हरियाणा

अपनी पसंद की साइकिल खरीद सकेगी बिटियां, सरकार देगी पैसा

Pay for Bicycle

चंडीगढ़ (अनिल कक्कड़)। Pay for Bicycle प्रदेश का शिक्षा विभाग सरकारी स्कूलों उत्थान के लिए महत्वपूर्ण कदम उठा रहा है। इसके तहत प्रदेश की लड़कियों को सरकारी स्कूलों में जाने के लिए अब मनपसंद की साइकिल लेने की छूट दी जा रही है, इसमें सरकार साइकिल देने की बजाय पैसा देने जा रही है। वहीं मॉडल स्कूलों में अब ट्रांसफर सिफारिश पर नहीं इंटरव्यू के आधार पर किए जाएंगे।

Pay for Bicycle अतिरिक्त सचिव ने की सच कहूँ से बात

सरकारी स्कूलों में कैचअप प्रोग्राम के साथ स्कूल मैनेजमेंट को ही विद्यार्थियों की यूनिफार्म चुनने का अधिकार भी दिया गया है। यह सभी महत्वपूर्ण जानकारियां स्कूल शिक्षा विभाग के अतिरिक्त सचिव आईएएस पीके दास ने सच कहूँ संवाददाता से खासबीत में सांझा की।

प्रचार अभियान जोरों पर

पीके दास ने बताया कि सरकारी स्कूलों की तरफ बच्चों का रुझान बढ़े इसके लिए शिक्षा विभाग पूरा अप्रैल का महीना प्रवेश उत्सव के रूप में मना रहा है। राज्य स्तर पर, जिला स्तर और स्कूल स्तर पर नए बच्चों के स्वागत के लिए प्रोग्राम किए जा रहे हैं। अभिभावकों को बच्चों के एडमिशन में कोई परेशानी न उठानी पड़े, इसकी व्यवस्था कर रहे हैं। इसके लिए विभिन्न माध्यमों से प्रचार भी किया जा रहा है।

Pay for Bicycle अपर स्कूल में आॅटोमैटिक एडमिशन

एक महत्वपूर्ण घोषणा में पीके दास ने कहा कि जहां स्कूल सिर्फ 5 तक हैं और बच्चों को आगे छठी कक्षा में दाखिला लेना है तो सरकार ऐसा प्रोविज़न ला रही है कि बच्चों को दूसरे स्कूल में छठी में एडमिशन के लिए कागज़ जमा करवाने इत्यादि की समस्याएं न हों। उनका एडमिशन सीधा मौजूदा स्कूल से दूसरे स्कूल में हो जाएगा।

‘कैचअप’ प्रोग्राम शुरू,  ‘स्किल पासबुक’ जारी

कक्षा के अनुसार बच्चे में स्किल हों, सरकार यह भी सुनिश्चित करने जा रही है। दास के अनुसार अक्सर ऐसा देखने में आया है कि कई बच्चे जिस कक्षा में होते हैं उन्हें उस कक्षा के कई सब्जैक्ट्स को समझने में बहुत ज्यादा दिक्कत आती है।
ऐसा इसलिए है क्योंकि पिछली कक्षा में संबंधित विषय का ज्ञान वह विद्यार्थी पूरी तरह अर्जित नहीं कर पाया, जिस वजह से उसे उसी सबजैक्ट में बड़ी कक्षा में पहुंचने पर परेशानी का सामना करना पड़ता है। इसके समाधान के लिए शिक्षा विभाग ‘कैचअ‍ॅप’ प्रोग्राम लाया है जिसमें सरकारी स्कूल में पढ़ने वाले प्रत्येक कक्षा के विद्यार्थी को ‘स्किल पासबुक’ दी जाएगी।

Pay for Bicycle अलग ग्रुप रखेंगे खास ध्यान

स्किल पासबुक में हर विषय का कॉलम है, इसमें कक्षा का अध्यापक  विद्यार्थी के ज्ञान एवं स्किल के अनुसार संबंधित विषय पर आॅबजैक्टिव टिप्पणी करेगा। कैचअ‍ॅप कार्यक्रम में स्किल पासबुक के अनुसार विद्यार्थियों में जिस स्किल की कमी पाई जाएगी, उस विषय के विद्यार्थियों के गु्रप अलग बना कर उन पर स्पैशल ध्यान दिया जाएगा।

स्कूल तय करेंगे बच्चों की यूनिफोर्म

दास ने बताया कि पिछले वर्ष की तरह इस बार भी सरकार बच्चों को यूनिफार्म तय करने का अधिकार स्कूल मैनेजमेंट को दे रही है। इस योजना के तहत सरकार यूनिफोर्म का पैसा सीधे बच्चों के खातों में ट्रांसफर करेगी। दास के अनुसार बहुत से लोग ऐसे हैं जो प्राइवेट स्कूलों के ड्रैस कोड से प्रभावित होकर अपने बच्चों को वहां दाखिल करवाते हैं।

Pay for Bicycle साइकिल के लिए पैसे देखी सरकार

ऐसे में शिक्षा विभाग चाहता है कि प्रदेश के सरकारी स्कूलों में भी बच्चे अच्छी यूनिफोर्म पहन कर स्मॉर्ट दिखें, ताकि मां-बाप अपने बच्चों को सरकारी स्कूलों में भेजें। दास ने बताया कि सरकार ने फैसला किया है कि जिन लड़कियों का स्कूल घर से दूर है एवं जो कि साइकिल पर स्कूल जाती हैं।

उन्हें सरकार अब साइकिल नहीं देगी, बल्कि साइकिल के लिए पैसा देगी। दास ने कहा कि साइकिल वितरण में कभी-कभी देरी हो जाती है इसलिए सरकार चाहती है कि लड़कियों की पढ़ाई में कोई नुकसान न हो। इसलिए जल्दी साइकिल खरीदने के लिए सरकार लड़कियों के खातों में पैसा डालेगी। जिससे लड़कियां अपनी पसंद की साइकिल खरीद सकेंगी।

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