सम्पादकीय

जाटों को देने के साथ अन्यों की भरपाई भी करनी होगी

Hindi Editorial, Jat Reservation, Govt, Action, Haryana

हरियाणा में बार-बार उठने वाला जाट आरक्षण आंदोलन एक बार फिर मुख्यमंत्री मनोहर लाल से बात कर थम गया है। इस बार सरकार ने जाटों की मांगों को लेकर काफी संजीदगी दिखाई है। पिछली बार जाट आंदोलन तीव्र हुआ था तब वह राजनेताओं के चंगुल में फंसकर बहुत ज्यादा पथभ्रष्ट हो गया था।

यहां तक कि सरकार के खिलाफ लड़ाई लड़ रहे जाट एकदम से प्रदेश में मुख्यमंत्री खट्टर की जाति-बिरादरी के विरुद्ध हो गए और प्रदेश में यह आंदोलन आरक्षण का आंदोलन न रहकर एक जातिगत दंगा व लूटपाट का अपराध बनकर रह गया था। उस वक्त हरियाणा में रोहतक, सोनीपत, झज्जर जिलों में काफी आगजनी व नुक्सान हुआ था।

सरकार ने मजबूरन दिखाई सख्ती |  Jat Reservation

नतीजा सरकार ने तब मजबूरन सख्ती दिखाई व दंगा-लूटपाट कर रहे जाटों को नियंत्रित करने के लिए अच्छे-खासे बल का प्रयोग किया गया। नतीजा सैकड़ों लोग इसमें घायल हो गए, कईयों की जानें चली गई। अब की बार जाट भी सतर्क हुए और सरकार भी सतर्क रही।

जाटों ने आंदोलन को संसद मार्ग तक ले जाने की ठानी लेकिन किसी भी तरह शांति को भंग नहीं होने दिया। सरकार ने भी सुरक्षा को चाक चौबंद रखा और जाटों को सुलह की मेज तक ले आई। हाल फिलहाल सरकार ने जो मांगें मानी है उसके सिवा कोई हल भी नहीं था।

Jat Reservation | क्षतिपूर्ति कर देने मात्र से काम पूरा नहीं हो जाता

आंदोलन के दौरान घायलों को मुआवजा, मृतकों के परिजनों को नौकरी व जाटों को आरक्षण में राज्य व केन्द्रीय स्तर पर व्यवस्था देना जोकि न्यायालय के निर्णय एवं केन्द्र में अन्य पिछड़ी जाति आयोग की नई कार्यकारिणी के कामकाज संभालने के बाद कर लेने का वचन दिया है।

परंतु सरकार को यहां यह भी नहीं भूलना चाहिए कि जाट आंदोलन में जाटों की क्षतिपूर्ति कर देने मात्र से काम पूरा नहीं हो जाता। आंदोलन के दौरान अन्य जिन भी प्रदेशवासियों का आर्थिक या जान-माल का नुक्सान हुआ है उसकी भी सरकार को भरपाई करनी चाहिए।

जाट आंदोलन पर बनाई गई प्रकाश सिंह कमेटी की सिफारिशों को भी परखना होगा। अभी तक प्रदेश में जाट आन्दोलन के दौरान नष्ट हुई पूरी सम्पति का सही अनुमान नहीं लग पाया है जिसकी कि भरपाई की जानी है। साथ ही पिछली बार आंदोलन के दौरान महिलाओं के विरुद्ध अपराधों की पृष्ठभूमि में कौन दोषी लोग रहे हैं? उनका भी पूरा पता नहीं चल सका है जोकि प्रशासनिक कार्यशैली पर बड़ा प्रशन चिन्ह है।

सबसे महत्वपूर्ण भाजपा के एक सांसद की भी भूमिका जाट आंदोलन में आग भड़काने वाली रही एवं अन्य दलों के नेता जो पर्दे के पीछे रहकर जाट आंदोलन में हिंसा फैलाते रहे, इन सबके विरुद्ध भी ठोस कार्रवाई की जानी होगी। ताकि भविष्य में किसी जाति, समाज के लोग अपने स्वार्थों की पूर्ति के लिए दूसरे लोगों की जान-माल या प्रदेश एवं राष्ट्र की एकता अखंडता को नष्ट भ्रष्ट न करें।

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