सम्पादकीय

चीन औछी हरकतें बंद करे

China Media vs India

China Media vs India चीन का सरकारी मीडिया भारत के खिलाफ बोलने का कोई भी मौका नहीं चूकता। दलाईलामा की अरुणाचल यात्रा के बाद से चीन बौखलाहट में है। यही नहीं चीन ने अरुणाचल प्रदेश के कई शहरों के नाम बदलने की भी चर्चा को छेड़ा, जो पूरी तरह भारत की अखंडता व प्रभुत्ता को चुनौती है।

चाहे चीनी शासक भारत से व्यापार व अन्य समझौतों के लिए सक्रिय हैं, लेकिन चीनी मीडिया की भूमिका एतराज योग्य है। चीन का रवैया ऐसा है, जैसे अरुणाचल प्रदेश चीन का अंग हो जिस पर भारत ने कब्जा किया हो।

अरुणाचल भारत का अटूट अंग है। इस संबंधी चीन व भारत का कूटनीतिक स्तर पर कोई विवाद ही नहीं। फिर अरुणाचल के शहरों का नाम बदलने के पीछे चीन की मंशा क्या है? चीन व भारत पड़ौसी देश हैं। चीन अपने उत्पादन के लिए भारत को बड़ी मंडी के तौर पर देखता आ रहा है।

China Media vs India यह स्पष्ट है कि चीन के भारत से संबंध उसकी आर्थिक मजबूरी है। भारतीय जनता द्वारा चीनी सामान का बायकाट करने की मुहिम ने चीन को इस बात का एहसास करवा दिया था कि वह पड़ौसी देश के सहयोग बिना तरक्की नहीं कर सकता लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शक्ति संतुलन कायम रखने के लिए चीन भारत के दुश्मन पाक का साथ दे रहा है और अमेरिका के दोस्तों को निशाने पर ले रहा है।

अपने दोहरे मापदंडों के कारण चीन आर्थिक रूप से भी कमजोर हो रहा है। भारत को इस मामले में चीन की कार्रवाइयों का सख्त नोटिस लेने की जरूरत है। पिछले कई सालों में चीनी सेना द्वारा लेह-लद्दाख में निर्माण करने की कार्रवाई के लिए चीन को शर्मिंदा होना पड़ा था। भारत के सख्त एतराज के कारण चीनी सेना को वापिस जाना पड़ा। पाकिस्तान भारत खिलाफ हमेशा जहर उगलता आ रहा है।

China Media vs India ये घटनाक्रम अमन शान्ति के साथ साथ व्यापारिक संबंधों को भी कमजोर करेंगे। बेहतर हो यदि चीन पड़ौसी देश भारत के खिलाफ साजिश रचने की बजाय सहयोग व सद्भावना को मजबूत बनाएं। सैन्य बल के अनुसार भी अब हालात 1962 वाले नहीं रहे और न ही आर्थिक पक्ष से भारत को कम आंका जा सकता है। भारत ने अपनी मानवतावादी विचारधारा का सबूत देकर दलाईलामा को शरण दी है।

शहरों के नाम बदलने जैसी कार्रवाईयों से उलटा चीन की शान पर धब्बा लगेगा। अरुणाचल के किसी नेता का यह बयान बड़ा वजनदार है कि बीजिंग का नाम मुंबई रखने से वह भारत का अंग नहीं बन सकता। भारत को चिढ़ाने से चीन को लाभ नहीं मिल सकता।

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