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भारतीय सिनेमा को मिल रही नई राह

भारतीय सिनेमा की उपयोगिता पिछले काफी समय से धीरे-धीरे कम होती जा रही है। या यूं कहे कि बड़ा पर्दा दिशाहीन हो चुका है। सिनेमा समाज के निर्माण में एक सशक्त भूमिका निभा सकता है, लेकिन भारतीय सिनेमा लगातार अश्लीलता, गुंडागर्दी, चोरी, डकैती, आदि कुरीतियों को परोस कर भारतीय समाज को पथ भ्रष्ट करने में दिन-राज जुटा हुआ है। यह बात किसी से छिपी नहीं है। इसके साथ-साथ माया नगरी मुंबई में देह व्यापार, अंडरवर्ड, कालाधन को बढ़ावा व प्रतिभाओं को तार-तार करके उनका शोषण करने की प्रथा है। इस बात से बहुत कम लोग वाकिफ है।
कहा जाता है कि माया नगरी की चमक-धमक के पीछे एक स्याह काली कारनामों की करतूत छिपी रहती है। अभिव्यक्ति के अधिकार का दुरुपयोग करते हुए समाज, राष्ट्र व धर्म को हानि पहुंचाने की साजिशों से लगातार सिनेमा जगत की कुछ काली भेंड़ों के द्वारा होती रही है। लेकिन एमएसजी सीरिज की फिल्मों के माध्यम से पूज्य संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां द्वारा भारतीय सिनेमा जगत में कदम रखते ही माया नगरी मुंबई में खलबली मच गई तथा बेवजह उनकी पहली फिल्म एमएसजी द मैसेंजर को सेंसर बोर्ड ने रोकने का काम किया। जिससे सेंसर बोर्ड की छवि धूमिल होने के साथ-साथ इसमें फैले भ्रष्टाचार का पर्दाफास हुआ। जब दर्शकों ने इस फिल्म को देखा, तो उससे लाखों लोगों की जिंदगी बदल गई। आप यकीन नहीं करेंगे कि लाखों युवाओं ने नशे को तौबा करके साफ-सुथरी जिंदगी जीने का प्रण लिया।
मैं स्वयं कभी-कभार धु्रमपान कर लेता था, लेकिन इस फिल्म को देखकर मैंने जीवन में ध्रूमपान न करने का प्रण लिया तथा एक बुराई का मेरे जीवन से अंत हुआ। ऐसे सैंकड़ों उदाहरण है। जो फिल्म देखकर समाज हित में लाखों लोगों ने अनेक प्रण लिए। ऐसा ही नहीं, उन्होंने दूसरों को भी इस फिल्म को देखने के लिए जागरूक किया, ताकि वो भी अपनी एक बुराई का त्याग कर सकें। वो ताकतें जो भारतीय सिनेमा पर कब्जा जमाए रखती थी तथा जिनका संबंध सीधा अंडरवर्ड व विदेशी ताकतों के हाथों में था, लगातार भारतीय समाज को भारतीय सिनेमा के माध्यम से खोखला करने का काम कर रही थी।
जैसे ही पूज्य संत डॉ. गुरमीत राम रहीम जी इंसा ने इस क्षेत्र में अंधकार में धंसते जा रहे भारतीय समाज को सिनेमा जगत के माध्यम से नया उजाला देकर बचाने का काम किया है, तो अनेक ऐसी राष्ट्र विरोधी ताकतें उनके खिलाफ योजनाबद्ध तरीके से षडयंत्र रचने का काम करने लगी। क्योंकि वो नहीं चाहते थे कि भारतीय समाज व संस्कृति (जोकि विश्व की सबसे श्रेष्ठ संस्कृति है) उसका गौरव पूरे ब्रह्मांड में फेले। मैं इस बात के लिए पूज्य संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इंसा को करोड़ों अरबों बार का नमन करता हूं। जिन्होंने किसी भी बात की प्रवाह न करते हुए करोड़ों युवाओं के असली हीरो बनकर उनकी जिंदगी संवारने का काम किया है तथा भारतीय समाज को सिनेमा जगत के माध्यम से नई चेतना देने का काम किया है।
