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12वीं के बाद यहां मिलेगा रोजगार

  • 12वीं क्लास यानि आपकी स्कूल लाइफ का आखिरी साल।
  • आपकी किस विषय में रूचि है तो आपके लिए करियर चुनना आसन हो जायेगा।

जैसे ही आप इस क्लास को पास करते हैं आप रियल दुनिया की ओर एक कदम बढ़ा लेते हैं। लेकिन एक मुश्किल जो हर 12वीं पास करने वाले स्टूडेंट को झेलनी पड़ती है तो वो है बेहतर करियर के लिए डिग्री कोर्सेज आदि का चुनाव। आज हम आपको बताएंगे कि 12वीं के बाद क्या-क्या विकल्प होते हैं और आप किस तरह अपनी पसंदीदा फील्ड में करियर बना सकते हैं?

वैसे तो 12वीं के बाद कई करियर विकल्प (आप्शन) हमारे देश में उपलब्ध हैं लेकिन उनमें से आपको कौनसा चुनना है यह मुख्य होता है, इसके लिए यह जानना जरूरी है कि आपकी रूचि किस विषय में है, या किस काम को करके आपको अच्छा लगता है। जब आप एक बार यह जान जायेंगे कि आपकी किस विषय में रूचि है तो आपके लिए करियर चुनना आसन हो जायेगा।

तो आप जो भी करियर विकल्प चुने उसके पहले अपना खुद का (इंटरेस्ट) रूचि जरुर पता करें। जब आप 12वीं पास करके कॉलेज में जाते हैं तो वहां आपके सामने सबसे बड़ा सवाल होता है की आगे क्या करना है, सामान्यत: आर्ट के छात्र बीए, कॉमर्स के छात्र बीकॉम और विज्ञान के छात्र बीएससी आदि करते हैं किन्तु इसके अलावा भी बहुत से विकल्प हंै।

सेक्टरों में भी नौकरियों की भरमार

बदलते समय के साथ-साथ करियर बनाने के भी सेक्टर्स में बदलाव हो रहे हैं। मौजूदा हालत ऐसे नहीं रहे कि जिसमें पहले स्कूल और फिर कॉलेज की लंबी एजुकेशनल प्रोसेस से गुजरने के बाद ही करियर के बारे में सोचा जा सकता है। ऐसे में इंजिनियरिंग से लेकर मेडिकल, डिफेंस, टेक्नॉलजी और मीडिया जैसे तमाम क्षेत्रों में एचएससी (10+2) के बाद ही अवसर मिल जाते हैं।

शायद यही वजह है इंजिनियरिंग, मेडिकल, मैथ्स या फिर कला सभी विषयों का स्तर काफी ऊंचे रखे जाते हैं ताकि प्रतियोगी परीक्षाओं में भाग लेने वाले प्रतिभागी आसानी से उसे परीक्षा क्रैक कर सके। इसलिए इसमें भाग लेने की पात्रता 12वीं तय की गई हैं। यानी दूसरे शब्दों में कहें तो आईटी हो या मेडिकल, टेक्नॉलजी हो या फिर डिफेंस, सबके लिए बारहवीं पास होना अनिवार्य है।

दमदार है डिफेंस: साल में दो बार आयोजित होने वाली एनडीए परीक्षा को पास करने के बाद छात्र सेना के तीनों ही अंगों में बतौर आॅफिसर बन सकते हैं। एनडीए के अलावा नेवी, एयरफोर्स और कोस्ट गार्ड्स में भी टेक्निकल एवं नॉन-टेक्निकल कैटिगरी के लिए एचएससी पास कर जाया जा सकता है।

वकील: कॉमन लॉ ऐडमिशन यानी क्लैट टेस्ट पास कर छात्र वकालत में जा सकते हैं। क्लैट के जरिए ही आप 12वीं करने के बाद ही एलएलबी करने के योग्य हो जाते हैं। इस टेस्ट का उपयोग देश के 14 नैशनल लॉ स्कूलों और यूनिवर्सिटीज के अंतर्गत अंडर ग्रैजुएट एवं पीजी प्रोग्राम के लिए किया जाता है।

