सम्पादकीय

बढ़ रहा साईबर आतंकवाद का खतरा

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विश्व भर में कंप्यूटरों का नेटवर्क ठप्प कर साईबर अपराधियों ने यह सिद्ध कर दिया है कि वह बम मिसाइलों के बिना भी विकास की राह में बड़ी रुकावट खड़ी कर सकते हैं। यदि यह तकनीकी कौशल आईएसआईएस व अन्य आतंकवादी गिरोहों के हाथ लग गया तो अमेरिका जैसे शक्तिशाली राष्टÑ भी कमजोर और बेबस पड़ जाएंगे।

यह स्पष्ट है कि आतंकवाद का मुकाबला करने के लिए सूचना तकनीकी सबसे कारगर हथियार है, लेकिन यदि आतंकवादी ही साइबर अपराधों के माध्यम से सूचना तकनीकी को तोड़ने में सफल हो गए, तब विश्व की शांति बुरी तरह से भंग हो सकती है। अभी तक रेन्समवेयर बानाक्राई साईबर हमले को आर्थिक हमले के तौर पर देखा जा रहा है।

साईबर अपराधी कंप्यूटर का डाटा चोरी कर लेते हैं और इसे वापिस करने के एवज में फिरौती मांगते हैं, लेकिन साईबर हमले का यह प्रयोग आतंकवाद फैलाने के लिए होने लगा, तब यह बेहद खतरनाक साबित होगा। मिसाल के तौर पर आतंकवादी किसी बड़े हमले की तैयारी कर रहे हों, तब उसकी सूचना इंटरनेट के माध्यम से कुछ सैकिंडों में ही हजारों किलोमीटर दूर पहुंच जाती है।

यदि आतंकवादी हमले से पहले साईबर अटैक करने में सफल हो जाएं, तब सेना होने के बावजूद आतंकवादी बड़ी क्षति पहुंचा सकते हैं। यूं भी रक्षा तकनीकी ही आज रक्षा प्रबंधों का सबसे बड़ा आधार है। राडार प्रणाली व सैटेलाइट से जुड़े धरती पर काम कर रहे कंप्यूटरों में किसी तरह का तकनीकी हमला भी बड़े नुक्सान का कारण बन सकता है।

दूसरी ओर अमेरिका की खुफिया एजेंसी हाल ही के इस साईबर अटैक के लिए उत्तरी कोरिया की तरफ ईशारा कर रही है। यदि यह सच में उत्तरी कोरिया की हरकत हुई, तब इसके बुरे परिणामों से इंकार करना कठिन है। उत्तरी कोरिया के शासक अहंकारी व सनकी किस्म के नेता हैं, जिन्हें अमेरिका के नाम से चिढ़ है।

जो नेता अपने एक मंत्री को केवल उबासी लेने पर उसकी हत्या का फरमान सुना दे, तब उसके हाथ परमाणु बम होने के साथ-साथ साईबर हमले की ताकत आ जाए, तो इससे ज्यादा अनर्थ वाली बात भला और क्या होगी। आईएसआई, तालिबान व अन्य अमेरिका विरोधी आतंकवादी ताकतें यदि उत्तरी कोरिया से गठजोड़ कर लेती हैं,

तब जंग की भयानकता व तबाही का अंदाजा लगाना कठिन हो जाएगा। दुनिया भर के वैज्ञानिकों व अमन पसंद देशों को सुरक्षा के प्रयासों में तेजी लानी होगी, क्योंकि तकनीक का सभ्य प्रयोग जितना फलदायक है, इसका दुरुपयोग उससे कई गुणा अधिक खतरनाक है। नि:संदेह साईबर हमले आतंकवाद का नया रूप हैं।

 

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