सम्पादकीय

सबके लिए बिजली एक कठिन लक्ष्य

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सरकार ने अगले वर्ष मई तक देश में हर घर में बिजली पहुंचाने का लक्ष्य रखा है। यद्यपि यह लक्ष्य बहुत अच्छा है किंतु प्राप्त करना कठिन है। जैसा कि राष्ट्रपति मुखर्जी ने हाल ही में कोलकाता में कहा कि देश में अभी भी 30 करोड़ लोग बिजली से वंचित हैं। यद्यपि इस दिशा में कार्य सही दिशा में आगे बढ़ रहा है, किंतु इस लक्ष्य को पूरा करने में एक वर्ष और लग सकता है।

यदि यह लक्ष्य पूरा होता है, तो मोदी सरकार की यह बड़ी उपलब्धि होगी और देश एक नए युग में प्रवेश करेगा। तथपि देश के कुछ हिस्सों में प्रत्येक घर में कम से कम 4 घंटे बिजली की आपूर्ति करने में कुछ और समय लग सकता है। वस्तुत: शिक्षा के विस्तार के साथ बिजली की आपूर्ति आवश्यक है तथा गांवों में आवासीय स्थानों में लघु उद्योग इकाइयों के लिए भी बिजली की आपूर्ति आवश्यक है।

संप्रग सरकार के दौरान यह कहा गया था कि परमाणु ऊर्जा की लागत अढ़ाई रूपए प्रति यूनिट से अधिक नहीं आएगी, किंतु हाल ही मे कुंदनकुलम में रूस के साथ दो परमाणु रिएक्टरों में बिजली की दरों के लिए 3, 4 और 6.50 रूपए प्रति यूनिट की दर पर वार्ता हुई है। अरेवा के नए रिएक्टर में बिजली की लागत 7 रूपए प्रति यूनिट से कम नहीं होगी,

जो सौर ऊर्जा की 3 और 3.50 रूपए प्रति यूनिट से बहुत अधिक है और अगले वर्ष तक इसकी 2.50 रूपए प्रति यूनिट आने की संभावना है। राजस्थान के बाडला सोलर पार्क में बिजली की लागत 2.44 रूपए प्रति यूनिट है। सौर ऊर्जा सूर्य पर निर्भर है और सूर्य की रोशनी लगभग 12 घंटे उपलब्ध रहती है। इसलिए सौर ऊर्जा उत्पादन में बीच में बाधा आ सकती है तथापि कम लागत वाली नीतियों और प्रौद्योगिकी में सुधार से भविष्य के लिए ग्रिड में सुधार हो सकता है।

नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय की एक रिपोर्ट के अनुसार अप्रैल 2016 और मार्च 2017 के बीच सौर ऊर्जा उत्पादन में 5.5 गीगा वाट की वृद्धि हुई है और इसके लिए वर्ष 2022 तक 100 गीगावाट का लक्ष्य रखा गया है। सौर ऊर्जा क्रांति में अभी वक्त लगेगा, तथापि केरल में मेट्रो को देखते हुए लगता है, आगामी एक दशक में इसमें सुधार होगा। हालांकि 2022 तक 100 गीगावाट सौर ऊर्जा के उत्पादन का लक्ष्य प्राप्त करना कठिन है। इस दिशा में राज्यों द्वारा ठोस कदम उठाए जाने चाहिए। छतों पर सौर ऊर्जा संयंत्र लगाने की गति बहुत धीमी है। एक आकलन के अनुसार 2022 तक 40 गीगावाट सौर ऊर्जा उत्पादन का लक्ष्य प्राप्त किया जाएगा।

नवीकरणीय ऊर्जा का युग शुरू हो गया है और गांवों में अब मध्यम स्तरीय सौर ऊर्जा संयंत्र लगाएं जाएंगे, जो लागत प्रभावी होंगे। अपार्टमेंटों में छतों पर सौर ऊर्जा उत्पादन से उनकी 40-50 प्रतिशत बिजली की आपूति हो सकती है। सरकार रूकी हुई जल विद्युत परियाजनाओं को पुन: शुरू करने का प्रयास कर रही है और वर्ष 2022 तक पवन ऊर्जा का उत्पादन 60 गीगावाट रखने का लक्ष्य रखा गया है,

जबकि देश में बिजली की नियमित आपूर्ति के लिए भारी निवेश की आवश्यकता है तथा वर्तमान में आवंटित संसाधन इसके लिए पर्याप्त नहीं हैं। विद्युत की मांग में प्रति वर्ष 8 से 9 प्रतिशत की वृद्धि हो रही है, जबकि उत्पादन में लगभग 3 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। भारत ने यह आश्वासन दिया है कि यदि उसे पर्याप्त वित्तीय और प्रौद्यागिकी सहायता मिलती रहे तो वह गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित विद्युत उत्पादन के लक्ष्य को पूरा कर देगा किंतु अमरीका द्वारा पेरिस समझौते से अलग होने के कारण इसकी संभावना कम है।

किसी भी राष्ट्र का विकास तब तेजी से होता है जब उसके सभी नागरिकों को बिजली उपलब्ध हो। बिजली की उपलब्धता से शिक्षा का विस्तार होता है और निचले स्तर पर उद्यमों का विकास होता है। बिजली से राष्ट्र का सशक्तीकरण होत है इसलिए इस दिशा में सरकार के प्रयास प्रशसंनीय है तथापि लागत को ध्यान में रखते हुए संसाधनों का चयन किया जाना चाहिए क्योंकि भारत में आज भी 55 प्रतिशत जनसंख्या गरीब और आर्थिक रूप से कमजोर है और उसे रियायती दर पर बिजली उपलब्ध करानी होगी। बिना इसके काम नहीं चलेगा।

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