सम्पादकीय

खुद मुसीबत को दावत दे रहे हैं किसान

Farmers, Trouble, Pollution

बेमौसमी बारिश, ओलावृष्टि, आंधी, तूफान व प्राकृतिक आपदाओं से तबाही का मंजर बन जाता है, लेकिन किसान खुद अपने हाथों से गेहूं के नाड़ को आग लगाकर मुसीबत को दावत दे रहे हैं। आग से केवल नाड़ ही नहीं जलता, बल्कि लाखों पेड़ भी आग की भेंट चढ़ जाते हैं, जो भविष्य में बारिश की कमी का कारण बनकर कृषि संकट को ही गहराएंगे। इस बार केवल हरियाणा में ही 22 लाख से अधिक वृक्ष जल गए हैं।

यदि उत्तरी भारत के सभी राज्यों की बात करें, तो यह संख्या करोड़ को पार कर जाएगी। पहले ही चहुं मार्गी सड़कों के निर्माण से करोड़ों वृक्ष काटे जा चुके हैं। यदि हालात यही रहे, तो प्रकृति के भयानक दृश्य देखने को मिलेंगे। गेहूं की नाड़ को आग लगाने के खिलाफ पंजाब प्रशासन काफी सख्त हुआ है।

किसानों के खिलाफ धड़ाधड़ मामले दर्ज हुए, जिस कारण किसानों व प्रशासन में टकराव का माहौल बन गया। किसानों को नाड़ जलाने की जिद छोड़कर इसके समाधान के लिए विचारात्मक मुहिम चलानी चाहिए। हालांकि किसानों का यह तर्क मजबूत है कि नाड़ को खेत में समेटने के लिए भारी खर्च करना पड़ता है, यदि किसान खेत में नाड़ समेटने के लिए सरकार से मुआवजा मांगने के लिए लड़ाई लड़े, तो इस बात का समर्थन समाज का हर वर्ग करेगा।

फिर भी जब तक खर्चा नहीं मिलता, तब तक किसान संगठन किसानों को भड़काने की बजाय, आग के जमीन और वातावरण पर पड़ने वाले बुरे प्रभाव पर गौर कर आग लगाने का रुझान बंद करें। फिर भी इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता कि नाड़ को आग लगाने में भूमि के नुक्सान के रूप में सबसे अधिक व सबसे पहले घाटा किसान को ही झेलना पड़ेगा।

किसान संगठन सरकारों पर ऐसे प्लांट बनाने के लिए दबाए बनाएं, जिनमें धान की पराली व गेहूं के नाड़ का प्रयोग किया जा सके। वैसे भी वैज्ञानिक तरक्की के मद्देनजर नाड़ व पराली को आग लगाने की समस्या का भी कुछ सालों तक स्थायी समाधान होने की उम्मीद है। किसी समय राइस शैलरों में चावलों का छिलका बड़ी समस्या होती थी। लाखों टन छिलके को आग ही लगाई जाती थी, जिसकी राख परेशानी का कारण बनती थी।

अब वही छिलका अच्छी कीमतों पर बिकता है। उम्मीद है पराली व नाड़ भी किसानों की आमदन का जरिया बनेगा। तब तक जमीन और वातावरण के लाभ के लिए किसानों को संयम से काम लेने की जरूरत है। सरकारें भी किसानों को राहत देने के लिए कोई न कोई हल निकाले।

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