में रह रहे बंदी अब जेल में ही पेठा बनाने की कला सीखेंगे। यही नहीं कला सीखकर जेल में पेठा भी बनाया जाऐगा। इसके अलावा करनाल जेल में अब गौशालाएं भी स्थापित की जाऐंगी। यह जानकारी कारागार जेल के महानिदेशक यशपाल सिंघल ने दी। वह आज जेल में अधिकारियों की बैठक को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर उन्होंने करनाल जेल के सुरक्षा प्रबंधों का जायजा लिया व जेल की अंदर तथा बाहर की सुरक्षा पुख्ता करने बारे जेल अधिकारियों को दिशा-निर्देश भी दिए। उन्होंने कहा कि सर्दी व धुन्ध को ध्यान मे रखते हुए सुरक्षा व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया जाए। पुलिस प्रशासन के साथ समन्वय स्थापित होना चाहिए। जेल के बाहरी ड्रॉप गेट व बैरियर कि सुरक्षा पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि जेल कि बाहरी सुरक्षा के लिए पुलिस पैट्रोलिंग गाड़ी तैनात की जाए। सुबह -शाम स्वयं सुरक्षा प्रबंधों का निरीक्षण करें। इसके बाद उन्होने बंदियों के पुनर्वास व प्रशिक्षण के लिए करनाल जेल मे स्थापित की गई नई पेठा यूनिट व सिलाई यूनिट का उदघाटन किया। गौरतलब है कि यह पेठा यूनिट पेठा मिठाई बनाने के साथ-साथ बंदियों को पेठा मिठाई निर्माण का प्रशिक्षण भी देगी। जेल अधीक्षक शेर सिंह ने महानिदेशक कारागार यशपाल सिंगल को करनाल जेल के सुरक्षा प्रबंधों व सुधार कार्यों से अवगत कराया। इस दौरान जेल अधीक्षक शेर सिंह ने जेल में चल रहे व्यवसाय के साथ-साथ कैदियों द्वारा लिए जा रहे प्रशिक्षण के बारे में जानकारी से रूबरू करवाया।
इस अवसर पर जेल चिकित्सा अधिकारी डा. राकेश मित्तल, पुलिस हाउसिंग कार्पोरेशन के एस.डी.ओ. नरेश गोस्वामी, उप-अधीक्षक अशोक काम्बोज, नरेश गोयल, जसवंत सिंह व शिवेंद्र पाल सिंह समेत कई अधिकारी मौजूद रहे।
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जेल से हुनर सीख कर जाएं कैदी
जेलों को प्रशिक्षण केंद्र के रूप मे विकसित करने के लिए पूरा जेल विभाग संकल्पित है। बंदियों से रूबरू होते हुए उन्होंने कहा की जेल मे जो कुछ भी बनाएं उस मे उत्कृष्ट श्रेणी की गुणवत्ता देने का प्रयास करें। महानिदेशक यशपाल सिंघल ने बताया कि जेलों कि सुरक्षा हमारी प्राथमिकता है। लेकिन हमारा उद्देश्य यह भी है कि कोई भी बंदी जब जेल से बाहर जाए तो कोई न कोई हुनर सीख कर जाए ताकि वह आत्म-निर्भर बन कर समाज के विकास मे अपना सकारात्मक योगदान दे सके। उन्होने बताया कि जेल विभाग गौशालाएं खोलने की योजना बना रहा है। उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों मे अंतर्राष्ट्रीय गीता जयंती महोत्सव के अवसर पर जेल विभाग की तरफ से बंदियों द्वारा निर्मित वस्तुओं का स्टाल लगाया जाएगा।

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