राजस्थान

जमीन को कमांड करने का मामला

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एक्सईएन ने एसीबी में दर्ज करवाए अपने बयान

हनुमानगढ़ (सच कहूँ न्यूज)। जल संसाधन विभाग द्वारा अनकमांड रकबे को कमांड करने का मामला एसीबी में पहुंचने के बाद विभाग के अधिकारी इस मामले में कुछ भी कहने से बच रहे हैं। जल संसाधन विभाग भले ही नए क्षेत्र को सिंचित करने से लगातार इंकार कर रहा हो लेकिन न्यू फतेहगढ़ माइनर बनाकर 2547.79 एकड़ रकबा अनकमांड से कमांड कर दिया गया है। इस मामले में अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए टाउन निवासी वार्ड 25 के पार्षद अनिल खीचड़ ने एसीबी में परिवाद दिया है।

जानकारी के अनुसार जल संसाधन विभाग के अधिकारियों ने अपने स्तर पर ही फतेहगढ़ माइनर में 16 नए चक स्थापित कर अवैध तरीके से मोघे स्थापित किए हैं जबकि असिंचित जमीन को सिंचित करने का अधिकार सिर्फ राज्य सरकार के पास है। मोघों का डिजाइन भी अधिकारी ने अपने स्तर पर ही मनमाने तरीके से तैयार किया और इसके लिए मुख्य अभियंता से स्वीकृति भी नहीं ली गई। इस मामले में परिवादी पार्षद अनिल खीचड़ ने बताया कि विभाग के अधिकारी इस मामले में जुड़े तथ्यों को छुपा रहे हैं तथा कमांड एरिया खोलने के लिए राज्य सरकार की मंजूरी आवश्यक है। खीचड़ ने बताया कि मामले की जांच होने के बाद कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आएंगे। उन्होंने अधिकारियों को इस मामले में अनियमितता बरतने का आरोप लगाया है।

किसानों को पूरा पानी नहीं मिल रहा

जानकारी के अनुसार 2008 में न्यू फतेहगढ़ माइनर बनाने के लिए अधिकारियों ने सरकार को प्रपोजल बनाकर भेजा था, जिसमें बताया गया कि सेम के नाले का गंदा पानी एसएसडब्ल्यू (श्यामसिंह वाला) में छोड़ जाएगा। इसके बाद अधिकारियों ने इसे बदलकर न्यू फतेहगढ़ माइनर को एसएसडब्ल्यू वितरिका से जोड़ दिया। पार्षद खीचड़ ने बताया कि फतेहगढ़ माइनर को एसएसडब्ल्यू से जोड़ने के कारण इस वितरिका के किसानों को पूरा पानी नहीं मिल रहा।

जबकि नहर जोड़ने के बाद पीछे से पानी बढ़वाया जाता है, ताकि किसानों को पूरा पानी मिल सके, परंतु अधिकारियों से लापरवाही बरतते हुए सभी नियम-कायदों की धज्जियां उड़ा दी। सूूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार जल संसाधन विभाग के मुताबिक 2547.79 एकड़ असिंचित भूमि को सिंचित किया गया है, लेकिन इसकी अंतर राशि राजस्व विभाग के पास जमा नहीं करवाई गई है। अंतर राशि जमा होने से पहले ही अनकमांड एरिया को कमांड कर दिया गया। इससे सरकार को करोड़ों रुपए के राजस्व का नुकसान हुआ है। इसके अलावा श्यामसिंहवाला एचएमएच वितरिका का 2473.80 एकड़ रकबा न्यू फतेहगढ़ माइनर से जोड़ा गया है।

मेरा इस मामले से कोई लेना-देना नहीं है

जमीन को कमांड करने के मामले में मेरे खिलाफ एसीबी में परिवाद दिया गया है। मैंने इस मामले में अपने बयान दर्ज करवा दिए हैं, जिसमें मैंने बताया कि इस मामले से मेरा कोई लेना-देना नहीं है। नहर 2008 में बनी थी। तभी इसको कमांड किया गया है। जबकि मैं 2015 से यहां हूं। मैंने इस जमीन को कमांड करने के कोई आदेश नहीं दिए तथा ना ही मेरे कहीं हस्ताक्षर है।
लेखराम बरायच, एक्सईएन, जल संसाधन विभाग

पी फार्म पर है एक्सईएन बरायच के हस्ताक्षर

नहर में पानी चलाने के लिए एक्सईएन बरायच ने पी फार्म पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसके कागजात मेरे पास है। नहर में पानी लेने के लिए पी फार्म तैयार कर राज्य सरकार से स्वीकृति लेनी पड़ती है। फतेहगढ़ माइनर में पानी की स्वीकृति के लिए एक्सईएन बरायच ने ही कागजों पर हस्ताक्षर किए हैं। इस मामले की जांच एसीबी कर रही है। कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आएंगे।

पार्षद अनिल खीचड़, परिवादी

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