पंजाब

किसानों ने बदली सोच, अब नहीं लगाएंगे गेहूं के नाड़ को आग

Wheat Remnants

Wheat Remnants तूड़ी बनाकर भंडारण करने में भी जुटे किसान

जलालाबाद (रजनीश)। क्षेत्र में वर्तमान समय के दौरान खेतों में खड़ी गेहंू की फसल की कटाई करने का कार्य जोर शोर के साथ शुरू हो चुका है। किसानों की ओर से अपनी अपनी गेहूं की फसल को कटाई करके संभालने के लिए दिन रात एक किया हुआ है ताकि गेहूं की फसल को जल्द से जल्द संभाला जा सके।

इस बार भी लगभग सारे किसान कंबाईन से गेहूं की कटाई करवा रहे हैं और गेहूं को बेचने के लिए समीप पड़ती मंडियों में ला रहे हैं ,वहीं इसके साथ ही किसान भाई गेहूं की फसल की कटाई करने के बाद बचे हुए नाड़ से पशुओं के लिए तूड़ी बनाने के लिए भी जुट गए हैं। अब आलम यह है कि किसान एक दूसरे से पहले तूड़ी बनाने के लिए उतावले हो गए हैं क्योंकि यही समय पर किसानों के लिए तूड़ी बनाने का समय है जो वर्ष भर पशुओं को डालनी है।

कंबाईनों को दे रहे हैं पहल Wheat Remnants

वर्णननीय है कि कुछ वर्ष पहले किसान गेहूं की कटाई हाथों से दातरी से की जाती थी और इसके बाद तूड़ी बनाई जाती थी इससे किसानों को अधिक समय भी लगता था और परेशानियों भी अधिक होती थी लेकिन बीते कुछ वर्षों से किसान गेहूं की कटाई का कार्य पूर जोर शोर से कंबाईनों से करवा रहे हैं। इस बार भी अधिकतर किसान भाई अपनी अपनी गेहूं की कटाई कंबाईन से करने के बाद इसके बाद गेहूं के बचे नाड़ से रीपर से तूड़ी बना रहा है।

Wheat Remnants पशुओं के लिए जुटा रहे तूड़ी

किसानों का कहना है कि तूड़ी का भंडार करना किसानों के लिए जरूरी है और किसान अधिक से अधिक तूड़ी बना रहे हैं। इसके अलावा मजदूर वर्ग को भी अपने घर रखे पशुओं के लिए भी तूड़ी किसानों से खरीद कर बना रहे हैं।

मजदूरों का कहना है कि उन्होंने भी अपने घरों में पशु रखे हुए हैं और इन पशुओं की सुविधा के लिए तुड़ी का भंडारण करके रखना जरूरी है। जिसके कारण वर्तमान समय के दौरान किसान तथा मजदूर तूूड़ी का भंडार करने के लिए जोर शोर से जुटे हुए हैं। ताकि तूड़ी अधिक से अधिक बनाई जाए और भविष्य में तूड़ी की किल्लत का सामना ना करना पड़े।

इस बारे में किसान बलजिंदर सिंह, नोता सिंह, सतनाम सिंह, मनदीप सिंह, जोगिंदर सिंह, मोहन सिंह, रेशम सिंह,मिल्खा सिंह, गुरदीप सिंह, बलवीर सिंह आदि ने जानकारी देते हुए बताया कि किसानों की ओर से अपने पशुधन के लिए तूड़ी का भंडार करना आति अनिवार्य है ताकि अब तूड़ी का भंडारण अधिक से अधिक किया जा सके।

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