सम्पादकीय

कश्मीर में परिस्थितियां शांतिपूर्ण हों

Circumstances

Circumstances पिछले कई दिनों से जम्मू कश्मीर में पत्थरबाजी फिर से चर्चा में आ गई है। खासकर विद्यार्थियों की ओर से रोष प्रदर्शनों ने परिस्थितियों को काफी नाजुक बना दिया है। ताजा परिस्थितियां सोशल मीडिया में वायरल हुई दो वीडियोज के इर्दगिर्द घूम रही हैं।
एक वीडियो कश्मीरी नौजवानों द्वारा चुनाव ड्यूटी पूरी कर लौट रहे सुरक्षा जवानों के साथ किए जा रहे दुव्यर्वहार को दर्शा रही है वहीं दूसरी वीडियो भारतीय सेना की छवि को खराब करने वाली है, जिसमें सेना के जवान एक कश्मीरी युवक को गाड़ी के आगे बांध कर ले जा रहे हैं।

वीडियो में दावा किया जा रहा है कि ऐसा पत्थरबाजों को सबक सिखाने के लिए किया जा रहा था। उक्त दोनों वीडियो दो दृष्टिकोण स्पष्ट कर रहे हैं जो दशकों से कश्मीर की परिस्थितियों के इर्दगिर्द घूम रहे हैं। किसी भी अमानवीयता को स्वीकार नहीं किया जा सकता।

Circumstances गंभीरता से सोचा जाए तब कश्मीर में इस वक्त परिस्थितियां काफी नाजुक हो चुकी हैं। विदेशी शक्तियों के अलावा कश्मीर में स्थानीय राजनेताओं की स्वार्थपूर्ण राजनीति ने भी इसे बेहद जटिल बना दिया है। यह बात एकदम स्पष्ट है कि कश्मीर में पत्थरबाजी विदेश प्रायोजित एक सुनियोजित षड्यंत्र है जोकि पत्थरबाजों को पैसे देकर चलाया जा रहा है।

नोटबंदी के दौरान यह एकदम साफ हो गया था। नोटबंदी  के दौरान पत्थरबाजी एकदम बंद हो गई थी। विद्यार्थियों का अपने अधिकारों के लिए रोष-प्रदर्शन करना जायज है, परंतु पत्थरबाजी किसी समस्या का हल नहीं। कश्मीर के अलगाववादी नेताओं ने अपने स्वार्थों के लिए कश्मीरी युवाओं को पत्थरबाजी में लगा दिया है, जिसके चलते नासमझ युवा लोकतंत्र व उसका महत्व एवं अर्थ भूल गए हैं।

Circumstances कश्मीर में परिस्थितियों को सुधारने के लिए यह जरूरी है कि राजनेता, सेना, पुलिस एवं आम नागरिकों को एक-समान नजर से देखें।

मानवीय मुद्दों को राजनीतिक नफे-नुक्सान में नहीं तोला जाए। जैसा कि अब उप-चुनाव जीतने के लिए डॉ. फारुख अब्दुल्ला पत्थरबाज युवाओं को प्रोत्साहित कर रहे हैं। यह राजनीतिक खेल बेहद खतरनाक है। वर्तमान गठबंधन सरकार को इस मुद्दे पर सैद्धांतिक व व्यवहारिक तौर पर बेहद संजीदगी से खराब परिस्थितियों को ठीक करना होगा।

Circumstances सरकार अगर फौज को अनुशासन में रखे हुए है, तब विद्यार्थियों को भी शांत कर उनकी कक्षाओं में वापिस भेजा जाए। विद्यार्थियों को शांत करने के लिए प्रशासन को अतिरिक्त प्रयास करने होंगे, जो यह समझाएं कि पत्थरबाजी कश्मीर के हित में नहीं है, यह हिंसा को बढ़ाती है, जिससे कश्मीर की सुंदरता व संसाधन बर्बाद हो रहे हैं।

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