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रंग लाई प्रबल सोच व कड़ी मेहनत

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Agriculture Articles | सब्जी की हाइटेक खेती से बदली कांशीराम की जिंदगी

कहते हैं कि अगर दिल में कुछ कर गुजरने की ललक हो तो नेक इरादों के आगे बड़ी से बड़ी मुसीबत भी घुटने टेक देती है। ऐसा ही कुछ कर दिखाया है चक्कां निवासी 65 वर्षीय कांशी राम नोखवाल ने। आज का किसान दिन रात एक करके अपने परिवार का लालन पालन करने में लगा है, लेकिन अत्याधिक महंगाई के चलते वह उभर भी नहीं पा रहा। Agriculture Articles

परिवारों के खर्चे व पानी की कमी के चलते अत्यधिक खर्चें की खेती किसान की वर्ष भर में कमर तोड़ कर रख देती है, लेकिन अच्छी सोच व आधुनिक खेती का साथ लिया जाए तो कुछ भी असंभव नहीं है।

किसान कांशीराम नोखवाल जिला सरसा के खण्ड रानियां में पड़ने वाले गांव चक्कां का निवासी है। इनका जन्म 4 जुलाई 1952 को आर्थिक रूप से गरीब परिवार से संबधित शेराराम नोखवाल के घर हुआ था।

काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा

माता हरकोरी व पिता शेरा राम के इकलोती संतान होने की वजह से इन्हें सन् 1959 में शिक्षा ग्रहण करने के लिए गांव के ही राजकीय प्राथमिक पाठशाला चक्कां में लगाया गया। माता-पिता के अच्छे संस्कार व तेज दिमाग के चलते कांशीराम पढ़ाई में काफी होशियार थे, लेकिन परिवार की हालात कमजोर होने की वजह से उन्हें पाँचवीं तक ही शिक्षा मिल पाई।

इसके बाद खेती में माता-पिता को हाथ बटाया व छोटी सी आयु में ही उनकी शादी कर दी गई। शादी के बाद तीन बेटियों व दो बेटों के पढ़ाई व शादी के खर्चों के साथ परिवार की जिम्मेवारी ने उस सूखे के समय में कांशीराम की कमर तोड़ कर रख दी। जिससे खराब मौसम के चलते उन्हें खेती में अच्छी बचत न होने की वजह से उन्हें काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा।

Agriculture Articles | पहले और अब के जीवन में फर्क

कांशीराम के पास पहले कच्चे मकान, घर-परिवार के लिए थोड़ी सी जगह, ऊंट गाड़ी, हुआ करती थी, लेकिन आज इस आधुनिक खेती की वजह से टैÑक्टर, पक्के व अच्छे मकान, पशुपालन का भी कार्य, परिवार के लिए गांव में खुली जगह व खेती के लिए कुछ भूमि भी खरीद ली है। इतना ही नहींं आज 65 वर्ष की आयु में भी कांशीराम खुद व उसका एक बेटा अच्छी आधुनिक सब्जी की खेती भी कर रहे हैं जिससे वो दोनों वर्ष भर में लाखों रुपये की पैदावार प्राप्त कर लेते हैं।

Agriculture Articles | इस तरह आया बदलाव

आज से करीब 15 वर्ष पहले पारिवारिक खर्चों व अच्छी खेती के न होने की वजह से कांशीराम कर्ज के नीचे आ गया था, लेकिन पत्नी का साथ व खुद के हौंसले बुलंद होने से कांशीराम ने कुछ नया करने की मन में ठान ली और शुरूआत में मात्र दो कनाल पर ही सब्जी लगाई। दिन रात की कड़ी मेहनत रंग लाई व कांशीरामको नया रास्ता नजर आ गया।

उसके बाद कांशीराम ने गर्मी के मौसम में ककड़ी, खीरा, तोरी, टिन्डी, तरबूज, करेला, लोकी व सर्दी के मौसम में लहसुन, प्याज, गाजर, मूली, पालक, धनिया इत्यादी की खेती करनी शुरू कर दी। सब्जी तैयार हो जाने पर कांशीराम साईकिल पर जीवन नगर की सब्जी मण्डी में सब्जी को लगाता रहा, लेकिन बचत कम नजर आने पर अपनी ऊंट गाड़ी में डालकर आस-पास के गांवों में अच्छी कीमत पर सब्जी बेचने जाता रहा जिससे आज वो एक समृद्धवान किसान बन गए हैं।

 

Agriculture Articles | ये है कांशीराम की सोच

कांशीराम का कहना है कि अगर खेती में अच्छी पैदावार लेनी है तो कड़ी मेहनत, लगन, दृढ़ विश्वास के साथ आधुनिक व जैविक खेती का महत्ता देनी होगी, तभी अच्छी बचत वाली खेती की जा सकती है। खेती के लिए दिन रात खेतों में ही रहना पड़ता है, जमीन की अच्छी बुआई, मीठे पानी, गुणवता वाले बीज, समय-समय पर निराई-गुडाई, खाद, कीटनाशकों का प्रयोग उचित मात्रा में करना चहिए।

इसके साथ ही फसलों को अच्छी मण्डी या गांवों में इसकी सप्लाई की जाए तो सब्जी की खेती से अच्छी पैदावार प्राप्त की जा सकती है। खेती के लिए मीठे नहरी पानी व बरसात की कमी तथा भूमिगत पानी के अत्यधिक लवणीय होने की वजह से खेती में अच्छी पैदावार नहीं ली जा सकती।

लेकिन अगर सोच व समझ से पानी का संचय करके व ड्रिप या पोली हाऊस को काम में लिया जाए तो कम भूमि पर ही ज्यादा पैदावार प्राप्त की जा सकती है।

विशेष प्रस्तुति- सुनील कुमार खारियां

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