सम्पादकीय

आतंक विरूद्ध भारत का दस सूत्रीय प्लान एक प्रभावी प्रयास

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भारत इन दिनों कश्मीर में आतंकियों की बढ़ती गतिविधियों से जूझ रहा है। सेना ने विगत 6 माह में 90 से ज्यादा आतंकवादियों को आमने-सामने की मुठभेड़ में मार गिराया है। इस सबसे बढ़कर 7 जुलाई को जर्मनी के हैम्बर्ग में हुई जी-20 शिखर वार्ता में भारत ने आतंक पर बेहद प्रभावशाली दस-सूत्रीय एक्शन प्लान विश्व के सामने रखा है।

भारत द्वारा आतंक के विरूद्ध पेश किए गए इस प्लान को जी-20 देशों ने बड़े ही गौर से सुना व समझा है। विश्वभर के मीडिया ने आतंक के विरूद्ध भारत की इस लड़ाई को अरबों लोगों तक पहुंचा दिया है।

भारत द्वारा पेश इस प्लान के दस सूत्र बेहद असरकारक प्रभाव दिखाएंगे, यदि दुनिया के देश इसे स्वीकार कर लेते हैं। इन दस बिंदुओं में भारत ने जी-20 से मांग की है कि आतंकवाद को हराने के लिए यह अनिवार्य किया जाए कि जो देश आतंकियों को संरक्षण देते हैं, उनका बहिष्कार हो और उन नेताओं एवं अधिकारियों का विश्व मंचों पर प्रवेश नहीं हो।

आतंकियों की सूची एक दूसरे देश के साथ तत्काल साझा हो एवं आतंकियों के विदेशों में भाग जाने की सूरत में उनका शीघ्र प्रत्यार्पण करवाने के लिए प्रत्यर्पण नियमों को आसान किया जाए, अंतरराष्ट्रीय समुदाय आतंक विरोध पर होने वाली अपनी बैठकों पर शीघ्र अमल करे, यूएनओं एवं सुरक्षा परिषद के आतंकरोधी कानून का सभी राष्ट्र प्रभावी तौर पर पालन करें,

धर्म आधारित आतंकवाद का सामना करने के लिए बढ़ रही कट्टरता को रोका जाए, आतंकियों के वित्तीय लेन-देन की कड़िया तोड़ी जाएं, आतंकियों को हथियार नहीं मिलें, इसके लिए देश हथियारों के निर्माण, उनकी खरीद-फरोख्त पर एक टास्ट फोर्स का गठन करें जो निगरानी करे कि हथियार आतंकियों के हाथों में न जाएं,

साइबर सुरक्षा बढ़ाई जाए एवं आखिर में भारत ने सुझाव दिया कि जी-20 देश क्यों न एक राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों का तंत्र खड़ा कर लें, जो इन देशों में सुरक्षा तंत्र का तालमेल बनाए रखें, जिससे कि आतंक के विरूद्ध लड़ाई किसी एक देश को न लड़नी पड़े, बल्कि अड़ोसी-पड़ोसी सब साथ मिलकर वह लड़ाई लड़ें।

निश्चित ही भारत ने आतंकवाद के विरूद्ध लड़ने के लिए विश्व को एक नई सोच दी है। भारत के सुझाव व विकल्प आज के अशांत विश्व को शीघ्र शांति प्रदान कर सकते हैं, लेकिन अफसोस इस बात का है कि जी-20 हो या सार्क, बार्क, यूएनओं कोई भी विश्व स्तरीय मंच क्यों न हो, वह चर्चा, विश्लेषण, नियम खूब अच्छे तीरके से बना लेता है,

परंतु कार्रवाई के वक्त बहुत से देश आपसी तालमेल खराब कर लेते हैं और आतंक जैसी समस्याएं एक देश से निकलकर दूसरे देश तक अपना जाल फैला लेती हैं, जिससे निर्दोष मानवता लहुलूहान होती रहती है, जैसा कि अभी हो रहा है।

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