सम्पादकीय

संस्कृति से भरपूर हों बाल मन

Culture

Culture महापुरूषों की जीवनी न केवल विद्यार्थियों अपितु समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत व मार्गदर्शन होती है। कभी प्राचीन शिक्षा प्रणाली धार्मिक, नैतिक, सदाचारक, मूल्यों पर आधारत होती थी। शिक्षा का मुख्य उद्देश्य मानवीय चरित्र का निर्माण था।

दुनियावी कलाएं शिक्षा का हिस्सा होने के बावजूद नैतिक विकास को प्रमुखता दी जाती थी। जैसे-जैसे शिक्षा को व्यवसायिक का रंग चढ़ता गया तो विद्यार्थियों के जहन से संस्कृति व सामाजिक मूल्य धुंधले दिखने लगे। आधुनिक शिक्षा में धर्म व नैतिकता का हिस्सा सिकुड़ता गया।

दूसरा स्कूलों में छुट्टी कल्चर ने नई पीढ़ी को संस्कृति से दूर कर दिया। महापुरुषों से सबंधित दिनों पर छुट्टी तो होती है लेकिन उनके जीवन, शिक्षाओं व समाज को उनके योगदान का जिक्र न के बराबर होता है।

आज अधिकतर विद्यार्थी व युवा ऐसे मिल जाते हैं जिन्हें शहीद भगत सिंह व अन्य देश भक्तों के बारे में जानकारी तक नहीं होती। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अदित्यानाथ योगी की इस बात में बड़ा वजन है कि किसी महापुरुष के जन्मदिन पर छुट्टी रखने की बजाय उस दिन समय निश्चित कर महापुरुषों के बारे में विचार चर्चा की जाए।

योगी ने उत्तर प्रदेश के स्कूली सेशन के सिकुड़ जाने का भी तर्क दिया है। छुट्टियां बंद हों या न हों, लेकिन इस बात पर जरूर जोर दिया जाना चाहिए कि देश की संस्कृति मजबूत बनाया जाए। इससे शिक्षा को मजबूत मिलेगी।

Culture साथ समाज में साकारात्मक परिवर्तन की उम्मीद बंधेगी। यह स्वीकार करने में कोई दो राय नहीं कि चोरियां, डकैती, दुराचार, हत्याएं व कई अन्य अपराधों के बढ़ने का का मुख्य कारण संस्कृति से दूर होने है। अपराधियों में युवा सबसे ज्यादा संलिप्त है, जिनके दिल व दिमाग धार्मिक संस्कृति से कोसो दूर है। कोई देश केवल अपनी भौतिक तरक्की के कारण संपूर्ण नहीं हो सकता बल्कि रोशन दिमाग लोग ही अमन, खुशहाली व भाईचारे वाला समाज स्थापित करेंगे।

विज्ञान मानव के सपनों को स्वीकार करती है लेकिन ईमानदारी, सब्र-संतोष, त्याग, सहयोग, भाईचारा जैसे गुण कोई मशीन नहीं दे सकती, केवल धर्म संस्कृति ही दे सकती है। यदि बच्चा हिंसक सीरियल देखता है तो उसके बुरे प्रभावों से बचा नहीं जा सकता।

महापुरुषों की नेकी पढ़ सुनकर युवा अच्छा प्रभाव अपने जिहन में लेकर आएंगे। अदित्यानाथ योगी की इस बात पर जरूर विचार होना चाहिए कि जिन महापुरुषों के नाम पर छुट्टी हो, उन्हीं महापुरुषों की देन बच्चों की मानसिकता का हिस्सा जरूर बने।

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