पंजाब

स्टेशनरी शॉप में लगी भयंकर आग

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शाह सतनाम जी ग्रीन एस वेलफेयर फोर्स विंग के सेवादारों ने पाया आग पर काबू

राएकोट(राम गोपाल )। रविवार सुबह 10 बजे के करीब स्थानीय मालेरकोटला रोड बाइपास पर स्थित ‘सिंगला बैग हाउस’, जो कि प्लास्टिक व स्टेशनरी का कारोबार बड़े स्तर पर करते हैं, की दुकान में आग लग गई, जिससे दुकान में रखा सारा सामान जलकर राख हो गया। आगजनी के बारे में जैसे ही शाह सतनाम जी ग्रीन एस वेलफेयर फोर्स विंंग के सेवादारों को पता लगा तो वे घटनास्थल पर पहुंच कर आग बुझाने में जुट गए।

दुकान मालिक दविन्दर कुमार सिंगला के भाई राकेश कुमार सिंगला ने बताया कि जब वह सुबह दुकान पर आए तो उनकी ओर से दुकान खोल कर बिजली का स्विच आॅन करने के थोड़ी देर बाद ही दुकान के अंदर से धुआं बाहर आने लगा। जब तक वह कुछ समझ पाते धुआं आग की लपटों में बदल गया। इसके बाद उन्होंने जगराओं फायर ब्रिगेड को फोन किया। देखत ही देखते आग तेज हो गई।

आगजनी से लाखों का नुकसान

आसपास के लोग व शाह सतनाम जी ग्रीन एस वेलफेयर फोर्स विंग के सेवादार टिंकू इन्सां, बिक्कर सिंह इन्सां, सेवक इन्सां, सुरजीत सिंह इन्सां, गग्गी इन्सां व अन्य उपस्थित लोगों ने अपने स्तर पर आग बुझाना शुरू कर दिया व स्थानीय मार्केट समिति का पानी का टैंकर भी पहुंच गया व लोग टैंकों में पानी लेकर आग को काबू करने में जुट गए। 40-45 मिनटों बाद नगर कौंसिल जगराआें व एयर फोर्स स्टेशन हलवारा की फायर बिग्रेड गाड़ियां पहुंच गई जिन्होंने आग पर काबू पाया।

दुकानदार राकेश कुमार सिंगला ने कहा कि उनका सब कुछ जल कर राख हो गया है व नुकसान का अंदाजा 30 -35 लाख तक का है। आग लगने संबंधी स्थानीय थाना सिटी के प्रमुख जरनैल सिंह ने कहा कि अब तक जो पता लगा है उससे लगता है कि यह आग बिजली के शॉर्ट-सर्किट कारण लगी है बाकी जांच चल रही है।

कौंसिल के प्रति रोष

रायकोट के लिए प्रदेश सरकार द्वारा मंजूर हुई फायर बिग्रेड की गाड़ी नगर कौंसिल द्वारा तैनात न किए के जाने के कारण घटनास्थल पर उपस्थित लोगों में भारी गुस्सा था। लोगों का कहना था कि अगर रायकोट में फायर बिग्रेड होती तो इस दुर्घटना के नुकसान से बचाया जा सकता था।

कौंसिल के पास साधनों की कमी: अधिकारी

इस संबंधी नगर कौंसिल के कार्यकारी अधिकारी बलबीर सिंह ने कहा कि नगर कौंसिल अपने वित्तीय हालात को देखते हुए फायर बिग्रेड रखने में समर्थ नहीं है। उन्होंने कहा कि इस गाड़ी के लिए अलग शिफ्टों के लिए कई कर्मचारियों की जरूरत है और इसका मासिक खर्च दो-सवा दो लाख के करीब होगा और नगर कौंसिल के पास ऐसे कोई वित्तीय साधन नहीं हैं।

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