नैनो टेक्नॉलजी: नैनो टेक्नॉलजी में इन दिनों रिसर्च एवं डिवेलपमेंट का दायरा काफी बढ़ा है। मेडिकल, फामार्सूटिकल्स, इलेक्ट्रॉनिक्स, मैग्नेटिक्स, केमिकल, अडंवास मटीरियल और उत्पादन जैसे क्षेत्रों में नैनो टेक्नॉलजी की डिमांड बढ़ी है, जिसके लिए बारहवीं के बाद यहां जाया जा सकता है।

करियर बनाना है तो आपके लिए अहम है मई-जून

करियर बनाने के लिहाज से मई-जून का महीना बेहद अहम माना जाता है। इन दो महीनों में जहां एसएससी, एचएससी, सीबीएसई, आईसीएसई, आईएससी और यूपीएसई एवं आईआईटी एग्जाम्स के रिजल्ट घोषित होते हैं।

वहीं, दूसरी ओर राज्य स्तर पर एफवाईजेसी, डिग्री, वोकेशनल और टेक्निकल कोर्सेज के लिए भी ऐडमिशन प्रोसेस शुरू होने के अलावे प्रतियोगी परीक्षाओं के दरवाजे खुल जाते हैं। जिनमें प्रवेश लेने की पात्रता बारहवीं के बाद से ही शुरू होती है।

इसलिए करियर एवं फ्यूचर के लिहाज से काफी अहम है 10+2 यानी एचएससी पास करना और इसके बाद ही विभिन्न क्षेत्रों में अवसर खुलते हैं।

कॉमर्स के स्टूडेंट यहां बनाएं करियर

यह हैं वो विभिन्न कोर्सेज जो कॉमर्स छात्रों के लिए होते है जिसमें कॉमर्स के स्टूडेंट अपना करियर बना सकते हैं।

एमबीए (टइअ) : एमबीए मे करियर बनाने के लिए जरुरी है कि 12वीं के बाद स्नातक किसी भी विषय से होना चाहिए एमबीए 2 साल का स्नातकोत्तर कोर्स है जिसमे की 6 महीने की इंटर्नशिप ट्रेनिंग भी होती है जिसमे की आपको प्रोजेक्ट रिपोर्ट भी बनानी पड़ती है

सीए: सीए कॉमर्स के छात्रों के लिए सबसे बड़ा और अच्छा विकल्प होता है क्योंकि ये कोर्स बहुत कठिन पाठ्यक्रम और लंबी अवधि के साथ होता है जिस कोर्स की तैयारी आप 12वीं के बाद से कर सकते हंै जिसमें आपको कॉमन प्रोफिसिएंस टेस्ट (उढळ) को पास करना जरुरी है।

बीकॉम-एकाउंटिंग एंड फाइनांस भी है बेहत्तर

कॉमर्स स्ट्रीम बैचलर आॅफ कॉमर्स (बीकॉम): 12वीं के बाद कॉमर्स में तीन साल का ग्रेजुएशन करना चाहते हैं तो बीकॉम एक अच्छा आॅप्शन है। इस डिग्री की मदद से आप अकाउंटिंग फाइनांस, आॅपरेशंस, टेक्सेशन और दूसरे कई फील्ड्स में अपना करियर बना सकते हैं।

बीकॉम में स्टूडेट्स को गुड्स अकाउंटिंग, अकाउंट्स, प्रोफिट एंड लॉस और कंपनी कानून की जानकारी दी जाती है। बीकॉम एक तरह से आपके करियर का पहला स्टेप है।

बैचलर आॅफ कॉमर्स (आॅनर्स): अक्सर स्टूडेंट्स बैचलर आॅफ कॉमर्स (आॅनर्स) और बैचलर आॅफ कॉमर्स में अंतर नहीं कर पाते। दरअसल, बीकॉम आॅनर्स तीन साल का डिग्री प्रोग्राम है जिसमें कुल मिलाकर 40 विषय होते हैं। स्टूडेंट्स को इन विषयों के अलावा एक विषय में स्पेशलाइजेशन भी कराया जाता है।

