पंजाब

नजदीकी क्षेत्रों में बड़े स्तर पर हो रही वृक्षों की कटाई

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रोड पर वृक्षों की कटाई बिना किसी रोक टोक के जारी

संगरूर/चीमा मंडी। सुनाम से चीमा रोड पर पहले ही सड़क बनाते समय पर हजारों की संख्या में वृक्षों की कटाई हो चुकी है परंतु अब सड़क बन कर तैयार भी हो गई है व कटे वृक्षों की भरपाई के लिए नये पेड़ लगाने का समय था परन्तु नये पेड़ लगाने की बजाय आज भी इस रोड पर वृक्षों की कटाई बिना किसी रोक टोक के जारी है जो कि सरकार के तंदरुस्त पंजाब और वातावरण दिवस के कार्यक्रमों की खिल्ली उड़ा रहे हैं।

तंदरुस्त इन्सान व पंजाब के लिए पानी और वृक्ष ही मुख्य स्रोत

इस संबंधी बुद्धिजीवियों का कहना है कि एक तंदरुस्त इन्सान व पंजाब के लिए पानी और वृक्ष ही मुख्य स्रोत हैं इनको लालची मानव ने खत्म करने की कसम खाई हुई है। पानी व वृक्ष जीवन की रेखा हैं परंतु यह दुख की बात है कि मानवीय समाज दोनों प्रति ही गैर जिम्मेदार रवैया अपना रहा है। पंजाब में तो वृक्षों को दुश्मनों की तरह काटा जा रहा है। वृक्षों की अंधाधुन्ध कटाई के कारण वातावरण पर बहुत ही बुरा प्रभाव डाल रहा है।

एक अनुमान मुताबिक पंजाब में पिछले पांच वर्षाें दौरान सिर्फ सरकारी विभागों द्वारा 9 लाख पेड़ काटे जा चुके हैं, निजी स्तर पर लोगों द्वारा वृक्षों की कटाई इस से अलग है। चिंता वाली बात तो यह है कि इतनी बड़ी संख्या में वृक्षों के काटे जाने के बावजूद इस संख्या में नये पेड़ नहीं लगाए गए।

वृक्षों की कटाई का नहीं लिया जा रहा कोई नोटिस

कथित विकास कामों की भेंट चढ़ रहे इन वृक्षों की कटाई का कोई नोटिस भी नहीं लिया जा रहा। विकास कार्यों के नाम पर इतनी बड़ी संख्या में वृक्षों का काटा जाना मानवीय अस्तित्व के लिए ही खतरा पैदा करने के तुल है जो कि पंजाबियों के लिए चिंता का विषय होना चाहिए।

इस संबंधी सर्व सांझा विचार मंच के अध्यक्ष मक्खण सिंह शाहपुर ने कहा कि समय की सरकारें वृक्षों की कटाई की तरफ बिल्कुल नहीं ध्यान दे रही व न ही वन विभाग कोई कार्रवाई कर रहा है, बड़े राज मार्गों के पेड़ विकास की भेंट चढ़ गए और गांवों की लिंक सड़कों पर अब पेड़ कम दिखाई देते हैं व बिजली वाले पोल अधिक परंतु सरकार व संबंधित विभाग कुंभकरनी नींद में डूबा पड़ा है। जब इस संबंधी जिला वन अधिकारी के साथ संपर्क करने की कोशिश की परन्तु उनके साथ संपर्क नहीं हो पाया।

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