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कैसा हो गाय-भैंस का आहार

Diet, Cow Buffalo

गाय और भैंस को हर 3 व ढाई लीटर दूध के हिसाब से 1 किलोग्राम राशन दें। जो गाय भैंस दूध नहीं दे रही हैं, उन्हें हर दिन 1 किलोग्राम राशन देना चाहिए। गाय भैंसों को 70फीसदी हर चारा देना चाहिए। 100 किलोग्राम वजन वाली गाय को 2.5 किलोग्राम और भैंस को 3 किलोग्राम सूखी खुराक की जरूरत होती है। इस में दोतिहाई चारा और एक तिहाई दाना देना चाहिए।

हरे चारे में कम से कम 11-12 फीसदी प्रोटीन होना चाहिए और डेन में 18-20 फीसदी प्रोटीन जरूरी हैं। सभी पशुओं को संतुलित मात्रा में प्रोटीन देना जरूरी होता है। पशुओं को संतुलित मात्रा में चारादाना दिन में 2 बार 8-10 घंटे के अंतर घंटे के अंतर पर दें। इस के अलावा 2 बार 8-10 घंटे के अंतर पर दें इस के अलावा 2 बार साफ ताजा पानी पीने को दें। 6 महीने की गाभिन भैंस को डेढ़ किलोग्राम राशन (दाना) अलग से दें। दुधारू पशुओं को रोजाना कम से कम 5 किलोग्राम हरा चारा जरूर दें।

सर्दी के मौसम में बरसीम सब से अच्छा हरा चारा होता है। पशु के राशन में 2 फीसदी मिनरल मिक्सचर जरूर मिलाएं। पशुओं से ज्यादा दूध लेने और उन को लम्बे समय तक सेहतमंद बनाए रखने के लिए उन्हें संतुलित मात्रा में चारादाना (राशन) देना जरूरी होता है। संतुलित राशन में खनिज लवण के साथ पोषक तत्त्व, प्रोटीन, विटामिन वैगरह तय मात्रा में रखें जाते हैं।

संतुलित आहार (राशन) बनाने का फामूर्ला न्यूट्रीशन एक्सपर्ट से संपर्क कर के हासिल करें7 संतुलित राशन घर में भी बना सकतें हैं। राशन बनाने में उम्दा क्वालिटी का अनाज (जेई, जौ, गेहूं, ज्वार वैगरह), तेल, खली (सरसों, मूंगफली वैगरह की खली), ग्वारमल, शीरा, नमक, मिनरल मिक्सचर व विटामिनों का संतुलित मात्रा में इस्तेमाल किया जाता है।

पूरक आहार से खत्म होंगी कमियां

एडवांस डरो फार्म पर पूरक आहार (सप्लीमेंट राशन) दिया जाता है। पूरक आहार खिलाने से पशु के जिस्म में आई कमियां दूर हो जाती हैं और वह लम्बे समय तक सेहतमंद व दुधारू बना रहता है। पूरक आहार में मिनरल मिक्सचर, फीड एडिटिव, बाइपास प्रोटीन, बी कंप्लेक्स वैगरह को शामिल किया जाता है बहुत सी प्राइवेट कंपनियां पूरक आहार बाजार से बेचती हैं, तो उन की पूरी जानकारी हासिल कर के अपने पशु को पूरक आहार खिलाएं।

पशुओं को इस तरह बचाएं कीड़ों से

छोटे या जवान पशुओं को बाहरी और अंदरूनी कीड़े ( इन्टरनल और एक्सटर्नल पैरासाईट) काफी नुकसान पहुंचाते हैं। अंदरूनी कीड़े जैसे फीता कृमि, गोलकृमि, परंकृमि वैगरह पशु के पेट में रह कर उस का आहार व खून पीते हैं। बाहरी कीड़े, जैसे जूं, किल्ली, पिस्सू, माइट वैगरह पशु के बाहरी जिस्म पर रहते हैं और उस का खून चूसते हैं।

बाहरी और अंदरूनी दोनों ही कीड़े पशु को कमजोर बना देते हैं, जिस के चलते पशु की दूध देने की कूवत कम होती जाती है और पशु समय से पहले कमजोर व बीमार हो कर मर सकते हैं पशु के अंदरूनी कीड़ों को मारने के लिए कीड़े मार दवा जैसे फेंटास, एल्बोमार, पैनाखूर वैगरह की सही मात्रा पशु चिकित्सक से पूछ कर दें। बाहरी कीड़ों को मारने के लिए ब्यूटाक्स दवा की 2 मिलीलीटर मात्रा 1 लीटर पानी में घोल कर पशु के शरीर पर अच्छी तरह से पोंछा लगाएं, पर दवा लगाने से पहले पशु के मुंह पर मुचका जरूर बांध दें, ताकि पशु दवा को चाट न सके।

 

 

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