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डेंगू को लेकर जिला अस्पताल में विरोधाभास

रुद्रपुर (सकब)। महानगर व ग्रामीण क्षेत्र में डेंगू जबरदस्त तरीके से फैला है। जिला अस्पताल में डेंगू के लक्षण मिलने पर भी रोगी और उसके तीमारदार को धोखे में रखा जाता है। वायरल फीवर बताकर इलाज किया जा रहा है। वसुंधरा दीप ने डेंगू बुखार को लेकर जिला अस्पताल के फिजीशियन, पैथोलॉजिस्ट सहित अन्य चिकित्सकों व चिकित्साकर्मियों से बात की तो विरोधाभास सामने आया। जिला अस्पताल के फिजीशियन डा.एमके तिवारी ने शुक्रवार को खेड़ा निवासी गुलबशा पुत्री लईक अहमद को डेंगू की पुष्टि कर उस वक्त सुशीला तिवारी अस्पताल के लिए रैफर किया जब उसकी प्लेटलेट्स 28 हजार रह गई। गुलबशा के भाई नाजिम का कहना है कि उनके मोहल्ले में बड़ी संख्या में डेंगू से पीड़ित रोगी हैं। जबकि गोटिया और रम्पुरा में ज्यादातर घरों में डेंगू संभावित रोगी है। उनका कहना है कि जिला अस्पताल में वीरवार की रात इलाज में लापरवाही बरते जाने पर डेंगू पीड़ित रोगियों के तीमारदारों ने हंगामा किया। इसके बाद उसकी बहन को सुशीला तिवारी अस्पताल रैफर कर दिया।डेंगू रोगियों को लेकर जिला अस्पताल में चिकित्सकों और चिकित्साकर्मियों में विरोधाभास है। फिजीशियन डा.एमके तिवारी का कहना है कि वायरल फीवर के ज्यादा रोगी हैं। उन्होंने दावा किया कि वायरल फीवर में भी रोगियों के शरीर में दर्द, शरीर पर चाल चकते पड़ रहे हैं, लेकिन इसे वह डेंगू का लक्षण नहीं मानते हैं। उन्होंने कहा कि वायरल फीवर में भी प्लेटलेट्स कम हो जाती हैं। हालांकि जिला अस्पताल के डेंगू वार्ड में इस समय छह रोगी भर्ती हैं। उधर वार्ड पफुल हो जाने के बाद डेंगू रोगियों को जिला अस्पताल में भर्ती ही नहीं किया जा रहा है। डेंगू की जांच करने वाले पैथोलाजिस्ट डा. एएम शर्मा का कहना है कि जिला अस्पताल में छह चिकित्सक डेंगू की जांच के लिए रोगियों को भेज रहे हैं। रोजाना कम से कम 25 से 30 जांच की जा रही हैं। इनमें कभी तो दस से 12 रोगियों में प्लेटलेट्स कम मिलती है, लेकिन कभी कभी किसी रोगी में डेंगू के लक्षण नहीं होते। दरअसल चिकित्सा विभाग डेंगू से लड़ने की बजाये इसे छिपाने की कोशिश में लगा है।

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