यहां मरकर भी इंसानियत के काम आते हैं ‘इन्सां’

Body Donation

 जगराज सिंह इन्सां की मृत देह पर शोध करेंगे मेडिकल के छात्र

  • सेवा कार्यां व शालीन स्वभाव के चलते हमेशा रहेंगे स्मरणीय : सुरजीत इन्सां

ओढां, राजू। इस स्वार्थी युग में लोग जहां जीते-जी किसी के काम नहीं आते वहीं डेरा सच्चा सौदा के ‘इन्सांझ् मरकर भी इंसानियत (Body Donation) के काम आ रहे हैं। इसी कड़ी में एक नाम और शामिल हुआ है ब्लॉक श्री जलालआणा साहिब के गांव देसू मलकाना निवासी जगराज सिंह इन्सां का। इस महान कार्य की सर्वत्र प्रशंसा रही। मंडी कालांवाली में रहने वाले गांव देसू मलकाना निवासी 84 वर्षीय जगराज सिंह इन्सां सोमवार रात्रि सचखंड जा विराजे। वे पिछले एक सप्ताह से अस्वस्थ चल रहे थे। जगराज सिंह इन्सां ने पूजनीय परमपिता शाह सतनाम जी महाराज से नाम शब्द लिया हुआ था। जगराज सिंह इन्सां के मरणोपरांत उनके पुत्र प्रिंसीपल जगशरण इन्सां व अध्यापक सुखचरण इन्सां ने उनकी मृत देह केडी मेडिकल कॉलेज एंड रिसर्च सैंटर मथुरा को दान कर दी। सचखंडवासी को अंतिम विदाई देने हेतु साध-संगत के अलावा अनेक गणमान्य लोग मौजूद रहे।

अंतिम इच्छा थी शरीरदान करने की | Body Donation

जगशरण इन्सां ने बताया कि उनके पिता ने पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां की पावन प्रेरणाओं पर चलते हुए मरणोपरांत शरीरदान करने के लिए प्रतिज्ञा पत्र भरा था। उन्होंने परिवार के समक्ष ये इच्छा व्यक्त की थी कि मरणोपरांत उनकी मृत देह मेडिकल शोध कार्यां हेतु दान कर दी जाए। ब्लॉक भंगीदास सुरजीत इन्सां ने बताया कि जगराज इन्सां ब्लॉक के कर्मठ सेवादारों में गिने जाते थे। वे शाह सतनाम जी ग्रीन-एस वैल्फेयर फोर्स विंग के सदस्य थे। उन्होंने लंगर सेवा में करीब 32 वर्षांे तक सेवा की। उन्होंने बताया कि जगराज इन्सां ने अनेक लोगों को डेरा सच्चा सौदा से जोड़ते हुए उन्हें बुराइयों से दूर किया था। उन्होंने सरसा, गुजरात, फेफाना व चचियानगरी सहित विभिन्न जगहों पर सेवा कार्यांे में योगदान निभाया।

अंतिम समय तक सेवा-सुमिरन रहा जारी | Body Donation

जगराज इन्सां अपने सेवा कार्यांे एवं शालीन स्वभाव के चलते हर किसी के प्रिय थे। उनके पुत्र सुखचरण इन्सां ने बताया कि उनके पिता हमेशा से ही सेवा को प्राथमिकता देते थे। सेवा के लिए जब भी कोई संदेश आता तो वो उसी समय अपने सारे कार्य छोड़ देते थे। उन्होंने बताया कि सोमवार रात्रि उनके पिता ने पूज्य गुरु जी के आॅनलाइन दर्शन किए और कुछ समय तक सुमिरन करने उपरांत देह त्याग कर दिया। पूरा दिन टीवी पर सत्संग व भजन वाणी सुनना उनकी दिनचर्या थी।

फूलों से सजी गाड़ी में किया रुखस्त

जगराज इन्सां को अंतिम विदाई देने हेतु बड़ी संख्या में साध-संगत, गणमान्य लोग व ब्लॉक कमेटी के सदस्य पहुंचे। उन्होंने ‘सचखंडवासी जगराज इन्सां अमर रहेझ् के नारे लगाकर व सैल्यूट कर उनकी देह को फूलों से सजी गाड़ी में रुखस्त कर दिया। इससे पूर्व डेरा सच्चा सौदा की मुहिम बेटा-बेटी एक समान के तहत उनकी अर्थी को कंधा देने की रस्म उनकी पुत्रवधुओं सिमरजीत इन्सां, गुरविंदर कौर इन्सां व रूपिंदर कौर तथा पौत्री हर्षप्रीत इन्सां ने निभाई। उनकी शव यात्रा विभिन्न जगहों से होकर गुजरी। साध-संगत ने पंजाब बस स्टैंड से उन्हें इलाही नारे के साथ अंतिम विदाई दी।

इस महान कार्य के लिए मैं परिजनों की सराहना करता हूं। डेरा सच्चा सौदा के अनुयायियों का हर कदम मानवता को समर्पित है। देह दान से न केवल मेडिकल के विद्यार्थियों को शिक्षा में मदद मिलेगी बल्कि समाज में भी जागृति आएगी। आज के स्वार्थी समय में जहां लोग बिना मतलब के किसी को बुलाना भी उचित नहीं समझते वहां नि:स्वार्थ भावना से शरीरदान कर देना अपने आप में एक बड़ी मिसाल है।
– संदीप वर्मा, एमसी (वार्ड नंबर 5, मंडी कालांवाली)

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