सत्ता के शीर्ष पर बैठे हुकमरानों को चाहिए कि इस बात की सीबीआई जांच करवाई जाए कि वो कौन-सी राष्ट्र विरोधी ताकतें थी, जो भारतीय समाज को सुधारने में जुटे पूज्य गुरुजी के खिलाफ षड्यंत्र रचकर उनके द्वारा किए जा रहे मानवता भलाई कार्यों को रोकने के लिए जीजान से जुटे हैं। तथा उन लोगों का असली मकसद क्या था? क्या है? और किसके इशारे पर वो ये कार्य कर रहे हैं? सैकड़ों मानवता भलाई कार्य जैसे कि नशा मुक्ति, कन्याभ्रूण हत्या, वेश्य विवाह, पौधा रोपण, रक्तदान, सफाई अभियान, नेत्र दान, शरीर दान में अनेक विश्व रिकॉर्ड बनाने के बाद सरकारें दुर्भाग्य से ऐसे संस्थाओं के सहयोग करने में आगे न आकर समाज व राष्ट्र का घोर अपमान कर रही है। जिस प्रकार से एमएसजी सीरिज की फिल्में समाज व राष्ट्र निर्माण के कार्य में लगी हुई है तो सरकार को चाहिए कि ऐसे फिल्मों को टैक्स फ्री करें। एमएसजी द लॉयन हार्ट को राजस्थान व हरियाणा की सरकारों ने टैक्स फ्री करके समाज व राष्ट्र हित का जो कदम उठाया है, उसके लिए दोनों प्रदेशों की सरकार बधाई की पात्र हैं। ठीक इसी प्रकार से अन्य राज्य सरकारों को भी समाज को नई दिशा देने वाली इस फिल्म को टैक्स फ्री करके समस्त समाज में जुटे पूज्य संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां का साथ देना चाहिए।
मेरा मानना है कि कोई भी युवा एमएसजी लायन हार्ट फिल्म को देखकर दुराचार, छेड़छाड़ आदि की सोच भी नहीं सकता, बल्कि राष्ट्र भक्त बनकर भारत माता के जयकारों के साथ राष्ट्र निर्माण में जुट जाएगा। जिस प्रकार सिनेमा जगत ने नारी का भारत समाज में जीना मुहाल कर दिया था, उसे केवल एक उपभोग की वस्तु मान कर लगातार सिनेमा जगत परोसे जा रहा था। वहीं पूज्य गुरुजी ने इस सोच को बदलकर भारतीय समाज की परंपरा को पुनर्जीवित करने का काम किया है।
ऐसी फिल्में देखने के बाद सैकड़ों युवा बहन, बेटियों की इज्जत व भारत माता की रक्षा के लिए अपनी जान को दाव पर लगाने की प्रेरणा लेंगे। फिर से भारत की गौरवशाली संस्कृति का डंका सारे विश्व में बजेगा। जिसका पूरा श्रेय पुुज्य गुरुजी को जाता है। वहीं किसानों की आत्महत्या के मामले में जिस प्रकार से पिछली सरकारें संवेदनहीन रही हैं। वह बात इस फिल्म के माध्यम से एक किसान के जीवन पर प्रकाश डालकर उसे आत्महत्या जेसे घृणित काम से बचने की प्रेरणा दी गई है, जो काबिल-तारीफ है। किसान को स्वावलंबी बनाने के लिए पूज्य गुरुजी जिस प्रकार से डेरा सच्चा सौदा में खेतीबाड़ी करते हैं। वह सारे विश्व के लिए किसी अजूबे से कम नहीं है।
अंत में इतना कहना चाहूंगा कि भारतीय सिनेमा जगत के लिए प्रेरणा स्त्रोत बने पूज्य गुरुजी जोकि एक फिल्म में 30 भूमिकाओं को निभाकर विश्व कीर्तिमान स्थापित कर चुके हैं। तथा भारतीय समाज के लिए स्वस्थ फिल्मों को निर्माण करके समाज को नई दिशा देने का काम कर रहे हैं। उनका कंधे से कंधा मिलाकर साथ देना चाहिए तथा राष्ट्र व समाज को नई दिशा देने के लिए अधिक से अधिक स्वच्छ फिल्मों का निर्माण होना चाहिए। यह बात अब सिद्ध हो चुकी है कि बॉक्स आफिस पर एमएसजी सीरिज की फिल्में धमाल मचा रही हैं। केवल अश्लीलता के माध्यम से ही कामयाबी नहीं मिलती। अत: भारतीय सिनेमा जगत को चाहिए कि वो इसको अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार को गलत इस्तेमाल न करके स्वस्थ समाज व राष्ट्र निर्माण में प्रयोग करे तो इससे समाज व देश का ज्यादा भला होगा।
-लेखक भारतीय चिकित्सा परिषद् के सदस्य हैं
डॉ. जितेन्द्र गिल

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