स्पेशलाइजेशन के लिए स्टूडेंट्स मार्केटिंग मैनेजमेंट, अकाउंटिंग और फाइनांशियल मैनेजमेंट, इंटरनेशनल ट्रेड एंड फाइनांस, ई कॉमर्स, बैंकिंग या ह्यूमन एंड रिसोर्स मैनेजमेंट में से किसी एक विषय चुन सकते हैं। बैचलर आॅफ कॉमर्स में सब्जेक्ट्स आॅनर्स की तुलना में कम डिटेल में पढ़ाए जाते हैं।

बीकॉम-एकाउंटिंग एंड फाइनांस: बैचलर आॅफ कॉमर्स इन अकाउंटिंग एंड फाइनांस 12वीं के बाद किया जाने वाला तीन साल का डिग्री प्रोग्राम है। इस कोर्स के बाद अकाउंट्स और फाइनांस में करियर के मौके काफी होते हैं।

शुरूआती दिनों में बतौर ट्रेनी अकाउंटेंट काम किया जा सकता है। इस प्रोग्राम में अकाउंट्स, फाइनांस, टेक्सेशन के करीब 39 विषय पढ़ाए जाते हैं। इस डिग्री प्रोग्राम में फाइनांशियल नॉलेज पर ज्यादा फोकस किया जाता है।

बीकॉम-बैंकिंग एंड इंश्योरेंस: बैचलर आॅफ कॉमर्स (बैंकिंग एंड इंश्योरेंस) एकेडमिक और प्रोफेशनल डिग्री दोनों है। इस प्रोग्राम में अकाउंटिंग, बैंकिंग, इंश्योरेंस लॉ, बैंकिंग लॉ और इंश्योरेंस रिस्क कवर की जानकारी दी जाती है। इस डिग्री में बैंकिंग और इंश्योरेंस इंडस्ट्री में कवर होने वाले टॉपिक्स और विषयों की सिस्टमेटिक स्टडी कराई जाती है।

इस कोर्स में 38 विषय होते है

इसके अलावा बैंकिंग और इंश्योरेंस से जुड़े 2 प्रोजेक्ट भी हैं। इस कोर्स को करने के बाद स्टूडेंट्स एमकॉम, एमबीए, सीएफए जैसे हायर एजुकेशन वाले कोर्सेज कर सकते हैं। यही नहीं गवर्मेंट और प्राइवेट सेक्टर में आॅडिटिंग, अकाउंटेंसी, बैंकिंग, फाइनांस की फील्ड में नौकरी के लिए भी एप्लाई किया जा सकता है।

कॉस्ट एंड वर्क अकाउंटेंट : कॉस्ट अकाउंटेंसी सीए से मिलता-जुलता कोर्स है। द इंस्टीट्यूट आॅफ कॉस्ट एंड वर्क्स अकाउंटेंट आॅफ इंडिया कॉस्ट अकाउंटेंसी का कोर्स कराता है। 12वीं के बाद भी स्टूडेंट्स यह कोर्स कर सकते हैं।

इसके लिए 12वीं पास स्टूडेंट्स को पहले फाउंडेशन कोर्स करना होता है। कोर्स पूरा करने के बाद स्टूडेंट्स को कॉस्ट अकाउंटेंट और इससे जुडे़ पदों पर काम करने का मौका मिलता है। इसके लिए द इंस्टीट्यूट आॅफ कॉस्ट एंड वर्क अकाउंटेंट्स आॅफ इंडिया में आवेदन करना होता है।

मेडिकल में प्रवेश: बारहवीं के बाद स्टूडेंट्स मेडिकल के क्षेत्र में बहुत कुछ कर सकते हैं। इस क्षेत्र में खुद को स्थापित करने के लिए एमएचटी-सीईटी और नीट के जरिए एमबीबीएस एवं बीडीएस डॉक्टर बनने का ख्वाब पूरा कर सकते हैं। नीट का आयोजन केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) करती है। हालांकि, इस पर विवाद कायम है।

