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सम्पादकीय

नशेड़ी, नशा तस्कर एवं राजनीति

Strict Action, Drug Smuggling, Government, Terrorism

चुनाव से पूर्व वादे करना, चुनाव जीतकर उन्हें पूरा नहीं करना भारतीय राजनीति का खास चेहरा हो गए हैं। पंजाब इस वक्त देश में नशेड़ियों, नशा तस्करों के चलते पूरी तरह से बदनाम है। यहां तक कि पंजाब की नशे की समस्या पर कई फिल्म, धारावाहिक, समाचार पत्रों, टीवी चैनलों पर अनेका-अनेक समाचार, लेख, स्टोरीज व बहस हो चुकी है।

‘उड़ता पंजाब’ नाम की एक फिल्म ने इस विषय पर तहलका मचा दिया था, जिसे लेकर तत्कालीन अकाली सरकार भी काफी तनाव में आ गई थी। तब सरकार ने कठोर निर्णय लिए एंव नशेड़ियों को जेलों में डालना शुरू कर दिया, इस पर तब विपक्ष में बैठी कांग्रेस के नेता कैप्टन अमरेंद्र सिंह ने सरकार की आलोचना की थी कि सरकार पीड़ितों को ही जेल में बंद कर रही है, जबकि तस्कर पकड़े जाने चाहिए। कैप्टन अमरेंद्र सिंह ने नशा करने वालों को तब पहली बार पीड़ित कहकर पुकारा था।

लेकिन अब पंजाब में सरकार बदल चुकी है एवं कैप्टन अमरेंद्र सिंह मुख्यमंत्री हैं, परंतु नशेड़ियों के साथ व्यवहार पुराना ही है। अभी भी जो लोग पकड़े जा रहे हैं, उनमें तस्कर कम हैं, नशेड़ी ज्यादा हैं। दरअसल स्मैक, हेरोईन, गांजा का नशा सीमा पार से भारत में बड़े-बड़े पैकेटस में सप्लाई हो रहा है। लेकिन जो लोग पकड़े जा रहे हैं उनसे बरामद होने वाले नशे की मात्रा कुछ पुड़िया या ग्राम में ही होती हैं। जोकि वास्तव में नशेड़ी लोग हैं और अपने नशे की पूर्ति के लिए वह थोड़ा-थोड़ा नशा आगे बेचते भी हैं।

अब सवाल यह है कि जो लोग सीमा पार से नशों की खेप हासिल कर रहे हैं, उन्हें कब पकड़ा जाना है? प्रदेश के सीमावर्ती जिलों की कई जेलों में कैदियों से आज भी नशे की मात्रा पकड़ी जा रही है, परंतु जेल के भीतर नशा सप्लाई करने वाले हाथ कहां हैं? इस प्रश्न का जवाब प्रदेश के आला पुलिस अधिकारियों के पास भी नहीं है। जोकि आये दिन इन जेलों का दौरा करते हैं।

अकाली दल की सरकार के वक्त कांग्रेस के राष्टÑीय उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने एक प्रैसवार्ता में दावा किया था कि पंजाब के 70 प्रतिशत युवा नशे की गिरफ्त में हैं। लेकिन आज भी पंजाब के नशामुक्ति केन्द्र खाली पड़े हैं। कहीं-कहीं नशा केन्द्रों में छिटपुट नशा पीड़ित भर्ती हैं। ऐसे में लाखों की संख्या में नशेड़ी किधर गए? सरकार के पास उनकी कोई गिनती नहीं है।

कांग्रेस ने सरकार की बागडोर संभालते ही प्रदेश में धार्मिक स्थानों से, सार्वजनिक स्थानों से, आमजन की बैठकें कर अधिकारियों, विधायकों, मंत्रियों ने चेतावनी दी थी कि कोई भी व्यक्ति नशा नहीं बेचे और कोई भी राजनेता या अफसर नशा बेचने वालों का संरक्षण नहीं करेगा। बावजूद इन चेतावनियों के अभी भी प्रदेश में नशा बिक रहा है।

नशे की पहुंच नशेड़ियों तक आसानी से हो रही है, कैसे? यहां एक बात स्पष्ट है कि पंजाब में सरकार अभी भी नशा तस्करों एवं उन्हें संरक्षण दे रहे अधिकारियों एवं नेताओं के गठबंधन या माफिया को तोड़ नहीं सकी है।

सरकार नशा माफिया के विरूद्ध अभियान अवश्य चला रही है, परंतु उसकी रफ्तार ढीली है। सरकार का आक्रोश नशा तस्करों के विरूद्ध ढीला पड़ रहा है। तभी तो इक्का-दुक्का पुलिस अफसरों व छोटे-मोटे तस्करों की धरपकड़ हो पाई है। बड़ी मछलियां अभी भी सरकार की पकड़ से बाहर होकर तस्करी के इस कारोबार में गोते लगा रही हैं।

पंजाब सरकार को पुन: अपने जोश एवं दृढ़ता को इकट्ठा करना होगा और नशे माफिया के विरूद्ध कार्रवाई को तेज करना होगा। जहां तक नशेड़ियों का प्रश्न है, तब उनके लिए नशामुक्ति केन्द्रों में चिकित्सकों की तैनाती, दवाएं एवं सुविधाओं का तत्काल प्रबंध किया जाए। कम मात्रा वाले तस्करों को पहले नशा मुक्ति केन्द्र में भर्ती किया जाए, तत्पश्चात उन्हें उनके अपराध के लिए जेल भेजा जाए।

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