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आओ देश के शहीदों के सपनों को साकार करें

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इतिहास इस बात का साक्षी है कि इस धरती पर विदेशी लुटेरे बनकर आए और यहां से जो चाहा लूटकर ले गए। भारत की पवित्र भूमि ने जहां एक ओर शूरवीर एवं साहसी राजाओं को जन्म दिया, वहीं दूसरी और यहां एक से एक शूरवीर योद्धा और सैनिक पैदा हुए हैं। यहां पर न केवल पुरुष अपितु महिला नेत्री भी रही हैं।

भारत पर अनेक वर्षों तक बाहर के लोगों ने आकर राज किया

यदि हम इतिहास पर दृष्टिपात करें, तो पाते हैं कि भारत की भूमि, सम्पदा, प्राकृतिक सौंदर्य और यहां तक कि भारत की नारी जाति पर भी आक्रमण हुए हैं। भारत पर अनेक वर्षों तक बाहर के लोगों ने आकर राज किया है और इन सबका कारण कहीं न कहीं आपसी फूट और एक-दूसरे के प्रति ईर्ष्या रही है। घर के भेदी ने ही अपने देश को क्षति पहुंचाने वाले शत्रुओं के साथ मित्रता कर उन्हें राज करने के योग्य बनाया है। हमारे देश पर वर्षों तक अफगानों, मुगलों और फिर अंग्रेजों ने राज किया है।

इस धरती के सच्चे रक्षक भारत माता के सच्चे वीर सपूत महाराणा प्रताप, पृथ्वी राज चौहान, छत्रपति शिवाजी, दशवें पातशाह गुरु गोबिंद सिंह जी ने अपने बलिदान देकर भी भारत की संस्कृति एवं देश की रक्षा करने में पूरा जोर लगाकर ये सिद्ध कर दिया कि भारत जहां एक ओर आगंतुकों को मान सम्मान और सहारा देने के लिए जगत प्रसिद्ध है, वहीं दूसरी ओर कुदृष्टि रखने वालों की आंख भी नोंच सकता है।

हिंदुस्तानी देश की आन बान और शान के लिए हंसते हंसते अपना बलिदान दे सकता है

16वीं शताब्दी में जब अंग्रेज भारत में व्यापारी बनकर आये तो उन्होंने भारत को खूब लूटा और देश के अंदर एक दूसरे के प्रति लड़ाई और नफरत की ऐसी आंधी चलाई कि देश के अनेक राजाओं के राज छीन लिए गए, उन्हें दत्तक पुत्र गोद लेने से रोका गया और उनके राज्य पर अपना स्वामित्व स्थापित कर पूरे भारत पर राज किया। जब अंग्रेजों ने हिंदुओं को गोमांस से बने कारतूस चलाने को मजबूर किया तब पहली बार 1857 की क्रांति का आगाज हुआ और अकेले मंगल पांडे ने अंग्रेजो से टक्कर लेकर यह सिद्ध कर दिया कि एक हिंदुस्तानी देश की आन बान और शान के लिए हंसते हंसते अपना बलिदान दे सकता है।

इसके पश्चात तो हजारों जवान देश को स्वतंत्र कराने के लिए रणक्षेत्र में कूद पड़े। जब एक हिंदुस्तानी किसी बात पर अड़ जाता है तो वह अपने प्राणों की परवाह किये बिना अपने लक्ष्य की और आगे बढ़ता है और इसका एक स्पष्ट उदाहरण भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव ने दिया कि वे हंसते हंसते फांसी के फंदे पर झूल गए और चूं तक नहींं की। अपनी सजा को माफ कराने के लिए नहींं गिड़गिड़ाए।

स्वतंत्रता सेनानियों की मेहनत और उनका बलिदान सफल हुआ

आखिर स्वतंत्रता सेनानियों की मेहनत और उनका बलिदान सफल हुआ और हमारा देश स्वतंत्र हो गया। अब प्रश्न यह है कि जिन हजारों स्वतंत्रता सेनानियों ने देश को स्वतंत्र करने में अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया, इसके पीछे उनका क्या स्वप्न था? उन्होंने कैसे भारत की कल्पना की थी? क्या उन्होंने कभी ऐसा सोचा होगा कि जिस देश को वे स्वतंत्र कराना चाहते हैं वो देश आंतरिक रूप से आंतरिक झगड़ों, विवाद और कलह का शिकार होगा। धर्म और जाति के नाम पर दंगे होंगे।

यहां के लोग स्वार्थ के वशीभूत होकर केवल और केवल अपने बारे में सोचेंगे। इंसान इंसान का शत्रु बन जाएगा। व्यक्ति नशों की जकड में फंसकर अपना घर परिवार समाप्त कर लेगा। बेईमानी व भ्रष्टाचार का साम्राज्य बढ़ेगा। देशभक्तों को मान सम्मान नहींं मिलेगा। शहीदों के परिवार को सम्मान के लिए भटकना पडेगा। जी नहींं उन्होंने ऐसा कदापि नहींं सोचा होगा क्योंकि वे तो एक ऐसे भारत की कल्पना करते थे जो विश्व के लिए आदर्श हों।

शहीदों और स्वतंत्रता सेनानियों को नमन

तो आइये हम सब मिलकर हमारे शहीदों और स्वतंत्रता सेनानियों को नमन करते हुए उनका गुणगान करे। उनके चरित्र हमारे इतिहास का अंग बने। हमारी आने वाली पीढ़ियां उनसे सीख लेकर केवल और केवल देश प्रेम की भावना सीखें और भारत देश एक ऐसा सशक्त देश बनकर उभरे कि लोग यहां के नागरिकों को बारम्बार नमन करें। इस धरती को झुककर नमन करें। यहां की संस्कृति को अपनाएं।

स्वतंत्रता सेनानियों की मेहनत और उनका बलिदान सफल हुआ और हमारा देश स्वतंत्र हो गया। अब प्रश्न यह है कि जिन हजारों स्वतंत्रता सेनानियों ने देश को स्वतंत्र करने में अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया, इसके पीछे उनका क्या स्वप्न था?

डॉ. अशोक कुमार वर्मा इन्सां

 

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