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हरियाणा रोडवेज कर्मियों की मांगें मानीं

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परिवहन नीति पर झुकी सरकार, होगी वापिस

चंडीगढ़। हरियाणा की भाजपा सरकार ने अब नई परिवहन पॉलिसी-2016-17 पर यू-टर्न ले लिया है। रोडवेज कर्मचारियों को सरकार ने भरोसा दिलाया है कि 16 मई को इस मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट में एफिडेविट देकर सरकार इस पॉलिसी को रद्द कर देगी। इससे पहले परिवहन विभाग ने इस पॉलिसी में संशोधन करने की बात कही थी। इसके साथ ही सरकार पिछले दिनों हुई रोडवेज हड़ताल के दौरान जिन कर्मचारियों पर निलंबन अथवा वेतन रोकने जैसी कार्यवाहियों को भी रद्द करने पर सहमत हो गई है।

चंडीगढ़ में हुई  बैठक

परिवहन मंत्री कृष्णलाल पंवार की अध्यक्षता में शनिवार को चंडीगढ़ में हुई एक बैठक में रोडवेज की सभी 8 यूनियनों ने संयुक्त रूप से अपना पक्ष रखा। मीटिंग के बाद संयुक्त संघर्ष समिति के सदस्य दलबीर किरमारा ने बताया कि बातचीत में सरकार पर इस बात के लिए दबाव बनाया गया कि 13 अप्रैल, 2017 को हुए समझौते को पूरी तरह लागू किया जाए। इस समझौते में नई परिवहन नीति को वापस लेते हुए इसके तहत जारी किए गए सभी रूट परमिट रद्द करने की बात हुई थी।

अब सरकार ने उस समझौते को लागू करने का भरोसा दिलाया है। इससे पहले नई नीति के तहत कुछ रूटों पर प्राइवेट आॅपरेटरों को लाइसेंस दिए जाने के विरोध में रोडवेज कर्मचारियों ने पिछले दिनों चक्काजाम किया था। पिछले दो-तीन दिन से भी विरोध प्रदर्शन चल रहा था। मीटिंग में परिवहन मंत्री कृष्णलाल पंवार के अलावा विभागीय एसीएस एस.एस. ढिल्लों समेत रोडवेज के कई अधिकारी मौजूद थे।
इन बातों पर बनी सहमति

  • वर्ष 1993 की पॉलिसी के तहत पुराने 273 रूटों पर चल रहीं 844 प्राइवेट बसें यथावत चलती रहेंगी। हालांकि यूनियन की ओर से सुझाव दिया गया है कि इनमें अच्छी कंडीशन वाली बसों को सरकार खरीदकर रोडवेज बेड़े में शामिल करे। साथ ही इन बसों के ड्राइवर-कंडक्टरों को भी रोडवेज में भर्ती किया जाए।
  • चरखी दादरी कर्मशाला में कांट्रेक्ट खत्म होने कारण पिछले दिनों हटाए गए सभी 52 कर्मचारी फिर से नौकरी पर रखे जाएंगे। इनका अनुबंध आगे बढ़ाया जाएगा।
  • वर्ष 2016 में अनुबंध आधार पर लगाए गए 500 से ज्यादा ड्राइवर-कंडक्टरों का अनुबंध भी आगे बढ़ाया जाएगा, ताकि उनकी नौकरियां बची रहें।

 

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