बीकॉम- फाइनांशियल मार्केट्स: बैचलर आॅफ कॉमर्स इन फाइनांशियल मार्केट्स में फाइनांस, इंवेस्टमेंट्स, स्टॉक मार्केट, कैपिटल, म्यूचल फंड के बारे में जानकारी दी जाती है। इस प्रोग्राम में 6 सेमेस्टर होते हैं और कुल 41 विषयों की पढ़ाई की जाती है। इस डिग्री को हासिल करने के बाद ट्रेनी एसोसिएट, फाइनांस आॅफिसर, फाइनांस कंट्रोलर, फाइनांस प्लानर, रिस्क मैनेजमेंट, मनी मार्केट डीलर इंश्योरेंस मैनेजर की नौकरी मिल सकती है।

चार्टर्ड अकाउंटेंट : द इंस्टीट्यूट आॅफ चार्टर्ड अकाउंटेंट आॅफ इंडिया (आईसीएआई) चार्टर्ड अकाउंटेंट का कोर्स कराता है। सीए में करियर बनाने के लिए इसकी शुरूआत कॉमन प्रोफिसिएंसी टेस्ट से होती है, जिसे पास करने के बाद ही छात्र अपने लक्ष्य के पहले पड़ाव को पार कर दूसरे पड़ाव पर पहुंच सकता है।

इसमें चार विषयों जैसे अकाउंटिंग, मकेर्टाइल लॉ, जनरल इकोनॉमिक्स एवं क्वांटिटेटिव एप्टीट्यूड को शामिल किया जाता है। मान्यता प्राप्त बोर्ड से कॉर्मस स्ट्रीम में 12वीं पास करने के बाद कोई भी स्टूडेंट्स सीए में करियर बना सकते हैं। कई बार स्टूडेंट्स सीए की दौड़ में भाग लेने के लिए अपनी शुरूआत ग्रेजुएशन के बाद भी करते हैं।

लेकिन सीए कोर्स की लंबी अवधि के कारण सीए की शुरूआत का सही समय 12वीं पास करने के बाद का ही होता है। सीए की तैयारी के लिए छात्रों को पहले अकाउंटिग में मजबूत पकड़ बनानी चाहिए। स्टूडेंट्स में मैनेजमेंट और फाइनेंशियल क्षेत्र में एक्सपर्ट नॉलेज के साथ एक्सपर्ट व्यू का होना बहुत जरूरी है।

कंपनी सेक्रेटरी : इंस्टीट्यूट आॅफ कंपनी सेक्रेटरीज आॅफ इंडिया (आईसीएसआइ) देश में कंपनी सेक्रेटरी प्रोग्राम चलाता है। साइंस, कॉमर्स और आॅर्ट्स, जिसमें फाइन आर्ट्स शामिल न हो, में 12वीं के बाद कंपनी सेक्रेटरी कोर्से के लिए आवेदन कर सकते हैं।

इसके तीन चरण हैं

फाउंडेशन (आठ महीने), एग्जिक्यूटिव और प्रोफेशनल. फाइन आर्ट्स को छोड़कर किसी भी स्ट्रीम में ग्रेजुएट उम्मीदवार का कोर्स कर सकते हैं. ग्रेजुएट उम्मीदवारों को आठ महीने के फाउंडेशन कोर्स से छूट होती है

और उन्हें सीधे दूसरे चरण में एडमिशन मिल जाता है। एग्जिक्यूटिव और प्रोफेशनल कोर्स करने के बाद एक कंपनी या किसी अनुभवी या प्रैक्टिस कर रहे कंपनी सेक्रेटरी के साथ 16 महीने की ट्रेनिंग करना अनिवार्य होता है। प्रोफेशनल कोर्स और ट्रेनिंग के बाद आईसीएसआई के एसोसिएट सदस्य बन जाते हैं।

सूचना प्रौद्यौगिकी: इन दिनों साइंस स्ट्रीम के स्टूडेंट्स के लिए सूचना प्रौद्यौगिकी (आईटी) मुख्य पसंद बन गया है। बढ़ती आईटी प्रोफेशनल की मांग के कारण इस क्षेत्र में करियर की अपार संभावनाएं हैं। बीसीए और एमसीए कर इस क्षेत्र में करियर बनाया जा सकता है।

 

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