लेख

एक भारत, श्रेष्ठ भारत

Asian, Wrestling, Championship, Bronze Medal

India भारत के इतिहास का कोई ग्रंथ उठा कर देखें तो विभिन्न कालखंडों के भारत के मानचित्र मिलेंगे। किसी-किसी समय का मानचित्र अति विस्तृत, कभी अपेक्षाकृत कम।

सब से अधिक विस्तृत मानचित्र शायद उस समय का है जब अंग्रेजों के आधिपत्य का अंतिम जमाना था। स्वतंत्रता प्राप्ति के तुरंत पहले के मानचित्र की विस्तृति स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद के मानचित्र में नहीं मिलेगी। इस विस्तार के कई ऐतिहासिक कारण रहे जो इतिहास के विद्यार्थियों के लिए अध्ययन का रोचक विषय हैं।

India वेदों व धार्मिक ग्रंथों से संस्कृति मजबूत

राजनीतिक इकाई के रूप में भारत की विस्तृति में बदलाव होते रहने के बावजूद सांस्कृतिक भारत की परिकल्पना अक्षुण्ण और अपरिवर्तित बनी रही। भारतीय संस्कृति का इतिहास करीब पांच हजार वर्षों का माना जाता है। जब से मोहन जोदड़ो व हड़प्पा की सभ्यता का विकास हुआ, शायद उससे पहले ही भारत की श्रेष्ठ संस्कृति का विकास आरंभ हुआ। वेदों, उपनिषदों की रचना, महाभारत, रामायण, श्रीमदभागवत जैसे विशिष्ट धार्मिक ग्रंथों की रचना, कालिदास, भवभूति जैसे श्रेष्ठ साहित्यकारों की कृतियों की रचना आदि से संंपुष्ट संस्कृत भाषा का प्रचार जब आसेतु हिमाचल होता गया, तब भारत की संस्कृति भी शनै-शनै विकास पाती रही।

विश्व में सर्वश्रेष्ठ भारतीय संस्कृति  India

कहते हैं कि भारत विभिन्न उपसंस्कृतियों का देश है। विविध प्रदेशों की अपनी अपनी वेशभूषा, खानपान, आचार विचार विभिन्न धर्मों, संप्रदायों, जातियों की अपनी अपनी उपसंस्कृति है, विभिन्न भाषा समूहों की अपनी अपनी उपसंस्कृति पर इन विविधताओं में एकता का एक सूत्र देख सकते हैं।

इस सूत्र में पिरोई गई विविध प्रकार की मणियों की एक सुंदर माला है भारत की यह सामासिक संस्कृति विश्व की अनेक संस्कृतियों में अतिश्रेष्ठ मानी जाती है। यही श्रेष्ठ संस्कृति भारत को एक बनाए रखेगी लेकिन यह दुर्भाग्य की बात है कि विघटन की कुछ प्रवृत्तियां भी कभी कभी सिर उठाती पायी जाती हैं, कभी धर्म के नाम पर, तो कभी जााति के नाम पर, कभी प्रादेशिकता के नाम पर तो कभी भाषाओं के नाम पर। कभी आर्थिक असमानता के नाम पर तो कभी राजनीतिक विचारधारा के नाम पर।

India दृढ़ संकल्प सफल हो

इतिहास हमें बताता है कि जब-जब विघटनकारी प्रवृत्तियां प्रबल हुई, तब हमारे देश की प्रभुत्व संपन्नता ही विपदा में पड़ गई। जब छोटी-मोटी बातों को लेकर हमारे राजा-महाराजा आपस में भिड़ते रहे, तब उस अनैक्य से फायदा उठा कर विदेशी आक्रमणकारियों ने हतारे देश पर कब्जा किया।

हमने बड़ा मूल्य देकंर जो स्वतंत्रता पाई है, उसे बचाए रखने का हमारा दृढ़ संकल्प तभी सफल हो पाएगा जब हम उपर्युक्त सभी प्रकार के भेदों को लांघते हुए अपनी सांस्कृतिक तथा राजनीतिक एकता को बनाए रखने के लिए कठिन परिश्रम करेंगे।

हमें उन उपायों की खोज करनी होगी जिनसे अपनी एकता की भावना को सशक्त बना पाएंगे। हमें ऐसे उपाय सोच निकालने हैं जिन से हमारी विविधता भी बने रहे, साथ साथ एकता प्रबल होती भी रहे।

हमारे पास समृद्ध भाषाएं

किसी भी देश को बनाए रखने में भाषा की बड़ी भूमिका है। यूरोप के कई देशों के उदाहरण हमारे सामने हैं जो एक एक भाषा के माध्यम से जुड़े हुए हैं। हमारी खासियत यह है कि यहां अनेक विकसित तथा समृद्ध भाषाएं हैं।

इन भाषाओं का विकास करते हुए ही हमें आम संपर्क भाषा के रूप में, राष्ट्रभाषा तथा राजभाषा के रूप में अधिकांश भारतीयों द्वारा समझी जाती एकमात्र भाषा हिंदी का विकास करते रहना है। हमारा एक प्रमुख नारा यह भी रहे। एक राष्ट्रभाषा हिंदी हो, एक हृदय हो भारत जननी। तभी भारत एक बना रहेगा, श्रेष्ठ बना रहेगा।

Hindi News से जुडे अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें Facebook और Twitter पर फॉलो करें।

लोकप्रिय न्यूज़

To Top